१ असार, काठमाडौं। नेकपा एमाले के सांसद क्षितिज थेबे ने आगामी आर्थिक वर्ष के लिए संसद में प्रस्तुत बजट को लेकर कहा है कि इससे युवाओं में उत्साह पैदा नहीं हो सका। यह टिप्पणी उन्होंने सोमवार को प्रतिनिधि सभा में मंत्रालयगत शीर्षक के तहत बजट चर्चा के दौरान की। उन्होंने कहा, ‘कुल मिलाकर बजट का आकार बड़ा है। शब्द चयन आकर्षक हैं। प्रस्तुति प्रभावशाली है। इस सरकार से बहुत बड़ी उम्मीदें थीं। मैं एक युवा सांसद हूं इसलिए मेरे अंदर बहुत उत्साह था। लेकिन बजट वक्तव्य पढ़ने और सुनने के बाद वह उत्साह कायम नहीं रह पाया।’
दिर्घकाल तक युवा आंदोलन का नेतृत्व करते आ रहे थेबे ने युवा मंत्रालय से जुड़ी अपनी धारणा भी साझा की। उन्होंने चुनाव के दौरान युवाओं से पूछे गए सवाल को याद करते हुए कहा, ‘आपकी पार्टी कितने युवाओं को रोजगार देगी?’ इसी तरह के सवालों का सामना रास्वपा को भी करना पड़ा है। उन्होंने युवाओं को रोजगार देने का सबने वादा किया, लेकिन बजट आने के बाद युवाओं को आशित रोजगार के अवसर नहीं मिले। उन्होंने ताप्लेजुङ में होने वाले अलैँची उत्पादन की भी बात उठाई। नेपाल की कुल उत्पादन का ४४ प्रतिशत अलैँची ताप्लेजुङ में होता है। इस उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार को अंतरराष्ट्रीय बाजार से समन्वय करना चाहिए था और न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करना चाहिए था। ऐसा करने से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिल सकता है।
थेबे ने कहा कि सरकार ने बजट में किसी भी हाल में गुजारा चलाने की नीति पेश की है, जबकि संविधान ने शिक्षा और स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार के रूप में सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा, ‘‘संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों में आर्थिक बोझ डाला गया है। शिक्षा में अतिरिक्त समता शुल्क बुद्धि में बाधा डालता है, जिससे ज्ञान का अभाव पैदा होता है। हमारे पास विद्वान अर्थमंत्री जैसे विद्वान भी हैं, परन्तु इसका पालन क्यों नहीं हो रहा?’’ उन्होंने कहा कि बजट ने अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ाया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में समता शुल्क लगाने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ‘‘अब नवजात शिशु के जन्म के समय भी अतिरिक्त स्वास्थ्य कर देना पड़ता है, जीवन के अंतिम क्षण में मौत के समय तक अंत्येष्टि और मृत्यु शैया पर भी कर लगाना घाटे का सौदा बन गया है,’’ उन्होंने व्याख्या की।
थेबे ने कहा कि खेल क्षेत्र में कुछ कार्यक्रम हुए हैं, लेकिन मेहनत से निर्मित खिलाड़ियों के लिए गुणवत्तापूर्ण जीवन, सामाजिक सुरक्षा और खेल के बाद भविष्य सुनिश्चित करने के लिए ठोस योजनाएं नजर नहीं आ रही हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में भी सरकार युवाओं में आशा नहीं जगा पाई है। उन्होंने ताप्लेजुङ के कंचनजंघा, तोपके गोला, ओलांगचुङोला और गुंसा क्षेत्रों को शामिल कर हाई अल्टिच्यूड स्पोर्ट्स कॉरिडोर विकसित करने की योजना पेश की। मनाङ, मुस्ताङ, डोल्पा, सोलुखुम्बु सहित अन्य जिलों में असाधारण संभावनाएं हैं, जिनपर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
