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तुम कौन हो?

प्रस्तुत कविता में लेखक ने एक खिलाड़ी के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त किया है, जिसे उन्होंने प्रेरणा का एक अविस्मरणीय स्रोत माना है। चिकित्सक ने चलने में अक्षम बताया हो के बावजूद, उस खिलाड़ी की दौड़ने की हिम्मत और खेल के प्रति उसकी निष्ठा की कविता में प्रशंसा की गई है। मैदान में उस खिलाड़ी की अनुपस्थिति को देख, लेखक ने खुद को हमेशा के लिए स्वतंत्र दर्शक बनने का संकल्प जताया है और खिलाड़ी के प्रति गहरी आत्मीयता व्यक्त की है।

“तुम कौन हो? जो मैं तुमसे इतना प्यार करता हूं। कसम! तुम्हारी तस्वीर इतनी बार मैंने अपनी प्रेमिका की तस्वीर भी नहीं देखी। तुम्हारे खेल को मैंने अपने ही चेहरे को दर्पण में देखने से भी अधिक पसंद किया है।”

कविता में लेखक ने खिलाड़ी की हिम्मत और समर्पण को विशेष रूप से उजागर करते हुए कहा है, “जब भी तुम खेल हारते हो, मैं तुमसे जीते गए तुम्हारे पुराने खेल देखता हूं क्योंकि मुझे तुमसे कोई नफरत नहीं है।”

लेखक ने खिलाड़ी को विभिन्न उपमाएँ देते हुए कहा है, “तुम मेरे लिए एक ‘कुशल चालक हो’ जो व्यस्त सड़कों पर भी सबसे आगे पहुंचता है।” इस तरह, खिलाड़ी के महत्त्व और लेखक के प्रेम की गहराई को कविता में सुंदरता से अभिव्यक्त किया गया है।