१ असार, काठमाडौं। म्यानमार के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मिन आङ ह्लाइङ पांच दिन के औपचारिक दौरे के लिए सोमवार को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे। यह दौरा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर हुआ है। ६९ वर्षीय ह्लाइङ के लिए यह राष्ट्रपति पद संभालने के बाद पहला चीन का दौरा है। अप्रैल की शुरुआत में म्यानमार के सैनिक समर्थित सांसदों की बहुमत वाली संसद ने उन्हें राष्ट्रपति चुना था। इससे पहले वह म्यानमार की सैन्य सरकार के प्रमुख और प्रधान सेनापति थे। साल २०२१ में जननिर्वाचित सरकार को अपदस्थ कर सत्ता पर काबिज होने की मुख्य योजना के रचयिता ह्लाइङ ही थे।
प्रधान सेनापति से नागरिक राष्ट्रपति के रूप में उनका यह रूपांतरण म्यानमार में उनकी सत्ता पकड़ को कानूनी तौर पर मजबूत बनाता है। २०२१ के सैन्य कूप ने म्यानमार के एक दशक के लोकतांत्रिक अभ्यास को समाप्त कर दिया था, जिसके बाद इस उभरती हुई एशियाई बाजार से विदेशी निवेशक वापस हो गए थे। इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति ह्लाइङ चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा वे चीन के राजनीतिक नेतृत्व में दूसरे और तीसरे स्थान पर स्थित प्रधानमंत्री ली कछियांग और राष्ट्रीय जनसभा के अध्यक्ष झाओ लेजी से भी अलग-अलग मुलाकात करेंगे।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पिछले सप्ताह प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि चीन और म्यानमार के बीच ऐतिहासिक रूप से मजबूत भ्रातृत्व और सहयोग रहा है और यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊँचाई पर ले जाएगा। राष्ट्रपति बनने के बाद ह्लाइङ का यह पहला विदेश दौरा नहीं है। उन्होंने मई के अंत में भारत का पांच दिन का दौरा किया था। म्यानमार में चल रहे आंतरिक संघर्ष के बीच इस बीजिंग दौरे में चीनी निवेश परियोजनाओं और सीमा सुरक्षा के मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चा होने की उम्मीद है।
