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नेपाल में डेटा सेंटर स्थापना और इसका प्रभाव: लगातार जारी है बहस

८ असार, काठमांडू। हाल के दिनों में नेपाल में डेटा सेंटर की स्थापना और उसके विस्तार को लेकर नीतिगत, आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से व्यापक बहस जारी है। सरकार ने बजट तथा नीति दस्तावेजों के माध्यम से डिजिटल अवसंरचना निर्माण और ‘डेटा सार्वभौमिकता’ को प्राथमिकता दी है, जिससे यह विषय वर्तमान में बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। जलवायु और पर्यावरण संरक्षण के कार्यकर्ता डेटा सेंटर द्वारा अत्यधिक ऊर्जा और जल उपयोग पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं, जबकि सूचना प्रौद्योगिकी और आर्थिक विशेषज्ञ इसे नेपाल के आर्थिक रूपांतरण के एक प्रमुख आधार के रूप में देख रहे हैं।

कुछ दिन पहले, शोधकर्ता उत्तमबाबु श्रेष्ठ ने नेपाल में डेटा सेंटर नेटवर्क बनाने के मुद्दे को हल्के में न लेने की बात करते हुए ‘गैलप’ के एक अनुसंधान रिपोर्ट को साझा किया। उन्होंने लिखा, ‘नेपाल में वर्तमान में डेटा सेंटर (डेटा फार्म) स्थापित करके एक साथ समृद्धि हासिल करने की उम्मीद कई लोग कर रहे हैं। लेकिन अमेरिका में डेटा सेंटर के विरोध में मजबूत मत संग्रह और विरोध बढ़ रहा है,’ श्रेष्ठ ने आगे कहा, ‘हमारे बड़े परियोजनाओं को शुरू करने से पहले पर्याप्त अध्ययन तथा प्रमाण आधारित गंभीर बहस आवश्यक है, बिना सोच-विचार के निर्णय नहीं लिए जाने चाहिए।’

गैलप के सर्वेक्षण से यह भी पता चलता है कि अधिकांश लोग पर्यावरणीय प्रभाव के कारण डेटा सेंटर स्थापना को अस्वीकार करते हैं। ७१ प्रतिशत अमेरिकी इस बात के पक्ष में हैं कि अपने क्षेत्र में डेटा सेंटर का निर्माण नहीं होना चाहिए। वहीं, कम संख्या में अमेरिकी डेटा सेंटर निर्माण का समर्थन करते हैं। समर्थकों में से अधिकांश ने इसे आर्थिक लाभ का मुख्य कारण माना है और ५५ प्रतिशत ने रोजगार सृजन की उम्मीद जताई है।

नेपाल में डेटा सेंटर स्थापना के समर्थक इसे देश की प्राकृतिक विशेषताओं के अनुसार और सस्ते नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग से प्रतिस्पर्धात्मक डिजिटल हब बनने की संभावना मानते हैं। वर्ल्डलिंक के सीईओ केशव नेपाल के अनुसार, नेपाल में डेटा सेंटर स्थापना से अपेक्षित जितना बड़ा पर्यावरणीय प्रभाव नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘हम अपनी प्राथमिक स्रोतों से उत्पादित पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा और पानी का उपयोग करते हुए इस उद्योग को संचालित करेंगे।’