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इरान में निवेश बढ़ाने हेतु 300 अरब डॉलर के कोष स्थापना का प्रस्ताव

3 असार, काठमांडू। अमेरिका एवं इरान के बीच जारी युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से आगामी गुरुवार औपचारिक शांति समझौता होने की तैयारी चल रही है। इसी संदर्भ में इरान में आर्थिक निवेश के प्रवाह हेतु 300 अरब अमेरिकी डॉलर की बड़ी निजी कोष स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है, जो दोनों देशों के बीच हुए प्रारंभिक समझौते में शामिल किया गया है। रायटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि यह कोष दोनों पक्षों को अंतिम शांति समझौते तक पहुंचाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन का माध्यम होगा। आगामी गुरुवार को होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर के संवेदी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फिलहाल कोष का विस्तृत योजना गोपनीय रखी गई है।

इस प्रस्तावित राशि में से आधे से अधिक निवेश प्रतिबद्धता पहले ही प्राप्त हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार, यह कोष किसी सरकारी अनुदान या युद्ध मुआवजा कार्यक्रम के तहत नहीं, बल्कि पूरी तरह निजी निवेश संरचना पर आधारित होगा। इसमें दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर, मलेशिया और अमेरिका की निजी कंपनियों ने निवेश करने का वचन दिया है। कोष से इरान के ऊर्जा, परिवहन, उत्पादन, यातायात, इस्पात उद्योग, तेल शोधन केंद्र और हवाई अड्डों जैसे बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में निवेश किया जाएगा। फरवरी 28 को अमेरिका और इज़राइल द्वारा इरान पर संयुक्त हमला किए जाने के बाद युद्ध शुरू हुआ था।

हालांकि, पिछले रविवार को अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच युद्ध समाप्ति पर सहमति बन गई है। इस समझौते के तहत अमेरिका इरान पर लगी नाकाबंदी को हटाएगा और विश्व ऊर्जा आपूर्ति के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग “हॉर्मुज जलडमरूमध्य” को पुनः खोलने की योजना है। इरान ने युद्ध से हुए नुकसान के लिए अमेरिका से 400 अरब डॉलर की मांग की थी, लेकिन वाशिंगटन ने यह सरकारी राशि देने से इनकार कर दिया। इस कारण, मध्यमार्गी विकल्प के रूप में निजी कोष की अवधारणा सामने आई है।

‘पुनर्निर्माण एवं विकास कोष’ नामक इस संरचना के अंतर्गत क्षेत्रीय देशों द्वारा ऋण प्रत्याभूति, ऋण सुविधा या प्रत्यक्ष निवेश के माध्यम से योगदान दिया जाएगा। मध्य पूर्व का एक प्रमुख अर्थतंत्र होने के बावजूद, पिछले चार दशकों में इरान अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण पर्याप्त विदेशी निवेश आकर्षित करने में सक्षम नहीं रहा है। विश्व का दूसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस और चौथा सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार वाला इरान 9 करोड़ 20 लाख से अधिक शिक्षित युवा जनसंख्या रखता है, जिससे इस निवेश से बड़ा आर्थिक बदलाव अपेक्षित है। व्हाइट हाउस के अनुसार, इरान को कोष उपलब्ध कराने के लिए कड़े शर्तें पूरी करनी होंगी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी भान्स के कथन के अनुसार, इरान को अपनी परमाणु गतिविधियां पूरी तरह बंद करनी होंगी, संवर्धित परमाणु सामग्री का संग्रह हटाना होगा तथा कठोर अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण स्वीकार करना होगा।

गुरुवार को अमेरिका और इरान के बीच 60 दिन की समझदारी पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने वाले हैं, जो अंतिम समझौता नहीं बल्कि प्रारंभिक रूपरेखा है। इस अवधि में दोनों देश परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समानांतर वार्ता जारी रखेंगे। आगामी 60 दिनों में कोष के प्रबंधक इरानी पक्ष और निवेशकों के साथ परियोजना योजनाओं तथा कार्यक्षेत्र का निर्धारण करेंगे। अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर के पश्चात ही यह कोष पूर्ण रूप से लागू किया जाएगा।