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राज्य संचालन के लिए ऋण आवश्यक है – वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले

वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने कहा, “राज्य संचालन के लिए राजस्व के अतिरिक्त सार्वजनिक ऋण का परिचालन अनिवार्य विकल्प है।” उन्होंने बताया कि आगामी आर्थिक वर्ष में 2 खरब 47 अरब रुपये विदेशी ऋण तथा 4 खरब 10 अरब रुपये आंतरिक ऋण परिचालित किए जाएंगे। सरकार ने कृषि क्षेत्र के विकास के लिए 47 अरब और रासायनिक उर्वरक की खरीद के लिए 32 अरब रुपये का विनियोजन किया है।

4 असार, काठमांडू। वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने प्रतिनिधि सभा में बजट संबंधित चर्चा के दौरान उठाए गए प्रश्नों के उत्तर देते हुए कहा कि राज्य संचालन के लिए ऋण लेना अपरिहार्य है। सार्वजनिक ऋण के बढ़ने के विषय में पूछे गए सवालों के जवाब में उन्होंने कहा, ‘राजस्व के अतिरिक्त राज्य संचालन के लिए सार्वजनिक ऋण परिचालन के अलावा कोई विकल्प नहीं है।’ उन्होंने बताया कि आगामी आर्थिक वर्ष में 2 खरब 47 अरब रुपये का विदेशी ऋण और 4 खरब 10 अरब रुपये का आंतरिक ऋण परिचालित किया जाएगा।

उसी अवधि में आंतरिक ऋण के मूलधन और ब्याज के भुगतान के लिए 2 खरब 46 अरब का व्यय होगा, वहीं अतिरिक्त 1 खरब 64 अरब रुपये आंतरिक ऋण के रूप में परिचालित किए जाएंगे।

वित्त मंत्री वाग्ले ने कहा कि आंतरिक ऋण को आर्थिक गतिविधियों को सक्रिय रखने के लिए प्राथमिकता प्राप्त परियोजनाओं और क्षेत्रों में विनियोजित किया गया है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में सार्वजनिक ऋण में पिछले वर्षों की तुलना में वृद्धि नहीं हुई है। पूंजीगत खर्च बेहद न्यूनतम है और सरकार रकम इकट्ठी होने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि विनियोजन ऐन 2082 तथा आर्थिक कार्यविधि और वित्तीय उत्तरदायित्व नियमावली 2077 में संशोधन करके पूंजीगत खर्च के विषयगत मंत्रालयों को स्वयं रकमान्तर करने का अधिकार प्रदान किया गया है।

परियोजनाओं के प्रमुखों सहित जनशक्ति की स्थिरता सुनिश्चित की जाएगी और पूंजीगत खर्च वृद्धि के लिए अर्थ मंत्रालय संबंधित मंत्रालय तथा निकायों को सहजीकरण करेगा, इस प्रतिबद्धता व्यक्त की उन्होंने।