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सर्वोच्च अदालत के निर्णय की अवहेलना करते हुए सरकार, 21 उद्योगों की बिजली और पानी की लाइन काटी गई

सर्वोच्च ने पुनरावलोकन याचिका खारिज किए जाने के बावजूद औद्योगिक क्षेत्र प्रबंधन लिमिटेड ने 21 उद्योगों की बिजली और पानी की लाइन काट दी है। सर्वोच्च ने केवल २०७९ के बाद बढ़े हुए किराए वसूलने का निर्णय दिया था, लेकिन लिमिटेड २०७५ से पुराने किराए की मांग करते हुए दबाव बना रहा है। नेपाल औद्योगिक क्षेत्र उद्योग महासंघ के अध्यक्ष एजाज अहमद ने बिना पूर्व सूचना के उद्योगों की बिजली और पानी की लाइन काटे जाने का आरोप लगाया है।

५ असार, काठमांडू।

औद्योगिक क्षेत्र प्रबंधन लिमिटेड द्वारा दायर पुनरावलोकन याचिका सर्वोच्च अदालत द्वारा खारिज किए जाने के बाद भी लिमिटेड ने तीसरे दिन भी 21 उद्योगों की बिजली और पानी की लाइन काटना जारी रखा है। देश भर में विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों का संचालन करते हुए यह प्रबंधन लिमिटेड भूमि किराया विवाद को लेकर उद्योगों की पानी और बिजली की लाइन काट रहा है।

सर्वोच्च अदालत ने २०७९ साल के बाद ही किराया बढ़ाने की अनुमति दी थी, बावजूद इसके लिमिटेड २०७५ से पुराने किराए की वसूली के लिए उद्योगों पर दबाव डाल रहा है। सर्वोच्च के फैसले के खिलाफ लिमिटेड ने पुनरावलोकन याचिका दायर की थी, जिसे गुरुवार को अदालत ने खारिज कर दिया। अब लिमिटेड केवल २०७९ के बाद बढ़े किराए की वसूली कर सकता है।

सर्वोच्च के निर्णय के अनुसार किराए विवाद को सुलझाने की बजाय लाइन काटने का यह सिलसिला जारी है, ऐसा नेपाल औद्योगिक क्षेत्र उद्योग महासंघ के अध्यक्ष एजाज अहमद ने बताया। उन्होंने कहा, ‘इस बीच उद्योग किराया जमा कर रहे हैं, कुछ का बकाया हो सकता है, कुछ ने अतिरिक्त किराया भी चुका दिया होगा। सर्वोच्च के फैसले के बाद अब यह निर्धारित करना होगा कि किस उद्योग ने कितना भुगतान किया है और कितना बाकी है, तभी वसूली होनी चाहिए।’ परंतु, बिना यह स्पष्ट किए कि किराया २०७९ का है या २०७५ का, जबरन बिजली और पानी की लाइन कटी है।

औद्योगिक क्षेत्र प्रबंधन लिमिटेड के नियमावली के अनुसार बिजली और पानी के बकाया न चुकाए जाने पर ही लाइन काटी जा सकती है, लेकिन इस विवाद में इसे अनुचित तरीके से लागू करने का आरोप भी लगाया गया है। उन्होंने बताया कि बिजली लाइन काटने के संबंध में उद्योगों को कोई लिखित सूचना भी नहीं दी गई।

लिमिटेड के अनुसार आज काटी गई 21 में से 12 उद्योगों ने बकाया राशि चुका दी है। पहली और दूसरी दिन लाइन काटे गए उद्योगों में से अतिरिक्त 21 ने भी आज राशि जमा कर लाइन जोड़ी है। हालांकि, अब भी 68 उद्योगों की बिजली और पानी की लाइनें काटी हुई हैं।

एक उद्योगपति ने कहा, ‘विवाद भूमि किराए का है, पानी और बिजली के शुल्क हम नियमित रूप से भुगतान कर रहे हैं। अदालत के फैसले के अनुसार हम भुगतान के लिए तैयार हैं, लेकिन प्रबंधन लिमिटेड हमारी बात सुनने के बजाय गुंडागर्दी कर रहा है।’

वहीं, प्रबंधन लिमिटेड ने दावा किया है कि केवल उन लोगों की लाइन काटी गई है जिन्होंने सर्वोच्च अदालत के फैसले के अनुरूप राशि का भुगतान नहीं किया है। लिमिटेड के अनुसार आज ही 3 करोड़ 18 लाख 67 हजार 493 रुपये 73 पैसे बकाया वसूल चुका है। अब तक कुल 32 करोड़ 4 लाख 62 हजार 715 रुपये 61 पैसे वसूल किए जा चुके हैं।

देश के 10 औद्योगिक क्षेत्रों (बालाजु, पाटन, भक्तपुर, हेटौंडा, पोखरा, बुटवल, नेपालगंज, धरान, वीरेन्द्रनगर और गजेन्द्र नारायण सिंह) में लंबे समय से किराया न चुकाए जाने के कारण लिमिटेड ने लाइन काटना शुरू किया था।