
सर्वोच्च अदालत द्वारा अशोक राई के नेतृत्व वाली जसपा पार्टी का पंजीकरण रद्द किए जाने के बाद उस पार्टी के जनप्रतिनिधियों की कानूनी स्थिति पर प्रश्न उठे हैं। उपेन्द्र यादव के नेतृत्व वाली जसपा नेपाल ने अशोक राई के समूह से जुड़े लुम्बिनी और कोशी प्रदेश के सांसदों से स्पष्टीकरण मांगने की तैयारी की है। अशोक राई ने अदालत के फैसले को विभिन्न पार्टियों के साथ एकीकृत होकर नए तरीके से आगे बढ़ने का रास्ता खोलने वाला बताया। २२ जैठ, काठमांडू। सर्वोच्च अदालत ने अशोक राई नेतृत्व वाली जसपा पार्टी को मान्यता न देने के बाद इस पार्टी से बने प्रदेश सांसद, मंत्री और स्थानीय प्रतिनिधियों को उपेन्द्र यादव की जसपा नेपाल से स्पष्टीकरण देने को कहा है। निर्वाचन आयोग ने २०८१ में जसपा नेपाल से विभाजित हुई अशोक राई नेतृत्व वाली जसपा को दल के रूप में पंजीकृत किया था। इस निर्णय के खिलाफ उपेन्द्र यादव की पार्टी ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। न्यायाधीश त्रय कुमार रेग्मी, महेश शर्मा पौडेल और श्रीकांत पौडेल की पूर्ण पीठ ने राई नेतृत्व वाली जसपा के पंजीकरण को निरस्त कर दिया, जिससे पार्टी की कानूनी स्थिति समाप्त हो गई।
सर्वोच्च के इस आदेश के बाद राई के पार्टी से बने जनप्रतिनिधियों के दलगत अस्तित्व पर प्रश्न उठे हैं। वे कानूनी तौर पर अब जसपा नेपाल के जनप्रतिनिधि माने जाएंगे। ऐसे जनप्रतिनिधियों के खिलाफ पार्टी विभाजन कर अनुशासन विरुद्ध कार्य करने के आरोप में जसपा नेपाल स्पष्टीकरण मांगेगी। लुम्बिनी के आंतरिक मामला तथा कानून मंत्री आदेश कुमार अग्रवाल भी स्पष्टीकरण के दायरे में हैं। मंत्री अग्रवाल, लुम्बिनी प्रदेश के सांसद भण्डारीलाल अहिर और कोशी प्रदेश की सांसद निर्मला लिम्बु से स्पष्टीकरण मांगे जाने की जानकारी जसपा नेपाल के प्रवक्ता मनिष सुमन ने दी। अग्रवाल, अहिर और लिम्बु वे सांसद हैं जो जसपा नेपाल के विभाजन के बाद अशोक राई के नेतृत्व में बने जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) में शामिल हुए। जसपा नेपाल के प्रवक्ता सुमन के अनुसार, पार्टी छोड़कर अन्य पार्टी में गए सदस्यों के पद रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘उनसे स्पष्टीकरण लिया जाएगा, उसके बाद कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।’ कोशी प्रदेश सभा सदस्य निर्मला लिम्बु कहती हैं कि उन्हें दलत्याग अधिनियम के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती। ‘मैंने पार्टी नहीं छोड़ी है, न ही दूसरी पार्टी ज्वाइन की है। नेताओं के मतभेद के कारण पार्टी टूटने पर मैंने जसपा नेपाल को चुना है,’ लिम्बु ने कहा। लुम्बिनी प्रदेश के सांसद अहिर ने कहा कि सर्वोच्च के आदेश का पूरा पाठ आने के बाद निर्वाचन आयोग के निर्णय को देख अपनी राह तय करेंगे। ‘हम अभी सलाह-मशविरा कर रहे हैं। आयोग के निर्णय के बाद निष्कर्ष निकालेंगे,’ उन्होंने कहा। विभाजित दल को मान्यता न मिलने पर अशोक राई को जसपा के बजाय नया नाम रखना होगा। जसपा के नेता योगराज लिम्बु ने बताया कि सर्वोच्च के आदेश के बाद पार्टी को मजबूत बनाने पर चर्चा चल रही है। अध्यक्ष राई ने कहा कि इस फैसले से असमंजस में न पड़ें और सक्रिय बने रहें। उन्होंने कहा, ‘इससे विभिन्न पार्टियों के साथ एकीकृत होकर नए तरीके से आगे बढ़ने का रास्ता खुला है।’ राई ने फेसबुक पर लिखा, ‘इसका उपयोग एक अवसर के रूप में करते हुए तत्काल एकजुट पार्टी बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।’




