Skip to main content

प्राकृतिक संसाधनों की रॉयल्टी दायरे में विस्तार का सुझाव, संभावित क्षेत्र ये हैं

समाचार सारांश

समीक्षा के बाद तैयार।

  • वित्त आयोग ने प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त रॉयल्टी के दायरों का विस्तार करने तथा प्राकृतिक संसाधन परिचालन से संबंधित एकीकृत कानून बनाने के लिए सरकार को सुझाव दिया है।
  • आयोग ने नेपाल पर्वतारोहण संघ द्वारा संकलित रॉयल्टी को राज्य कोष में जमा करने और संघ को वार्षिक बजट आवंटित कर खर्च करने की सिफारिश की है।
  • नियमित रॉयल्टी नहीं देने वाली जलविद्युत कंपनियों के लिए नेपाल विद्युत प्राधिकरण के भुगतान से कटौती कर सीधे संघीय विभाज्य कोष में राशि जमा करने की सलाह दी गई है।

७ असार, काठमांडू। राष्ट्रीय प्राकृतिक स्रोत तथा वित्त आयोग ने पानी और अन्य प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होने वाली रॉयल्टी के दायरे को बढ़ाने की सरकार को सलाह दी है।

आगामी वित्तीय वर्ष २०८३/८४ के लिए संबंधित प्रदेश और स्थानीय सरकारों की तरफ से रॉयल्टी वितरण संबंधी सरकार को दी गई सिफारिश पर आयोग ने यह सुझाव प्रस्तुत किया है।

अंतरसरकारी वित्त प्रबंधन अधिनियम २०७४ की अनुसूची ४ के अनुसार पर्वतारोहण, वन, विद्युत, खनन तथा खनिज, और पानी सहित अन्य प्राकृतिक स्रोतों से रॉयल्टी संग्रह कर तीनों स्तर की सरकारों के बीच वितरण का प्रावधान है।

संघीय सरकार को ५० प्रतिशत, संबंधित प्रदेश को २५ प्रतिशत और स्थानीय तह को २५ प्रतिशत हिस्सा मिलता है। आयोग ने प्राकृतिक स्रोत परिचालन और उससे प्राप्त रॉयल्टी के उपयोग से संबंधित सुझावों के साथ दायरे बढ़ाने की सिफारिश की है।

आयोग ने वन, खनिज और दूरसंचार सेवा की रेडियो फ़्रीक्वेंसी परिचालन से प्राप्त रॉयल्टी के वितरण संबंधी दायरे विस्तार के लिए भी सुझाव दिया है।

संभावित स्रोतों में अंतरबेसिन पीने योग्य जल, जल यातायात, जल मनोरंजन, मछलीपालन और हाइड्रोजन ऊर्जा से रॉयल्टी संग्रह के लिए कानून बनाने की सिफारिश भी की गई है।

सौर ऊर्जा, वायु ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, तापीय ऊर्जा, जीवाश्म ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, पेट्रोल एवं दूरसंचार क्षेत्र से भी रॉयल्टी संग्रह संभव है, आयोग ने कहा है।

ऐसे स्रोतों से प्राप्त रॉयल्टी के प्रबंधन हेतु कानून बना कर लागू करने का सुझाव दिया गया है। संकलित रॉयल्टी का संरक्षण, संवर्द्धन तथा विकास के लिए उपयोग और व्यवस्थित प्रबंधन की बात कही गई है।

एकीकृत कानून बनाने का सुझाव

आयोग ने प्राकृतिक स्रोत परिचालन के दौरान तीनों स्तर की सरकारों के बीच निवेश तथा लाभांश हिस्सेदारी निर्धारण, रॉयल्टी वितरण विवाद निवारण और पर्यावरणीय मूल्यांकन पर एकीकृत कानून बनाकर लागू करने की सिफारिश की है।

पर्वतारोहण संघ द्वारा संकलित रॉयल्टी राज्य कोष में जमा करें

नेपाल पर्वतारोहण संघ द्वारा संकलित रॉयल्टी को राज्य कोष में जमा करने और संघ को वार्षिक बजट आवंटित करने की सिफारिश आयोग ने सरकार को की है।

हालांकि, अंतरसरकारी वित्त प्रबंधन अधिनियम में यह प्रावधान है, फिर भी इसे लागू नहीं किया गया है, जिसे विशेष रूप से आयोग ने अंकित किया है। वर्तमान में सरकार ने २७ हिमालय पर्वतों के प्रबंधन और प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी संघ को दी है।

पर्वतारोहण से प्राप्त रॉयल्टी वितरण अधिक व्यवस्थित और समन्वित बनाने के लिए पदमार्ग संबंधी सूचकांक भी शामिल करने की जरूरत आयोग ने बताई है।

पर्वतारोहण के दौरान बेस कैम्प तक पहुंचने वाले पदमार्ग की लंबाई एवं स्थानीय सरकारों की जानकारी तैयार करने के लिए संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय को सुझाव दिया गया है।

रॉयल्टी हिमालचुली की स्थानीय सरकार, आस-पास की स्थानीय सरकार, बेस कैंप स्थान और पदमार्ग सहित आरोहण प्रभावित क्षेत्रों के संरक्षण तथा संवर्द्धन हेतु उपयोग करने की सलाह भी दी गई है।

रॉयल्टी न देने वाली विद्युत कंपनियों पर सख्ती करें

आयोग ने नियमित रॉयल्टी न देने वाली जलविद्युत कंपनियों पर सख्ती करने की सिफारिश की है। अधिकांश निजी क्षेत्र की जलविद्युत केंद्र वार्षिक रॉयल्टी संघीय विभाज्य कोष में नियमित नहीं जमा कर रहे हैं, जिससे तीनों स्तर की सरकारों के बजट निर्माण में समस्या आ रही है।

