Skip to main content

सहकारी से रिचार्ज कार्ड बिक्री की राशि गायब, उपचार खर्च के अभाव में बेनुमाया की परेशानी

२ असार, काठमाडौं । शारीरिक रूप से विकलांग बेनुमाया कटुवाल अब सहकारी से फंसी हुई अपनी बचत राशि वापस लेने के प्रयास में लगी हैं। दैनिक खर्च जुटाने में भी कठिनाई के कारण कटुवाल कई बार सरकारी संस्थानों के पास जाकर अपना पैसा वापस मांग रही हैं। रिचार्ज कार्ड बेचते समय जब वे रास्ते पर चल रही थीं, तब शिवशिखर बहुउद्देश्यीय सहकारी के कर्मचारियों ने उच्च ब्याज और बाजार में खाद्य वस्तुओं पर छूट देने की गारंटी दी, जिससे विश्वास कर कटुवाल ने बचत शुरू की। कार्ड बेचने जाते रोजाना रास्ते में सहकारी की मौजूदगी से उन्हें बचत के लिए प्रेरणा मिली। बचत शुरू नहीं करने पर भी कर्मचारियों ने विभिन्न लुभावने प्रस्ताव दिये, जिससे वे विश्वास कर अपनी आमदनी बचाने लगीं। ‘मैं बेसहारा विकलांग हूं, इसलिए कर्मचारियों की गलत मंशा नहीं, बल्कि अच्छे आश्वासन पर पैसा रखा,’ उन्होंने कहा, ‘अब पछतावा है, बिना खाए रखा पैसा किसी और ने खा लिया, अब न काम कर सकती हूं, न बचत वापस पा रही हूं।’

उनकी जमा बचत लगभग एक लाख रुपये थी और रिचार्ज कार्ड बिक्री से मिली पाँच सौ रुपये भी भविष्य के लिए बचाए थे। ‘सहकारी में रखा पैसा न तो पहले दिन पेट भरा, न अब,’ उन्होंने बताया। कटुवाल ने शिवशिखर में ४ लाख रुपये का मुदती बचत रखा था वहीं गौतमश्री सहकारी में भी ५ लाख रुपये बचत करवाए थे। वर्तमान में वे विकलांग हैं, सीमित विस्तार में हैं, न इलाज का खर्च है, न काम करने की स्थिति। अच्छे से बोल भी नहीं सकती, औषधि न लेने पर शरीर चलाना मुश्किल है, पानी निगलना और साँस लेना भी कठिन हो गया है। ‘लगभग १० वर्षों से इस समस्या से जूझ रही हूं,’ उन्होंने कहा।

अविवाहित और अकेली महिला कटुवाल के पास अब न तो पैसा है, न कोई सहारा। विस्तार से उठने में असमर्थ कटुवाल पहले दैनिक रूप से काठमाण्डौ की सड़कों पर घूम-घूम कर रिचार्ज कार्ड बेचकर जमा पैसे को सहकारी में जमा करवाती थीं। ‘सहकारी में जमा पैसा और समस्या बढ़ा गया,’ उन्होंने शिकायत की, ‘बीमार और कमजोर होने के कारण जब वह पैसा फंसा तो स्थिति और जटिल हो गई, जीने की इच्छा भी कम हो गई।’

शिवशिखर सहकारी की समस्या क्या थी? कर्मचारी पैसा संकलित करते हुए विभिन्न कंपनी में निवेश करते थे लेकिन तत्कालीन अध्यक्ष केदार शर्मा और उनकी टीम की कार्यशैली ने संस्था को संकट में डाल दिया। बचतकर्ताओं ने पैसा वापस मांगा तो लौटाया नहीं गया, इसके बाद बचतकर्ताओं की पहल पर २०८० भदौ २५ को संस्था को समस्याग्रस्त घोषित कर दिया गया। नेपाल पुलिस के केंद्रीय जांच ब्यूरो ने १८ जेठ २०८० को शर्मा सहित संचालक और कर्मचारियों के खिलाफ ‘सहकारी ठगी और संगठित अपराध’ का मुकदमा दर्ज किया है। भक्तपुर समेत ३७ जिलों में इन सहकारियों से ठगी के खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं।