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संघीयता और समावेशिता से रास्वपा के पीछे हटने को लेकर पुन की चिंता

२ असार, काठमाडौं। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के नेता वर्षमान पुन ने संघीयता, समावेशिता तथा समुदायगत भाषा और सांस्कृतिक अधिकारों से वर्तमान सरकार और इसके नेतृत्व वाली पार्टी के पीछे हटने की संभावनाओं पर चिंता व्यक्त की है। मगर समुदाय के भुमे पर्व के अवसर पर दाङ के देउखुरी में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने संविधान संशोधन के नाम पर जनता के प्राप्त अधिकार छीनने के प्रयासों को स्वीकार्य नहीं बताया।

उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन के माध्यम से नेपाली जनता की लंबी कुर्बानियों और संघर्षों से हासिल राजनीतिक उपलब्धियों को छीने जाने का प्रयास अस्वीकार्य होगा। २०७२ साल में संविधान जारी होने से पहले उठाए गए और संबोधित न किए गए जनतात्मक मुद्दों को संविधान में समायोजित किया जा सकता है, लेकिन प्राप्य अधिकारों को कोई छीनने का प्रयास कतई स्वीकार्य नहीं होगा, यह उनकी प्रमुख अपील है।

उन्होंने यह भी बताया कि २०५२ साल में शुरू हुए जनयुद्ध ने राज्य के उत्पीड़न में पड़े समुदायों को ऊपर उठाया तथा समाज में जागरूकता लाई है और उन प्राप्त अधिकारों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी भी है। सरकार द्वारा संविधान संशोधन के लिए कार्यदल गठित कर जनता के अधिकारों पर चर्चा चलाए जाने के बीच, जनता के अधिकारों से राज्य को पीछे नहीं हटना चाहिए, यह उनकी स्पष्ट चेतावनी है।