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गण्डकी के बजट में अनियमितता: उद्योग-पर्यटन के लिए नियत 92 करोड़, घोषित बजट 2 अरब

2 आषाढ़, पोखरा। गण्डकी प्रदेश सरकार द्वारा सोमवार संसद में प्रस्तुत बजट वक्तव्य में अनियमितता के कारण सांसदों और मंत्रियों के बीच विवाद शुरू हो गया है।

गण्डकी प्रदेश के अर्थ मंत्री जित शेरचन ने आगामी आर्थिक वर्ष 2083/084 के लिए सोमवार को संसद में पेश बजट में उद्योग एवं पर्यटन क्षेत्र के सिलिंग और बजट वक्तव्य में दिए गए आंकड़ों में असंगति पाई गई है।

अर्थ मंत्री शेरचन ने कुल 32 अरब 99 करोड़ 99 लाख रुपये का बजट सार्वजनिक किया था, जिसमें उद्योग और पर्यटन क्षेत्र के लिए 2 अरब रुपये विनियोजित होने की बात कही गई।

अर्थ मंत्रालय की वेबसाइट पर भी उद्योग एवं पर्यटन क्षेत्र के लिए बजट 2 अरब रुपये ही दर्शाया गया है।

लेकिन नीति तथा योजना आयोग के उपाध्यक्ष नेतृत्व वाली समिति ने उद्योग तथा पर्यटन मंत्रालय को शुरू में 64 करोड़ 76 लाख 42 हजार रुपये के सिलिंग दिए थे, जबकि अंतिम बजट तय करते समय यह राशि 92 करोड़ 49 लाख रुपये तक बढ़ गई थी।

अर्थ मंत्री शेरचन ने उद्योग और पर्यटन क्षेत्र को विशेष महत्व देते हुए कृषि, भूमि व्यवस्था एवं सहकारी मंत्रालय के बराबर बजट निकालने का दावा करते हुए 2 अरब रुपये विनियोजन किया गया बताया। इसी बात पर पर्यटन मंत्री यशोदा रिमाल भी आश्चर्यचकित रहीं।

मंत्रालय से प्राप्त बजट और कार्यक्रमों में करीब 92.5 करोड़ रुपये भेजे गए थे, इसलिए यह समझना बाकी था कि यह राशि 2 अरब रुपये तक कैसे पहुंच गई। अन्य मंत्रियों को भी इस मुद्दे की जानकारी नहीं थी। सांसद भी इस पर प्रश्न पूछने लगे, जिससे विवाद गहरा गया। कुछ सांसदों ने तो फोन पर भी इस विषय में पूछताछ की।

92.5 करोड़ के बजट का 2 अरब तक कैसे बढ़ना हुआ? इस विषय ने सरकार के मंत्री और सांसदों के बीच असमझदारी और अफरातफरी बढ़ा दी है। सोमवार शाम को अर्थ मंत्री, पर्यटन मंत्री और सचिवों के बीच भी बातचीत हुई।

पर्यटन क्षेत्र के लिए 2 अरब रुपये का सिलिंग तय होने के बावजूद अनुसूची में केवल 92.5 करोड़ ही दर्ज थे। बजट वक्तव्य में 2 अरब रुपये लिखे जाने के बाद इसे संतुलित कैसे किया जाए, इस पर मंत्री और सचिवों के बीच असमझदारी हुई।

सच्चाई क्या है? इसे संतुलित करने के लिए कर्मचारी सक्रिय हो गए। उद्योग एवं पर्यटन से जुड़े अन्य मंत्रालयों के कार्यक्रमों को भी जोड़कर 2 अरब रुपये पूरा करने की सूची तैयार की गई थी।

ग्रामीण कृषि पर्यटन प्रवर्द्धन कार्यक्रम, कृषि उद्यमियों के लिए अनुदान, कृषि विकास उद्यम कार्यक्रम, तिल्चे, ताचै, बगरछाप, घैलाञ्चोक, ओडार, मर्कुडांडा, घेरांग, ताल पदमार्ग निर्माण, धौलागिरी आदि संस्थाओं एवं कंपनियों में शेयर निवेश, फिल्म-लार्केपास पदमार्ग, मुख्य मंत्री नवप्रवर्तन साझेदारी कार्यक्रम, वैकल्पिक पर्यटक पदमार्ग, संस्कृति, भाषा और पुरातत्व क्षेत्र के विभिन्न कार्यक्रमों के साथ कुल 17 शीर्षकों का बजट जोड़कर 2 अरब रुपये पहुंचाने की तैयारी की गई थी।

इसके अनुसार अर्थ मंत्री शेरचन भी उद्योग और पर्यटन क्षेत्र के लिए 2 अरब रुपये का बजट विनियोजन होने का जवाब देने की तैयारी में थे। मंत्री और कर्मचारी भी जवाब तैयार करने की योजना बना रहे थे।

किसी एक मंत्रालय के भीतर निर्धारित सिलिंग के अंतर्गत आए कार्यक्रमों को अन्य मंत्रालय की ओर स्थानांतरित दिखाने से बजट सिलिंग में उतार-चढ़ाव हो सकता है, जिससे असमझदारी बढ़ी। मंगलवार सुबह पर्यटन मंत्री रिमाल अर्थ मंत्री शेरचन से मिलने गईं, लेकिन चर्चा में भी समाधान नहीं निकला।

अर्थ मंत्री शेरचन ने बताया कि उद्योग और पर्यटन क्षेत्र के लिए 2 अरब रुपये का बजट विनियोजन किया गया है, लेकिन कुछ कार्यक्रम अन्य मंत्रालयों द्वारा भी कार्यान्वित होंगे। मुख्य मंत्री नवप्रवर्तन कार्यक्रम को भी उद्योग-पर्यटन में जोड़ने का प्रयास किया गया, पर हिसाब नहीं मिला। कर्मचारी इस प्रक्रिया को अंततः गलती मान रहे हैं।

