सरकार ने काम न करने वाले जलविद्युत परियोजनाओं के लाइसेंस rद्द करने की प्रक्रिया शुरू की
सरकार ने लंबे समय से काम न करने वाले जलविद्युत परियोजनाओं के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऊर्जा, जलसंसाधन और सिंचाई मंत्रालय द्वारा गठित समिति ने विद्युत खरीद समझौता करने के बावजूद प्रगति न करने वाली 38 जलविद्युत परियोजनाओं के अनुमतिपत्र रद्द करने की सिफारिश की है। ऊर्जा विशेषज्ञ प्रबल अधिकारी ने बताया कि सिर्फ लाइसेंस रद्द करना समाधान नहीं है, बल्कि परियोजनाओं के न बनने के मुख्य कारणों की पहचान आवश्यक है।
सरकार ने यह प्रक्रिया 1 असार से शुरू की है। समिति ने विद्युत खरीद समझौता (पीपीए) के बावजूद लंबे समय तक किसी भी प्रगति नहीं करने वाली कुल 1,388 मेगावाट क्षमता वाली 38 जलविद्युत परियोजनाओं के अनुमति पत्र रद्द करने की सिफारिश की है। विद्युत विभाग ने भी 11 परियोजनाओं के लाइसेंस रद्द करने का सुझाव दिया था। मंत्रालय ने बताया कि रद्द करने की प्रक्रिया विद्युत विकास विभाग के माध्यम से आगे बढ़ेगी।
मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं की प्रगति के आधार पर उन्हें ‘ग्रीन’, ‘यैलो’, ‘यैलो प्लस’ और ‘रेड’ ज़ोन में वर्गीकृत किया गया है। पाँच वर्षों में 50 प्रतिशत से अधिक प्रगति करने वाली 15 परियोजनाओं को प्राथमिकता देकर शीघ्र पूर्ण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। अत्यंत कमजोर प्रगति वाली 75 परियोजनाओं को समस्याग्रस्त घोषित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
ऊर्जा विशेषज्ञ प्रबल अधिकारी ने कहा कि केवल लाइसेंस रद्द करना अंतिम समाधान नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परियोजनाएं क्यों रोक गईं, इसकी गहरी वजहों का पता लगाना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना कारण समझे लाइसेंस रद्द कर नए आवेदकों को देने से समस्याएं दोहराई जा सकती हैं और राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में और देरी हो सकती है।
