
भौतिक पूर्वाधार मंत्री सुनील लम्साल जब कमला पुल का स्थल निरीक्षण करने सिरहा और धनुषा जिलों में पहुंचे, तो स्थानीय लोग नाराज़ नजर आए। यह पुल पिछले १५ वर्षों से अधर में है और मंत्री लम्साल से पहले १७ अन्य मंत्रियों ने इसी पुल का निरीक्षण कर चुके हैं। वीआईपी और गैर-तकनीकी व्यक्तियों के निरीक्षण में वृद्धि के साथ-साथ स्थल निरीक्षण परिणाममुखी होने के बजाय केवल फैशन और औपचारिकता का हिस्सा बनते हुए दिख रहे हैं।
२५ जेठ, काठमांडू। पूर्वाधार विकास मंत्री सुनील लम्साल शनिवार शाम सिरहा और धनुषा को जोड़ने वाली हुलाकी राजमार्ग के कमला पुल का स्थल निरीक्षण करने गए। मंत्री के आगमन पर स्थानीय लोग असंतुष्ट दिखे क्योंकि लम्साल से पहले १७ मंत्रियों ने इस पुल का निरीक्षण कर लिया था। इस बार मंत्री ने काम करने का वादा किया था, लेकिन स्पष्ट कार्य योजना के अभाव में स्थानीय लोगों ने नाराज़ होकर मंत्री को वहां से चले जाने के लिए मजबूर किया।
कमला पुल के निर्माण में १५ वर्षों से कोई प्रगति न होने से स्थानीय लोग परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या स्थानीय तह की नहीं बल्कि राज्य व्यवस्था और उसकी परंपरा में निहित है। हुलाकी कमला पुल संघर्ष समिति के संयोजक इंजीनियर प्रविन यादव के अनुसार, मंत्री ने कहा ‘हम बात करने नहीं, काम करने आए हैं और काम करके दिखाएंगे’, लेकिन स्थानीय लोग उस पर भरोसा नहीं कर पाए। पुल निर्माण की स्पष्ट योजना न होने के कारण वे आक्रोशित थे।
मंत्री लम्साल ने भौतिक पूर्वाधार मंत्रालय संभालने के बाद भी पिछली असफल नीतियों को दोहराया है। नेपाल में पूर्वाधार परियोजना प्रबंधन प्रणाली ही ख़राब हो चुकी है। वीआईपी नेताओं के दौरे से काम में तेजी आने के बजाय निराशा बढ़ रही है। पूर्व भौतिक सचिव केशवकुमार शर्मा ने कहा कि नेतृत्व का क्षेत्र निरीक्षण व्यर्थ नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन सभी नेतृत्व समान होने के कारण स्थानीय असंतोष दिखाई देता है, इसलिए इन भ्रमणों को समस्या समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।
वर्तमान सरकार के गठन के बाद से ही मंत्री न केवल अपने क्षेत्र में, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी भ्रमण कर निर्माण कंपनियों और कर्मचारियों पर दबाव बनाने की प्रवृत्ति दिखा रहे हैं। शर्मा के अनुसार कभी-कभी उच्चस्तरीय नेतृत्व के भ्रमण के बाद काम में गति आना भी देखा गया है, लेकिन “जो भी नेतृत्व आए, वे एक ही हैं” की धारणा तोड़ना आवश्यक है।
पूर्वाधार मंत्री लम्साल पेशे से इंजीनियर हैं और अपने क्षेत्र निरीक्षण में काफी समय देते हैं। नेपाल निर्माण व्यवसायी महासंघ के महासचिव शिवहरी घिमिरे ने कहा कि मंत्री के पास योजनाबद्ध समस्याओं का अच्छा ज्ञान है और क्षेत्र भ्रमण से सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है। विभागीय मंत्री के रूप में पूर्वाधार परियोजना का निरीक्षण करना स्वाभाविक है, लेकिन सरकार गठन के बाद व्यवहार ने फिल्ड भ्रमण को दबाव और औपचारिकता तक सीमित कर दिया है।
पूर्व गृह मंत्री सुधन गुरुङ ने गत चैत्र में नारायणगढ–बुटवल सड़क के दाउन्ने इलाके में स्थल निरीक्षण किया था, जिसने सवाल उठाए थे। पूर्व गृह मंत्री संसद भवन निर्माण में भी गैर-तकनीकी सांसद के रूप में अनियमित निरीक्षण करते रहे हैं। हाल ही में सुदूरपश्चिम में संसद अध्यक्ष डोलप्रसाद अर्याल की टीम ने निर्माणाधीन दोधारा चाँदनी सुख्खा बंदरगाह का स्थल निरीक्षण किया है। ऐसे घटनाओं ने वीआईपी भ्रमण को परिणाममुखी बनने की बजाय केवल फैशन और औपचारिकता तक सीमित कर दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल में विकास कार्यक्रम लेखा परीक्षा और निरीक्षण प्रणाली के कारण विकास क्षेत्र प्रभावित हुआ है। विकास निर्माण को सुगम बनाने के बजाय कठोर निरीक्षण ने सत्ता स्थापित कर ली है। सड़क विभाग के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर कुवेर नेपाली के शब्दों में, “एक परियोजना पर ३ दर्जन से अधिक निरीक्षक संस्थान कार्यरत हैं। जिलागत विकास केंद्र तीर्थाटन और अतिथि सत्कार व्यवस्था का बोझ भी उठाते हैं।” जेएनजी आन्दोलन से पहले के ये विकृतियाँ नई परिस्थिति में भी जारी हैं, जो चिंताजनक है।





