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भारत से हुई वार्ताओं के मुख्य विषय क्या थे?

विदेश मंत्री शिशिर खनाल तीन दिवसीय भारत यात्रा पूरी कर स्वदेश लौटे हैं, जो भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के निमंत्रण पर आयोजित हुई थी। इस यात्रा के दौरान नेपाल और भारत के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा साझेदारी और अंतदेशीय डिजिटल भुगतान प्रणाली के संचालन पर सहमति और चर्चा हुई। दोनों देशों ने डिजिटल माध्यम से रेमिटेंस आदान-प्रदान के लिए अंतदेशीय भुगतान प्रणाली शुरू करने और भाषा अनुवाद प्लेटफॉर्म के सह-निर्माण पर समझौता किया है।
२४ जेठ, काठमांडू।

भारत यात्रा के दौरान विदेश मंत्री खनाल ने भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधिमंडल से भेंट की। उक्त भेंट-वार्ता में हुई चर्चाओं के विषयों के बारे में उन्होंने त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय विमानस्थल पर संवाददाताओं को जानकारी दी। उन्होंने कहा, “दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच नेपाल और भारत के द्विपक्षीय संबंधों के सभी आयामों पर व्यापक और फलदायक चर्चा हुई।”

खनाल ने बताया कि वार्ता में व्यापार और आर्थिक सहयोग, कनेक्टिविटी, ऊर्जा साझेदारी, जलस्रोत प्रबंधन, खेलकूद आदि विषयों पर ठोस विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इसके अलावा, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

खनाल ने बताया कि बैठक के दौरान तीन संयुक्त घोषणाएं की गईं। इनमें 2030 में हस्ताक्षरित एनसीएचएल और एनपीसीआई के बीच समझौता पत्र के अंतर्गत अंतदेशीय भुगतान (पीटूपी) संचालन की सहमति भी शामिल है। इससे नेपाल और भारत के बीच डिजिटल माध्यम से रेमिटेंस का सुगम आदान-प्रदान संभव होगा। उन्होंने कहा कि भारत के विकास सहयोग से नेपाल में भूकंप के बाद पुनर्निर्मित परियोजनाओं का वर्चुअल हस्तांतरण किया गया और भाषा अनुवाद प्लेटफॉर्म की राष्ट्रीय डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के सह-निर्माण के लिए काठमांडू विश्वविद्यालय स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर और डिजिटल इंडिया के मध्य भाषाई समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।