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रावल आयोग की प्रतिवेदन के कार्यान्वयन में, अतिक्रमित जमीन के हक हस्तांतरण को रोकने पत्राचार जारी

सरकार ने रावल आयोग की प्रतिवेदन के आधार पर अतिक्रमित सरकारी और सार्वजनिक जमीनों को रोकने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। भूमि व्यवस्था मंत्रालय ने प्रतिवेदन में उल्लिखित जमीनों के किनबेच और नामांतरण को प्रतिबंधित करने हेतु संबंधित विभागों को निर्देश दिया है। मन्त्रिपरिषद के निर्णयानुसार प्रतिवेदन के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आठ सदस्यों की समिति गठित कर प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। १ असार, काठमाडौं।

सरकार ने सरकारी और सार्वजनिक जमीनों के जांच और संरक्षण से संबंधित उच्चस्तरीय आयोग (रावल आयोग) की प्रतिवेदन कार्यान्वयन प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रतिवेदन में शामिल सभी अतिक्रमित सरकारी और सार्वजनिक जमीनें किसी भी प्रकार के हक हस्तांतरण के लिए प्रतिबंधित की गई हैं। भूमि व्यवस्था, सहकारी संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय ने भूमि प्रबंधन और अभिलेख विभाग तथा नापी विभाग को पत्राचार के माध्यम से निर्देश दिया है कि आयोग की प्रतिवेदन में उल्लिखित अतिक्रमित जमीनों की किनबेच, नामांतरण या अन्य किसी माध्यम से हक हस्तांतरण न हो, इसका कड़ाई से पालन किया जाए।

मंत्रालय के अनुसार, सरकारी और सार्वजनिक जमीन की छानबीन एवं संरक्षण के लिए गठित उच्चस्तरीय आयोग की प्रतिवेदन सरकार को सौंप दी गई है। इस प्रतिवेदन के कार्यान्वयन हेतु मन्त्रिपरिषद ने निर्णय ले लिया है और इसे प्रभावी बनाने के लिए आठ सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। मन्त्रिपरिषद के निर्देशानुसार, प्रतिवेदन में उल्लिखित जमीनों के स्वामित्व परिवर्तन को रोकने के लिए भूमि प्रबंधन एवं अभिलेख विभाग एवं नापी विभाग द्वारा आवश्यक प्रक्रियाएं शुरू की गई हैं, जिसे मंत्रालय ने भी पुष्टि की है।