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दलका सदस्य अध्यक्ष पदको उम्मेदवारी दिन सक्दैनन्

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के बाद तैयार किया गया।

  • स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक संस्था नेपाल (इप्पान) ने वरिष्ठ उपाध्यक्ष का स्वचालित अध्यक्ष बनने का प्रावधान हटाकर सभी पदों को खुली प्रतिस्पर्धा के लिए रखा है।
  • संस्था को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखने के लिए अध्यक्ष एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए राजनीतिक दल के सदस्य होने की अनुमति नहीं है।
  • इप्पान ने संरचना का विस्तार कर उपाध्यक्ष और सचिव की संख्या 7 कर दी है, जबकि महासंघ में रूपांतरण प्रस्ताव फिलहाल के लिए स्थगित किया गया है।

31 जेठ, काठमांडू। स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक संस्था नेपाल (इप्पान) ने नेतृत्व चयन प्रक्रिया में लंबे समय से विद्यमान विवाद और असंतोष को ध्यान में रखते हुए व्यापक सुधार किए हैं।

29 जेठ को काठमांडू में आयोजित 24वीं साधारण सभा और आठवें अधिवेशन में आगामी कार्यकाल से अध्यक्ष समेत सभी पदों के लिए खुली प्रतिस्पर्धा व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया।

अधिवेशन में विधान संशोधित कर वरिष्ठ उपाध्यक्ष के स्वचालित अध्यक्ष बनने के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है। अब अध्यक्ष समेत सभी पदों के लिए योग्य सदस्य सीधे प्रतिस्पर्धा कर उम्मीदवार बन सकेंगे।

पहले की व्यवस्था के अनुसार वरिष्ठ उपाध्यक्ष स्वचालित रूप से अध्यक्ष बनते थे और पदाधिकारी केवल कार्यसमिति से चयनित होते थे, जिससे संस्था में असंतोष फैला था।

अधिवेशन से पहले भी नेतृत्व चयन, प्रतिनिधित्व और विधान संशोधन से जुड़े विवाद सामने आए थे। कुछ सदस्यों ने संस्था में सीमित समूहों का प्रभुत्व बढ़ने और लोकतांत्रिक अभ्यास कमजोर होने की बात उठाई थी और खुली प्रतिस्पर्धा की मांग की थी।

इसी आधार पर साधारण सभा ने विधान में संशोधन कर नेतृत्व चयन को अधिक समावेशी और प्रतिस्पर्धात्मक बनाने का निर्णय लिया। संशोधित नियमों के अनुसार अध्यक्ष पद के उम्मीदवार का कम से कम एक कार्यकाल कार्यसमिति में रहना आवश्यक होगा।

इप्पान ने अध्यक्ष और वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार को राजनीतिक दल का सदस्य होना निषेध कर दिया है। यदि कोई पूर्व में राजनीतिक दल से जुड़ा था तो उसे त्यागने का प्रमाण देना होगा। इसका उद्देश्य संस्था को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखना बताया गया है।

विधान संशोधन की प्रक्रिया कुछ वर्षों से चल रही थी। 21वीं वार्षिक साधारण सभा ने भानुभक्त पोखरेल के संयोजन में पांच सदस्यों की समिति बनाई थी, जिसने इप्पान को महासंघ में रूपांतरण करने का प्रस्ताव दिया था।

लेकिन महासंघ में रूपांतरण की प्रक्रिया आगे न बढ़ने के कारण इप्पान ने वर्तमान विधान के तहत अधिवेशन करने का निर्णय लिया।

साधारण सभा ने संस्था की संरचना का भी विस्तार किया है। संशोधित विधान के अनुसार उपाध्यक्ष की संख्या 5 से बढ़ाकर 7 कर दी गई है, और सचिव की संख्या भी 5 से 7 की गई है। उपाध्यक्ष पद के लिए बलराम खतिवड़ा और प्रकाशचन्द्र दुलाल चुने गए हैं, जबकि सचिव पद पर कृष्ण घिमिरे और दीपक पौडेल चयनित हुए हैं। साथ ही पांच स्थायी आमंत्रित सदस्य मनोनीत करने की व्यवस्था भी रखी गई है।

इप्पान ने ध्रुवीकरण समाप्त कर सभी पक्षों को शामिल करने के लिए दो उपाध्यक्ष, दो सचिव और पांच स्थायी आमंत्रित सदस्यों को सर्वसम्मति से चुना है।

हाल ही के नेतृत्व चयन प्रक्रिया में कोषाध्यक्ष को छोड़कर अन्य पदों पर सहमति बन गई थी और नई कार्यसमिति सर्वसम्मति से चुनी गई थी। कोषाध्यक्ष पद के लिए शंकर बस्याल और मिथुन पौडेल के बीच मुकाबला था।

मतदान के दौरान पौडेल मतदान स्थल छोड़कर चले गए थे। परिणामस्वरूप बस्याल निर्वाचित हुए, जिन्हें 267 वोट मिले जबकि पौडेल को 82 वोट प्राप्त हुए।

ऊर्जा क्षेत्र के व्यावसायियों ने इसे संस्था के भीतर विद्यमान विवादों को हल कर सहयोग एवं सहमति से आगे बढ़ने का प्रयास माना है।

जिला प्रशासन कार्यालय से स्वीकृति मिलने पर संशोधित विधान पूरी तरह प्रभावी होगा। इप्पान का विश्वास है कि नई व्यवस्था संस्था को अधिक लोकतांत्रिक, समावेशी और पारदर्शी बनाएगी।

विवाद के बाद सुधार

जनता और बैंक से करोड़ों जुटाकर जल विद्युत क्षेत्र में निवेश कर रहे ऊर्जा उत्पादकों की संस्था में विभिन्न प्रकार की समस्याएं उभर आई थीं। 2081 साल तक संस्था का नवीनीकरण न हो पाने के कारण व्यापक आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

यह स्थिति इप्पान की साधारण सभा उद्घाटन समारोह को भी प्रभावित कर गई थी। ऊर्जा, जल स्रोत और सिंचाई मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ ने उद्घाटन समारोह में देरी से आने का कारण जिला प्रशासन कार्यालय से 2081 साल तक नवीनीकरण की जानकारी मिलना बताया था।

संस्था के अंदर और बाहर से समस्याओं को समाधान कर आगे बढ़ने की आवाज उठ रही थी।

संस्था नवीनीकरण के बिना संचालन, साधारण सभा के फैसले और मण्डेट कार्यसमिति द्वारा इन्हें निरस्त करने जैसे विषयों को लेकर इप्पान के अंदर और बाहर विरोध और चेतावनी जारी थी।

इप्पान के निवर्तमान उपमहासचिव प्रकाश दुलाल सहित अन्य ने इस विषय पर चेतावनी दी थी, जिसके बाद निवर्तमान अध्यक्ष गणेश कार्की ने इसे भ्रामक और कपोलकल्पित बताते हुए विज्ञप्ति जारी की थी।

साधारण सभा में भी इस विषय पर चर्चा हुई। दीर्घकालीन विवादों के बाद इप्पान ने अधिवेशन में विधान संशोधन किया, लेकिन महासंघ में रूपांतरण का प्रस्ताव 8वें अधिवेशन ने खारिज कर दिया।

इप्पान को और प्रभावी तथा सशक्त बनाने के उद्देश्य से महासंघ में रूपांतरण की प्रक्रिया तत्काल के लिए स्थगित की गई है।