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दूध में रसायन मिलावट: रसोई में प्रवेश किया ‘धीमा जहर’

भक्तपुर के जोरपाटी दुग्ध सहकारी संस्थान ने अखाद्य रसायन मिलाकर नकली दूध तैयार कर डीडीसी और खुले बाजार में बिक्री किया। काभ्रे के पनौती और बुटवल में संग्रहित दूध में चीनी और सोडा जैसे घातक रसायनों की मिलावट पाई गई, जिसके बाद दूध नष्ट किया गया। खाद्य प्रौद्योगिकी तथा गुणवत्ता नियंत्रण विभाग ने चालू आर्थिक वर्ष के ९ महीनों में दूध में मिलावट करने वालों के खिलाफ ८२ मामले दायर किए हैं। २५ जेठ, काठमाडाैं।

दूध को सिर्फ खाद्य वस्तु के रूप में नहीं बल्कि शुद्धता, ताकत और पोषण का सुनिश्चित स्रोत माना जाता है। बच्चों से लेकर वृद्धों तक हर दिन एक गिलास दूध पूर्ण आहार की तरह निश्चिंत होकर पिया जाता है। लेकिन हाल के समय में सरकारी निकायों की रिपोर्टों और प्रयोगशालाओं के परीक्षणों से पता चला है कि दूध के माध्यम से हमारे रसोई में ‘धीमा जहर’ प्रवेश कर रहा है। बाजार में मिलने वाले दूध को अधिक समय तक खराब न होने देने तथा अत्यधिक मुनाफा कमाने के लिए कुछ दुग्ध उद्योगपति और संग्रहकर्ता मानव स्वास्थ्य के साथ गंभीर अपराध कर रहे हैं।

खाद्य प्रौद्योगिकी तथा गुणवत्ता नियंत्रण विभाग ने ३१ वैशाख को भक्तपुर में संचालित एक दुग्ध उद्योग पर निरीक्षण किया था, जिसमें इस तरह की गंभीर लापरवाही पाई गई। निरीक्षण टीम ने उक्त उद्योग में पास्चराइज़र टैंक में पगलाने के लिए तैयार ३० किलो ‘बेकरी सर्टेनिंग’ जैसा चिकना पदार्थ भी बरामद किया। दूध में मिलावट करने के लिए उपयोग की जाने वाली ५६ किलो ‘डेक्स्ट्रोज मोनोहाइड्रेट’, ९.८६ किलो ‘माल्टोडेक्स्ट्रिन’ और ३० किलो ‘बेकरी सर्टेनिंग’ जब्त की गई।

बुटवल उपमहानगरपालिका क्षेत्र में बिक्री हो रहे कुछ दूध आपूर्तिकर्ताओं के दूध में सरकार द्वारा निर्धारित गुणवत्ता से कम और मिलावट पाए जाने पर उपमहानगरपालिका ने सूचना जारी की थी। निरीक्षण के दौरान दूध को लंबे समय तक खराब न होने देने के लिए सोडा सहित अन्य घातक रसायनों के मिलावट की पुष्टि हुई। दूध में ऐसी मिलावट को महर्जन केवल व्यापारिक धोखाधड़ी ही नहीं बल्कि बहुआयामी धोखाधड़ी के रूप में देखते हैं।