
२१ वर्षीया उद्यमी कुसुम रेग्मी ने काठमाडौँ में ‘थ्रिफ्ट बाइ कुस’ नामक लोकप्रिय सेकंड हैंड कपड़ों की दुकान चलाना शुरू किया है। महिलाओं के दराज में सजे कपड़ों के बारे में सोचते ही, काफी हद तक दिलचस्प जवाब मिलते हैं। क्योंकि महिलाओं के दराज कपड़ों से भरे होते हैं। कुछ पुराने, कुछ नए, और कुछ ऐसे भी जो पहने ही नहीं गए होते। फिर भी, बाजार में नए कपड़े आते देख महिलाएं खुद को रोक नहीं पातीं। कपड़ों का ढेर हो जाने के बाद क्या करना चाहिए? इस समस्या का समाधान खोजते हुए कुसुम ने एक अनूठी विधि अपनाई और सेकंड हैंड कपड़ों का थ्रिफ्ट शॉप शुरू किया।
कुसुम का यह ‘थ्रिफ्ट बाइ कुस’ आज काठमाडौँ के युवाओं में एक जाना माना नाम बन चुका है। अपने दराज में जमा कपड़े बेचने की शुरुआत उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करके की थी। स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही व्यवसाय के प्रति आकर्षण रखने वाली कुसुम ने कक्षा ११–१२ में ही अपने पिता से स्टोर खोलने की बात की थी। हालांकि उस समय व्यवसाय को गंभीरता से आगे बढ़ाने का इरादा नहीं था। उन्होंने अपने व्यक्तिगत टिकटॉक अकाउंट पर पुराने कपड़े बेचने का वीडियो पोस्ट किया, जिसे अप्रत्याशित रूप से अच्छा प्रतिक्रिया मिली।
कुसुम के अनुसार, थ्रिफ्ट की अवधारणा उन्हें शुरू से ही आकर्षित करती रही है। उच्च गुणवत्ता वाले ब्रांडेड कपड़े कम कीमत में प्राप्त होने के कारण यह सोच उन्हें पसंद आई। उन्होंने विभिन्न देशों के सप्लायरों पर शोध कर बैंकॉक से कपड़े आयात करने का निर्णय लिया। थ्रिफ्ट स्टोर में रखे कई वस्त्र नए या ब्रांड के शेष स्टॉक होते हैं, जो इस्तेमाल ही नहीं किए गए होते। वह थ्रिफ्ट व्यवसाय को केवल एक व्यापार रूप में नहीं देखतीं, बल्कि इसे पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा एक अभियान मानती हैं।
अभी अधिकांश ग्राहक जेन–जेड पीढ़ी के युवा हैं। खासकर स्कूल और कॉलेज के छात्र थ्रिफ्ट फैशन को लेकर अधिक आकर्षित हैं। काठमाडौँ के बाहर से भी ऑनलाइन ऑर्डर अच्छी मात्रा में आते हैं। कुसुम आगामी दिनों में और शाखाएं खोलने की योजना बना रही हैं, लेकिन फिलहाल उनका प्राथमिक लक्ष्य सप्लाई चेन को मजबूत करना और सेवा की गुणवत्ता सुधारना है। साधारण वॉर्डरोब सफाई से शुरू हुआ यह सफर अब युवाओं को स्थायी फैशन, पुनः उपयोग और उद्यमशीलता का नया संदेश देने वाला एक उदाहरण बन गया है।





