प्रधानमंत्री बालेन ने रास्वपा के महाधिवेशन में संसद में उठाए गए प्रश्नों का जवाब दिया
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने रास्वपा के महाधिवेशन में सीमा विवाद को लेकर अपनी राष्ट्रीयता पर सवाल उठाने वालों से आग्रह किया कि वे संदेह न करें और कहीं भी प्रमाण खोजने के लिए तैयार होने की बात कही। उन्होंने सरकारी संपत्ति के दोहन और पिछले अनियमितताओं की जांच के लिए आवश्यकता पड़ने पर पाँच साल तक अख्तियार के साथ चर्चा करने के लिए प्रतिबद्धता जताई। प्रधानमंत्री शाह ने अपनी पार्टी को विकासवादी बताते हुए कहा कि यदि अतीत में सरकारी संपत्ति का दोहन हुआ है तो उसके पीछे कारण और तथ्य खोजने की जरूरत है। (७ असार, चितवन)
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने प्रतिनिधित्व सभा में विपक्षी सांसदों द्वारा उठाए गए प्रश्नों का जवाब रास्वपाके प्रथम महाधिवेशन स्थलों से दिया। सीमा विवाद से जुड़ी उनकी अभिव्यक्ति के कारण विवाद उत्पन्न होने पर सांसदों ने संसद में स्पष्टता मांग की थी। इस विषय पर प्रधानमंत्री ने सीधे जवाब न देते हुए विदेश मंत्री शिशिर खनाल को स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया था। आज रास्वपा के महाधिवेशन में प्रधानमंत्री ने इन विषयों को उठाते हुए स्वयं जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘यहाँ सीमा विवाद की बात हुई। हमारे पास प्रमाण हैं और उनका उपयोग कर बात की जाएगी। हम मध्यस्थता नहीं कर रहे हैं। यदि प्रमाण नहीं मिलते हैं, तो हम वहाँ जाकर खोज करने की कोशिश करेंगे।’
प्रधानमंत्री शाह ने अपनी राष्ट्रीयता पर संदेह न करने का आग्रह करते हुए कहा, ‘मेरी राष्ट्रीयता पर किसी को भी संदेह नहीं करना चाहिए।’ नेपाल की सीमा से संबंधित प्रमाण खोजने की जरूरत पड़ने पर वे स्वयं वहाँ पहुंचने को तैयार हैं। उन्होंने हाल ही अख्तियार के अधिकारियों को बुलाकर पूछताछ किए जाने के विषय पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि अगर आवश्यक हुआ तो पाँच घंटे नहीं बल्कि पाँच साल तक भी अनियमितताओं की जांच के लिए चर्चा करने को तैयार हैं। सरकारी संपत्ति के दोहन के विषय में कदम उठाने की चेतावनी भी दी। रास्वपा के प्रथम महाधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘बीती गलतियों की जांच के लिए आवश्यक हुआ तो अख्तियार को पाँच घंटे नहीं, बल्कि पाँच साल तक सलाह के लिए रखा जा सकता है। हम नियमों से बाहर नहीं जाएंगे।’ उन्होंने अपनी पार्टी को विकासवादी पार्टी के रूप में परिचित कराते हुए कहा, ‘हमारी पार्टी विकासवादी और कर्मठ है। हम पुरानी कटुताओं को लेकर प्रतिशोध नहीं लेते। लेकिन यदि पिछले भ्रष्टाचार और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग के मामले हैं, तो उनकी तहकीकात जरूरी है।’
