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सरकार ने भारतीय आम पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया, केवल सख्त शर्तें निर्धारित कीं

समाचार सारांश सरकार ने भारत से आयात होने वाले आम पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है बल्कि जैविक सुरक्षा के लिए कड़े नियम निर्धारित किए हैं। देशी कृषि उत्पाद को रोग और कीट से बचाने के लिए भारत से आयातित आम को 48 डिग्री सेल्सियस के गरम पानी में एक घंटे उपचारित करने की शर्त रखी गई है। भारत में आवश्यक शर्तें प्रमाणित करने की प्रणाली न होने के कारण नेपाल में आम का आयात 4 हजार टन से घटकर लगभग 400 टन तक सीमित हो गया है। 28 जेष्ठ, काठमाडौँ। गर्मियों के मौसम के शुरू होते ही इस समय नेपाली बाजारों में ‘फलफूलों का राजा’ कहा जाने वाला आम प्रवेश करने लगा है। तराई के विभिन्न जिलाओं में उत्पादित देशी आम धीरे-धीरे बाजार में अपनी पकड़ बना रहे हैं। वर्तमान में काठमाडौँ उपत्यका के फल और सब्जी की दुकानों में कच्चे से लेकर पकाए हुए आम तक उपलब्ध हैं। पिछले वर्ष तक आम के मौसम के शुरू होते ही नेपाली बाजारों में भारत से सस्ते दामों पर हजारों टन आम आयात होता था, जिससे नेपाली बाजारों पर उसका प्रभुत्व रहता था। लेकिन अब स्थिति थोड़ी अलग नजर आ रही है। कुछ दिनों से सामाजिक मीडिया और कुछ संचार माध्यमों में खबर फैल रही है – “सरकार ने भारतीय आम के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया!” फेसबुक की वाल से लेकर टिकटॉक के वीडियो तक में एक ही दृश्य देखा जा सकता है – “पड़ोसी देश से आने वाले आमों में अत्यधिक कीटनाशक पाए जाने के कारण सरकार ने रोक लगा दी, पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया, अब भारतीय आम खाना विषाक्त खाने के समान है।” कई लोगों ने कृषि, वन और पर्यावरण मंत्रालय का हवाला देते हुए प्रतिबंध लगाए जाने की खबर दी है। न केवल नेपाली बल्कि भारतीय संचार माध्यम भी यह खबर प्रसारित कर रहे हैं कि नेपाल ने भारतीय आम के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। एनडीटीवी से लेकर टाइम्स ऑफ़ इंडिया तक के मीडिया संस्थान “नेपाल ने भारतीय आम पर प्रतिबंध लगाया” शीर्षक से समाचार, वीडियो और ऑडियो रिपोर्ट प्रस्तुत कर रहे हैं। एनडीटीवी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की सक्रियता का उल्लेख करते हुए कहा है कि “बालेन शाह की सरकार ने भारतीय आम पर प्रतिबंध लगाया।” इन माध्यमों ने यूट्यूब चैनलों और सामाजिक मीडिया पर जापान के प्रतिबंध के साथ तुलना करते हुए नेपाल को ‘दूसरे झटके’ का सामना कर रहे देश के रूप में प्रस्तुत किया है। अधिकांश भारतीय न्यूज़ चैनलों की आवाज़ और ग्राफिक्स में कहा गया है कि नेपाल ने भारतीय किसानों को मार्डर में डाला है और यह कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित करेगा। गुणवत्ता और कीड़े की समस्याओं के कारण भारतीय आम को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई बार प्रतिबंध झेलना पड़ा है। 2014 में यूरोपीय संघ ने भारतीय आम में ‘फ्रूट फ्लाई’ नामक कीट पाए जाने पर आयात पर रोक लगा दी थी। इसी तरह जापान ने लगभग 20 वर्षों तक प्रतिबंध लगा कर 2006 में शर्तों के साथ प्रतिबंध हटा फिर भी हाल ही में प्रशोधन संबंधी समस्याओं के कारण आयात रोका गया है। नेपाल के संदर्भ में क्या स्थिति है? सरकार ने भारत से आयात होने वाले आम पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने की खबर पूरी तरह गलत साबित की है। कृषि मंत्रालय के अधीन प्लांट क्वारैंटाइन एवं कीटनाशक प्रबंधन केंद्र ने देशी कृषि उत्पाद को रोग और कीट से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून और नेपाल के ‘बिरुवा संरक्षण ऐन 2064’ के तहत आयात में सख्त शर्तें लगाई गई हैं। केंद्र ने बुधवार को सूचना जारी कर स्पष्ट किया कि भारत से आम के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। केंद्र के वरिष्ठ फसल संरक्षण अधिकारी प्रकाश पौडेल ने बाजार और संचार माध्यमों में फैल रही अफवाहों को निराधार बताते हुए कहा है कि आम आयात में शर्तों के साथ अनुमति जारी है। पौडेल के अनुसार सरकार ने आम के आयात पर रोक नहीं लगाई है, केवल हानिकारक रोग जीवों पर नियंत्रण के लिए नियम बनाए गए हैं। ‘‘आम पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, कुछ लोग बिना समझे अफवाह फैलाते हैं और उसके पीछे अन्य लोग चलते हैं,’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह जैविक सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम है, पूर्ण प्रतिबंध नहीं।’