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श्रमजीवी पत्रकार संघ ने संचार क्षेत्र में पुनर्गठन के लिए सरकार को सुझाव दिया

२ असार, काठमाडौं । श्रमजीवी पत्रकार संघ नेपाल ने संचार क्षेत्र की समग्र संरचनात्मक सुधार, पत्रकारों के श्रम अधिकारों की सुनिश्चितता और संचार माध्यमों के प्रभावी नियमन के लिए सरकार को प्रस्तुत किए गए सुझावपत्र को लेकर व्यापक चर्चा शुरू की है। संघ ने सूचना तथा संचार मन्त्री डा. विक्रम तिमिल्सिनालाई सौंपे गए इस सुझावपत्र में नेपाल के आमसंचार क्षेत्र को नए कानूनी एवं संस्थागत ढाँचे के तहत पुनर्गठन करने के गंभीर प्रस्ताव शामिल हैं। संघ के अध्यक्ष जन्मदेव जैसी, महासचिव मनिषा अवस्थी सहित प्रतिनिधिमण्डल ने सिंहदरबार में स्थित सूचना तथा संचार मन्त्रालय पहुंचकर सुझावपत्र सौंपा।

चर्चा में संघ ने कहा कि हाल के वर्षों में संचार क्षेत्र तीव्र गति से बढ़ा है, लेकिन पत्रकारिता में विश्वास, श्रम सुरक्षा, पेशेवर मर्यादा एवं संस्थागत प्रबंधन से जुड़े कई गंभीर चुनौती बने हुए हैं। सुझावपत्र में सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव के रूप में ‘राष्ट्रीय आमसंचार प्राधिकरण’ के गठन की परिकल्पना प्रस्तुत की गई है। संघ के अनुसार वर्तमान विभाजित नियामक संरचना डिजिटल युग में संचार प्रणाली को प्रभावी रूप से नियंत्रित करने में विफल रही है, इसलिए एक समेकित नियामक निकाय की आवश्यकता अपरिहार्य हो गई है।

प्रस्तावित प्राधिकरण संचार माध्यमों के पंजीकरण, नवीनीकरण, वर्गीकरण से लेकर पत्रकार मान्यता, सुरक्षा, तथ्य जांच, डिजिटल संचार प्रबंधन, सरकारी विज्ञापन वितरण और संचार अनुसंधान तक की जिम्मेदारियाँ निभाएगा, सुझावपत्र में उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त प्राधिकरण के अंतर्गत संचार माध्यम पंजीकरण एवं नियमन विभाग, संचार न्यायालय, पत्रकार मान्यता एवं अभिलेख विभाग, राष्ट्रीय पत्रकारिता प्रशिक्षण संस्थान, पत्रकार सुरक्षा एवं कल्याण केंद्र, राष्ट्रीय तथ्य परीक्षण एवं सूचना विश्वसनीयता केंद्र तथा संचार अध्ययन एवं नीति अनुसंधान केंद्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव किया गया है।

संघ ने इसे आधुनिक संचार प्रणाली प्रबंधन की मूल संरचना बताया है। सुझावपत्र में प्रिंट, रेडियो, टेलीविजन, ऑनलाइन और अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों को एक ही कानूनी ढांचे में लाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है। साथ ही, संचार माध्यम के स्वामित्व और निवेश को पारदर्शी बनाने, वार्षिक लेखा परीक्षा अनिवार्य करने और आंतरिक आय-व्यय को सार्वजनिक करने की कड़ाई से लागू करने की मांग भी की गई है।