३० जेठ, काठमाडौँ। इरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और इरान के बीच रविवार को शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि समझौता आगामी कुछ दिनों के भीतर हो सकता है, लेकिन अभी तक कोई तारीख निश्चित नहीं हुई है। इससे पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया था कि समझौता २४ घंटे के भीतर हो सकता है और इसे ऑनलाइन माध्यम से हस्ताक्षरित किया जाएगा।
प्रवक्ता बघाई के अनुसार, युद्ध समाप्ति ही इस समझौते का मुख्य उद्देश्य है और परमाणु मुद्दे पर बाद में चर्चा होगी। पाकिस्तानी मध्यस्थता में तैयार हो रहा यह समझौता फिलहाल जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए है, जिसमें तत्काल परमाणु विषय पर कोई बातचीत नहीं होगी। इरान ने कहा है कि अमेरिका बार-बार अपनी स्थिति बदल रहा है, इसलिए इस समझौते को लेकर सावधानी अपनाना जरूरी है।
दूसरी ओर, इरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया है कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं, लेकिन समझौते की शर्तों के बारे में अनुमान न लगाने का मीडिया से आग्रह किया है। उन्होंने १४ जून को जेनेवा में समझौता होने की खबरों को भी खारिज किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह अंतिम शांति समझौता नहीं होगा। शुरुआत में दोनों देश एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे, उसके बाद ६० दिनों तक तकनीकी स्तर पर वार्ता होगी, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों की हटाई और होर्मुज जलसंधि के प्रबंधन सहित कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी।
हाल के दिनों में होर्मुज जलसंधि और उसमें चलने वाले जहाजों पर हमलों ने तनाव को बढ़ाया है। संभावित समझौता चर्चा के बावजूद होर्मुज जलसंधि की सुरक्षा और नियंत्रण को लेकर विवाद जारी है। इरानी सेना दावा करती है कि इसका पूर्ण नियंत्रण उनके हाथ में है। विदेश मंत्री अराघची ने संकेत दिए हैं कि समझौते के बाद होर्मुज जलसंधि पहले जैसा नहीं रहेगा और जलपोतों के लिए नए नियम और सेवा शुल्क लागू किए जा सकते हैं। इरानी संसद भी इसके प्रबंधन हेतु नया कानून बनाए जा रहा है।
इसी बीच, होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय जलपोत पर हमले ने कूटनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि इरान ने भारतीय जहाज पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की, जिसे अमेरिकी सेना ने नाकाम कर दिया। अमेरिकी गुप्तचर रिपोर्टों के अनुसार, इरान ने इस्फान के परमाणु केंद्र में छुपाए गए उच्च संवर्द्धित यूरेनियम के भंडार को अमेरिकी नियंत्रण से बचाने के लिए सुरंगों को ढंककर विस्फोटक माइन लगाई हैं।
इरान के अंदर भी इस समझौते को लेकर मतभेद हैं। कट्टरपंथी समूह होर्मुज जलसंधि खोलने और अमेरिका को शामिल करने के खिलाफ कड़ा विरोध कर रहे हैं। देश के प्रधान न्यायाधीश और अन्य उच्च अधिकारी अमेरिका पर भरोसा न करने का इशारा कर चुके हैं, वहीं धार्मिक गुरुओं ने वार्ता टीम को सर्वोच्च नेता के निर्देश के बिना आगे न बढ़ने की चेतावनी दी है।
दोनों देशों को ‘विजय’ चाहिए। इरान अपने अटके हुए अरबों डॉलर की संपत्ति की वापसी की उम्मीद कर रहा है। हालांकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अन्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इरान तब तक किसी आर्थिक राहत का अधिकार नहीं पाएगा जब तक वह अपनी सभी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं करता। अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और इरान दोनों इस समझौते को अपनी घरेलू राजनीति में ‘जीत’ के रूप में प्रदर्शित करना चाहते हैं। ट्रम्प होर्मुज जलसंधि खुली दिखाना चाहते हैं, जबकि इरान अमेरिकी प्रतिबंधों के हटने को मान्यता देना चाहता है। व्हाइट हाउस ने समझौते के शीघ्र होने की उम्मीद व्यक्त की है, फिर भी इसकी शर्तों को लेकर संशय बना हुआ है।