अब नियमित रॉयल्टी नहीं जमा करने वाली जलविद्युत कंपनियों के लिए नेपाल विद्युत प्राधिकरण द्वारा खरीद के भुगतान में से रॉयल्टी काट कर सीधे संघीय विभाज्य कोष में जमा करने का प्रावधान प्रभावी रूप में लागू करने की सुझाव दी गई है।

विद्युत क्षेत्र से प्राप्त रॉयल्टी जलाधार संरक्षण, पर्खाल व जलाशय संरक्षण, नदी नियंत्रण और जल संसाधनों के सतत उपयोग के कार्यक्रमों में खर्च किए जाने चाहिए, स्थानीय लोगों को जागरुक करने के लिए भी इसका उपयोग करने की बात कही गई है।

तीनों स्तर की सरकारें जलविद्युत आयोजना के आसपास के सड़कों का सुधार-निर्माण करते वक्त भूक्षरण रोकने के लिए नाली व्यवस्था, नदियाँ के किनारों में अवरोधक पर्खाल आदि कार्य करने की सलाह दी गई है।

खनिज उत्खनन में निकलने वाली मिट्टी सुरक्षित स्थान पर प्रबंधन और भूस्खलन नियंत्रण हेतु बायो-इंजीनियरिंग कार्य करने की सिफारिश भी की गई है।

रॉयल्टी न मिलने वाली स्थानीय सरकारों को भी संघ से बजट उपलब्ध कराएं

आयोग ने रॉयल्टी न पाने वाली स्थानीय सरकारों के लिए संघीय सरकार से बजट आवंटित करने का प्रावधान करने की सलाह दी है। कानून के अनुसार प्राकृतिक स्रोत की रॉयल्टी निकटतम प्रभावित क्षेत्र के आधार पर वितरित होती है, जिससे कुछ स्थानीय तह रॉयल्टी प्राप्त नहीं कर पाते हैं।

ऐसे स्थानीय तह के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए संघीय सरकार को बजट उपलब्ध करवाने की सिफारिश की गई है।

पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन क्षेत्र का विस्तार करें

भू-संसाधन परिचालन पूर्व पर्यावरणीय अध्ययन रिपोर्ट में आयोग द्वारा निर्धारित प्रभावित क्षेत्र और आयोजन स्थल के आसपास के क्षेत्रों की स्पष्ट जानकारी शामिल करने को कहा गया है।

आयोजन वाली पर्यावरणीय अध्ययन में उल्लिखित विषयों के अनुरूप स्रोत परिचालन क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रमों के संचालन की जांच करने का सुझाव दिया गया है।

कर प्रणाली को सुधारें

आयोग ने रॉयल्टी एवं अन्य शुल्कों को एक द्वार प्रणाली से एकत्रित कर कानून के अनुसार संबंधित निकायों में जमा कराने का सुझाव दिया है।

तीनों स्तर की सरकारें रॉयल्टी से प्राप्त रकम खर्च करते समय वार्षिक कार्ययोजना बनाकर ही कार्यक्रम क्रियान्वित करें, ऐसा भी कहा गया है।

रॉयल्टी कहां खर्च करें?

आयोग ने संभावित रॉयल्टी उपयोग के क्षेत्रों की सूची बनाकर सरकार को सिफारिश की है। पर्वतारोहण से प्राप्त रॉयल्टी पदमार्ग और बेस कैंप तक के मार्ग निर्माण व सुधार में खर्च करने की सलाह दी गई है।

इसके अलावा आधार शिविर में पूर्वाधार निर्माण, देखभाल, आरोही के लिए कैंपिंग स्थल व विश्राम स्थान निर्माण एवं रखरखाव, कचरा प्रबंधन, सूचना एवं संचार केंद्र, पर्यटक पुलिस, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, जनशक्ति प्रशिक्षण, बचाव क्षमता वृद्धि, संग्रहालय स्थापना, आचार संहिता प्रचार-प्रसार और आपदा प्रबंधन में खर्च करने के लिए भी कहा गया है।

विद्युत क्षेत्र की रॉयल्टी जलाधार संरक्षण, जलाशय और पर्खाल संरक्षण, नदी नियंत्रण, जल संसाधन का सतत उपयोग, जलविद्युत संरचनाओं के संरक्षण और स्थानीय लोगों को जागरुकता कार्यक्रमों में खर्च करने की सिफारिश है।

निचली तटीय सूखे क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल संरचना निर्माण, ग्रामीण विद्युतीकरण, मछलीपालन, विस्थापित समुदाय पुनर्वास और पर्यावरण पर्यटन में भी खर्च करने की सलाह दी गई है।

आयोग के अनुसार आगामी वर्ष के लिए प्रदेशों में सगरमाथा रॉयल्टी सबसे ज्यादा कोशी प्रदेश को मिलेगी, दूसरे स्थान पर बागमती प्रदेश होगा। चोयू हिमाल की रॉयल्टी में भी कोशी प्रदेश सबसे आगे रहेगा, बागमती दूसरी जगह पर होगी।

धौलागिरी की रॉयल्टी सबसे अधिक गण्डकी प्रदेश को प्राप्त होगी, कुछ हिस्सा कर्णाली को मिलेगा। ल्होत्से की रॉयल्टी कोशी और बागमती प्रदेश को मिलेगी। मकालु की रॉयल्टी कोशी को और मनास्लु की रॉयल्टी गण्डकी को पूरी तरह मिलेगी।

स्थानीय तहों में सगरमाथा हिमाल की रॉयल्टी प्राप्त करने वाले लगभग 2 दर्जन जिले हैं, जिनमें ५० प्रतिशत हिस्सेदारी खुम्बु पासाङल्हामु गाउँपालिका को मिलेगी।