धनकुटा नगरपालिक ने वॉर्डस्तर के बजट को 10 लाख रुपये तक सीमित करने का निर्णय लिया

23 जेठ, धनकुटा। आगामी आर्थिक वर्ष 2083/084 के लिए धनकुटा नगरपालिक ने वॉर्डस्तर के बजट को 10 लाख रुपये में सीमित करने का निर्णय लेने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। पिछले वर्षों में लगभग 55 लाख रुपये तक का बजट सीमा निर्धारित कर योजनाएं बनाई जाती थीं, लेकिन इस वर्ष 45 लाख रुपये की कटौती होने से वॉर्ड दबाव में हैं। नगरपालिक ने हाल ही में सभी 10 वार्डों को बजट सीमा और मार्गदर्शन पत्र भेजते हुए आर्थिक विकास, सामाजिक विकास, अवसंरचना, सुशासन, अन्तरसम्बन्धित क्षेत्र एवं वन-पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्रों में खर्च की व्यवस्था सुनिश्चित की है। वॉर्डों को निर्देश दिया गया है कि वे 10 लाख रुपये के भीतर ही सहभागी योजनाएं तैयार करें।
नगरपालिकाक जानकारी के अनुसार संघ और प्रदेश सरकार से प्राप्त वित्तीय हस्तांतरण में कमी आई है, पिछले वर्ष की स्रोत परिचालन स्थिति कमजोर रही है तथा दायित्वों में वृद्धि हो रही है। इन सब कारकों को ध्यान में रखते हुए बजट सीमा घटाई गई है। वित्तीय वर्ष 2082/083 में नगरपालिक ने 1 अरब १२ करोड़ २५ लाख २२ हजार ७३० रुपये का बजट जारी किया था। किन्तु आगामी वित्तीय वर्ष में अनुदान राशि घटने के कारण कुछ योजनाओं की रकम दायित्व में चली जाने की संभावना है। धनकुटा नगरपालिक के प्रमुख चिन्तन तामांग ने बताया कि पिछले वर्षों से दायित्व लगातार बढ़ रहे हैं, और संसाधनों की गारंटी के बिना बड़े बजट निर्धारित करने पर कार्यान्वयन में समस्या आती है। उन्होंने कहा कि जनता को दीर्घकालीन प्रभाव न हो, इसलिए वास्तविक बजट सीमांकन किया गया है।
हालांकि, वार्ड प्रमुख इस नए बजट सीमा से असंतुष्ट हैं। धनकुटा नगरपालिका के वार्ड नंबर 6 के अध्यक्ष मिलन खड्गी ने कहा कि जनता की अपेक्षाओं और आवश्यकताओं के मुकाबले 10 लाख रुपये बहुत कम है। वार्ड की समस्याएं और मांगें ज्यादा होने के कारण इस सीमित बजट से प्राथमिकताएं पूरी करना मुश्किल होगा। इसी प्रकार धनकुटा नगरपालिका के वार्ड नंबर 10 के अध्यक्ष नगेन्द्र पाण्डे ने कहा कि सीमित बजट के कारण वार्ड स्तर पर आवश्यक विकास कार्यक्रमों का संचालन असंभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि 10 लाख में वार्ड की मूलभूत अवसंरचना भी संभालना कठिन होगा, इसलिए विकास कार्यों पर प्रभाव पड़ेगा। नगरपालिक ने वॉर्ड स्तर पर संचालन और विविध खर्चों के लिए 4 लाख 68 हजार रुपये अलग रखने का प्रावधान किया है। सामाजिक विकास के अंतर्गत कार्यक्रमों की न्यूनतम राशि 50 हजार रुपये रखी गई है तथा सड़कों की योजनाओं में नई मार्ग बनवाने के बजाय स्तरोन्नति को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है।





