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मंत्रालय की उपकुलपति नियुक्ति प्रक्रिया में विवाद और विलम्ब

२ जेठ, काठमाडौं । चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवा संचालन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले देश के प्रमुख स्वास्थ्य विज्ञान संस्थान लंबे समय से नेतृत्वहीन हैं। सरकार द्वारा सार्वजनिक पदाधिकारियों के पदमुक्ति संबंधी विशेष व्यवस्था हेतु अध्यादेश, २०८३ जारी किए जाने के बाद ये पदाधिकारी बर्खास्त कर दिए गए। लेकिन डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया में उलझन जारी है, जिससे संस्थान की दीर्घकालीन योजनाओं और नीतिगत निर्णयों में बाधा उत्पन्न हुई है।

स्वास्थ्य तथा खाद्य स्वच्छता मन्त्रालय ने १९ जेठ को छह स्वास्थ्य विज्ञान संस्थानों के उपकुलपति पद के लिए आवेदन किए गए उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक की थी। किन्तु चयन प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है। मन्त्रालय सूत्रों के अनुसार आवेदन संग्रहण से मूल्यांकन तक सभी चरणों में प्राविधिक एवं प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ रही हैं, जिसके कारण तत्काल नियुक्ति नहीं हो सकी। ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से प्राप्त आवेदनों को कोडिंग करके विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य पहचान छुपाकर निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करना है, जिससे प्रक्रिया कुछ विलंबित हो रही है, मन्त्रालय का दावा है।

मन्त्रालय आगामी दो सप्ताह के अंदर उपकुलपति पदों के लिए शॉर्टलिस्ट तैयार करने की योजना बना रहा है। राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान प्रतिष्ठान (न्याम्स), पाटन स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान, पोखरा स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान, राप्ती स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान, बीपी कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान और कर्णाली स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान में वर्तमान में निष्पादन पदों के आधार पर कार्य चल रहा है। मन्त्रालय ने नियुक्ति प्रक्रिया में राजनीतिक या अन्य प्रभाव के बजाय योग्यता, अनुभव और कार्यक्षमता के आधार पर चयन करने का आश्वासन दिया है।

मन्त्रालय के अनुसार छह प्रतिष्ठानों के लिए कुल ११३ उम्मीदवारों ने आवेदन किया है। इनमें सबसे अधिक २६ आवेदन पोखरा स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान के लिए प्राप्त हुए हैं। कार्यविधि के अनुसार चयन समिति उम्मीदवारों की शैक्षिक योग्यता, अनुभव, अनुसंधान योगदान, नेतृत्व क्षमता एवं प्रबंधन दक्षता के आधार पर मूल्यांकन कर योग्यताक्रम तैयार करेगी। अंतिम चरण में प्रत्येक रिक्त पद के लिए तीन-तीन नाम सिफारिश करने का प्रावधान है।

मन्त्रालय के सह प्रवक्ता डा. समीर अधिकारी के अनुसार उपकुलपति चयन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धात्मक तथा विश्वसनीय बनाने के लिए विशेषज्ञों की संलिप्तता में मूल्यांकन प्रक्रिया की गई है, जिसके कारण समय लगा है। सिफारिश समिति कार्यविधि द्वारा निर्धारित मानदण्डों के तहत प्रारंभिक चयन (शॉर्टलिस्टिंग) करेगी।

अंतिम चरण में प्रत्येक रिक्त पद के लिए तीन-तीन नामों की सिफारिश की जाएगी। सिफारिश समिति द्वारा भेजे गए नामों में से संबंधित संस्थान के कुलपति के रूप में प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा।