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मधेस में नेपाल का देसी चिड़िया ‘कांदे व्याकुर’ मिली, सातों प्रदेशों में उपस्थिति हुई पुष्टि

नेपाल की देसी चिड़िया कांदे व्याकुर पहली बार मधेस प्रदेश के बारा जिले के चुरे वन क्षेत्र में मिली है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार यह चिड़िया समुद्र तल से सबसे कम ४४३ मीटर की ऊँचाई पर देखी गई है। बारा में कांदे व्याकुर मिलने के साथ ही नेपाल के सातों प्रदेशों में इसके भौगोलिक विस्तार की पुष्टि हो गई है। २४ जेठ, काठमांडू।

नेपाल में ही पाए जाने वाली दुर्लभ और देसी चिड़िया ‘कांदे व्याकुर’ मधेस प्रदेश में पहली बार देखी गई है। यह चिड़िया बारा जिले के जितपुरसिमरा उपमहानगरपालिका-२२ के दुधौरा खोला के पास चुरे वन क्षेत्र में पाई गई है। नेपाल पक्षीविद् संघ और मिथिला वाइल्डलाइफ ट्रस्ट के संयुक्त प्रयास से मधेस के आठ जिलों में चल रहे पक्षी सर्वेक्षण के दौरान कांदे व्याकुर की उपस्थिति दर्ज की गई है। पक्षी विशेषज्ञ हठन चौधरी और सुरज बराल के दल ने २१ जेठ को सुबह ८:३० बजे इस चिड़िया का अभिलेख किया था।

महेन्द्र राजमार्ग के पूर्व की ओर स्थित नमूना महिला सामुदायिक वन क्षेत्र के घास के मैदान और झाड़ी में यह चिड़िया मिली। समुद्र तल से सिर्फ ४४३ मीटर ऊँचाई पर यह पक्षी मिलने का रिकॉर्ड अपने आप में खास है, उन्होंने बताया। वन विज्ञान अध्ययन संस्थान हेटौंडा के छात्र आशिष पंत, सुमीसिंह ठकुरी और निश्चल पोखरेल भी पक्षी अवलोकन कार्यक्रम में शामिल थे। वैज्ञानिक नाम एकान्थोप्टिला निपालेन्सिस वाली कांदे व्याकुर नेपाल की ही देसी चिड़िया है। इसके पहले यह पक्षी कोशी, बागमती, गण्डकी, लुम्बिनी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम प्रदेशों में मिली थी।

बारा में यह चिड़िया मिलने के बाद नेपाल के सभी सातों प्रदेशों में इसके भौगोलिक विस्तार की पुष्टि हो गई है। नेपाल पक्षीविद् संघ के अध्यक्ष हठनराम महतो और मिथिला वाइल्डलाइफ ट्रस्ट के अध्यक्ष देवनारायण मंडल के अनुसार मधेस प्रदेश में पक्षियों की स्थिति और प्रजातियों के बारे में और जानकारी के लिए दूसरा चरण का गर्मी मौसम लक्षित सर्वेक्षण जारी है। यह अनुसंधान राष्ट्रीय निकुञ्ज तथा वन्यजीव संरक्षण विभाग और वन तथा भू संरक्षण विभाग की अनुमति से चल रहा है। विश्व में केवल नेपाल में मिलने वाली इस चिड़िया होने के कारण कांदे व्याकुर अंतरराष्ट्रीय पक्षी प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत आकर्षक और महत्वपूर्ण मानी जाती है।