जब बजट वक्तव्य में पर्यटन क्षेत्र के बजट में गड़बड़ी सामने आई, तब अर्थ मंत्रालय के सचिव, उप सचिव और अन्य कर्मचारी मुख्य मंत्री से मिले। इसके बाद मुख्य मंत्री सुरेन्द्रराज पाण्डे के साथ मंत्रियों की बैठक हुई। बैठक में अन्य मंत्रालयों के कार्यक्रम जोड़कर जवाब देने के बजाय संसद में स्थिति स्पष्ट करते हुए गलती सुधारने पर फैसला लिया गया।

चूंकि अनुसूची में 92.5 करोड़ रुपये ही दर्ज थे, इसलिए वक्तव्य में 2 अरब रुपये लिखने की जगह गलती सुधारा जाना और संसद को सूचित करना उचित रहेगा।

“मुख्यमंत्री समेत हमारी टीम बैठी थी। मंत्रालय का बजट अनुसूची के अनुसार (92.5 करोड़) ही है, लेकिन जोड़ते समय कुछ और भी चीजें आईं,” अर्थ मंत्री शेरचन ने कहा, “अगले संसद सत्र में इस गलती को सुधारकर एक तकनीकी त्रुटि बताने का निर्णय लिया गया है।”

उद्योग एवं पर्यटन में “पहले घरदेश: फिर परदेश” और “लेक टू लेक” कार्यक्रमों को बजट के माध्यम से निरंतरता दी गई है। फेवा ताल में सेल्फी पुल, रुपा में शीशे का पुल जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।

पोखरा को माइंस, स्वास्थ्य, खेलकूद और साहसिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। ‘राउंड फेवा: व्यू फेवा’, धार्मिक पर्यटन परिपथ, मनास्लु-अन्नपूर्ण-धौलागिरी-ढोरपाटन पदमार्ग स्तरोन्नति और सूचना प्रौद्योगिकी पार्क निर्माण के कार्यक्रम इसमें शामिल हैं।

प्रदेश सरकार ने बुनियादी ढांचा विकास, पर्यटन प्रवर्द्धन, कृषि आधुनिकीकरण, स्वास्थ्य सेवा विस्तार, शिक्षा सुधार और सुशासन को प्राथमिकता देते हुए बजट प्रस्तुत किया है।

सबसे अधिक बजट भौतिक पूर्वाधार एवं यातायात क्षेत्र के लिए 11 अरब 96 करोड़ रुपये विनियोजित किए गए हैं। प्रदेश की रणनीतिक सड़कें, पुल, कोराला-त्रिवेणी योजना अंतर्गत सड़कें, सात ताल रिंग रोड, शालिग्राम कॉरिडोर, विभिन्न जिलों की ग्रामीण सड़कें और बहुवर्षीय योजनाएं प्राथमिकता से आगे बढ़ेंगी।

ऊर्जा, जलस्रोत तथा पेयजल क्षेत्र के लिए 4 अरब 77 करोड़ रुपये का बजट अलग रखा गया है। आगामी वित्तीय वर्ष के भीतर प्रदेश के सभी घरों तक बिजली पहुंचाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 3 अरब 31 करोड़ रुपये विनियोजित हुए हैं।

गोरखा और नवलपुर में सिटी स्कैन मशीन खरीद, प्रादेशिक जनरल एवं संक्रामक रोग अस्पताल की इमारत निर्माण, मातृ तथा नवजात स्वास्थ्य, स्वास्थ्य बीमा, कैंसर उपचार सहायता और जोखिम में पड़े गर्भवती महिलाओं के लिए हवाई उद्धार कार्यक्रम को भी बजट में निरंतरता मिली है।

सामाजिक विकास, युवा तथा खेलकूद क्षेत्र के लिए 2 अरब 16 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। कृषि, भूमि व्यवस्था और सहकारी क्षेत्र के लिए 2 अरब रुपये विनियोजित किए गए हैं, जिनमें कृषि आधुनिकीकरण, उत्पादन आधारित अनुदान, पारंपरिक फसल संरक्षण, कृषि एम्बुलेंस सेवा, कृषि एप के माध्यम से डिजिटल मार्केटिंग और ‘रिटर्न टू विलेज’ अभियान शामिल हैं। पहाड़ी क्षेत्रों के 2,500 हेक्टेयर में फल और वानस्पतिक खेती के विस्तार के लिए 30 करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं।

वन और पर्यावरण संरक्षण के लिए 1 अरब 21 करोड़ रुपये विनियोजन किया गया है। प्रदेश सरकार ने राजस्व प्रणाली को और अधिक डिजिटल एवं करदातामैत्री बनाने की नीति अपनाई है।

बजट कार्यान्वयन के लिए संघीय सरकार से मिलने वाले अनुदान, राजस्व वितरण, रॉयल्टी तथा आंतरिक राजस्व मुख्य स्रोत होंगे व 1 अरब 75 करोड़ रुपये आंतरिक ऋण परिचालन का लक्ष्य रखा गया है।

गण्डकी सरकार ने आर्थिक वर्ष 2083/84 के लिए चालू खर्च हेतु 12 अरब 72 करोड़ 37 लाख 78 हजार रुपये (38.56%), पूंजीगत खर्च हेतु 20 अरब 2 करोड़ 61 लाख 22 हजार रुपये (60.68%) और वित्तीय प्रबंधन हेतु 25 करोड़ रुपये (0.76%) का विनियोजन किया है।