‘ क्या हैं शर्तें और क्यों कड़ाई? भारत से आयात होने वाले आम की स्वस्थता प्रमाणित करने, हानिकारक रोगजनकों से मुक्त होने और ‘हॉट वाटर ट्रीटमेंट’ (गरम पानी से उपचार) किए जाने के ठोस प्रमाण न मिलने के कारण सरकार ने कड़ी शर्त लगाई है। केंद्र के अनुसार भारत से आयातित आम में ‘बैक्टोसेरा कारम्बोलाई’, ‘बैक्टोसेरा कैरियाई’, ‘फिस्टुलोकोकस पॉकफुलामेंसिस’ (आम की सॉफ्ट स्केल), ‘क्रिप्टोराइनकस फ्रिगिडस’, ‘जैन्थोमोनास एक्जोनोपोडिस पीवी मैन्जिफेरेंडिकी’, ‘लासियोडिप्लोडिया स्यूडोथियोब्रोमी’, ‘नियोफ्यूसिकोकम मैन्जिफेरी’ और ‘कोलेटोट्राइकम सियामेन्स’ जैसे गंभीर रोगजनक जीवों का खतरा पाया जाता है, जो नेपाली आम खेती के लिए बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं। ‘‘यदि ये रोग और कीट नेपाल में प्रवेश कर गए तो हमारी देशी आम की खेती पूरी तरह समाप्त हो सकती है,’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए हमने शर्त रखी है – भारत से आने वाले आम को 48 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले पानी में एक घंटे तक उपचारित करना अनिवार्य होगा, उसके बाद ही नेपाल में लाने की अनुमति दी जाएगी। यह पूरी तरह कीटनाशक नहीं बल्कि जैविक सुरक्षा से संबंधित है। खाद्य स्वच्छता और गुणवत्ता का निरीक्षण खाद्य प्रौद्योगिकी और गुणवत्ता नियंत्रण विभाग करता है जबकि क्वारैंटाइन जैविक सुरक्षा का नियमन करता है। ये कड़े नियम सचिव स्तर के निर्णय से लागू किए गए हैं। नई शर्तों के कारण आम आयात में भारी गिरावट आई है। भारत में ‘हॉट वाटर ट्रीटमेंट’ के बाद प्रमाणित करने की व्यवस्थित प्रणाली न होने के कारण व्यापारी इन शर्तों को पूरा करने में असमर्थ रहे हैं। ‘‘हमने शर्तें पूरी कर लाए गए आमों पर रोक नहीं लगाई है, आम अभी भी आ रहे हैं,’’ पौडेल ने कहा, ‘‘लेकिन भारत में प्रमाणित करने की व्यवस्था नहीं होने के कारण केवल थोड़ा ही शर्तें पूरी कर पाते हैं, पहले 4 हजार टन आयात होता था अब लगभग 400 टन आयात हो रहा है।’’ ‘‘कस्टम चुकाने पर भी अवैध आम वैध नहीं होता, कर्मचारियों को कार्रवाई का सामना करना पड़ता है’’ केंद्र ने कस्टम और क्वारैंटाइन प्रक्रियाओं को भिन्न बताया और कहा कि केवल कस्टम शुल्क देने पर अगर रोगग्रस्त या शर्तों को पूरा न करने वाला सामान लाया जाता है तो वह गैरकानूनी माना जाएगा। ‘‘यदि क्वारैंटाइन प्रक्रिया पूरी किए बिना और अनुमति पत्र के बिना कस्टम आदेश किया जाता है, तो वह पूरी तरह अवैध होगा,’’ उन्होंने कहा, ‘‘यदि क्वारैंटाइन छुट्टी-पत्र के बिना कस्टम होता है तो इसके लिए संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।’‘ आम आयात में कड़ाई की खबर आने और बाजार में भारतीय आम की कमी से आम जनता और मीडिया में भ्रम पैदा हुआ है। ‘‘शर्तें पूरी न करने वालों को ही रोका गया है, लेकिन नियम लागू होने से पहले अनुमत पाए व्यापारियों के लिए पुराने नियमों के अनुसार आम लाने की अनुमति है,’’ पौडेल ने कहा, ‘‘परमिट की अवधि तीन महीने तक होती है, इसलिए बाजार में कहीं रोक है तो कहीं आपूर्ति जारी है ऐसा भ्रम बना है।’’ पिछले वर्षों में नेपाल में आम का मौसम शुरू होते ही भारत से बड़े पैमाने पर सस्ते दामों पर आम आयात होता था जो देशी उपभोक्ताओं को सस्ते आम उपलब्ध कराता था पर नेपाली किसानों को उचित बाजार न मिलने की समस्या बढ़ाता था। लेकिन इस बार रोग और कीट के जोखिम को ध्यान में रखते हुए कड़ीाई के चलते देशी आम संरक्षण में मदद मिलेगी और स्वदेशी किसानों को बाजार मिलना आसान होगा, सरकार को विश्वास है। फोटो: चन्द्रबहादुर आले