पानीपुरी दक्षिण एशिया के सबसे लोकप्रिय और पसंदीदा स्ट्रीट फूड में से एक है। नेपाल, भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के विभिन्न क्षेत्रों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है, यह व्यंजन स्वाद, संस्कृति और सामाजिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। खट्टे, तीखे और मसालेदार पानी से भरी पुरी का स्वाद सभी आयु वर्ग के लोगों को लुभाता है। आज पानीपुरी सड़क के ठेलों से लेकर बड़े रेस्तरां और फूड चेन तक पहुंच चुका है।
पानीपुरी की असली उत्पत्ति के बारे में स्पष्ट ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, इसका आरंभ प्राचीन भारत के मगध क्षेत्र में हुआ हो ऐसा अनुमान लगाया जाता है। वर्तमान बिहार, झारखंड और आस-पास के इलाकों को समेटने वाला मगध उस समय सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र था। माना जाता है कि यहीं पहली बार छोटे आकार की पूरियां तैयार करके उनके अंदर विभिन्न सामग्री भरने की परंपरा विकसित हुई। समय के साथ विभिन्न क्षेत्रों के स्वाद, मसालों और पाक कला के प्रभाव से यह व्यंजन विकसित होकर आज की पानीपुरी बना।
नेपाल में पानीपुरी का प्रवेश भारत के सांस्कृतिक प्रभाव और खुली सीमाओं के कारण माना जाता है। खासकर तराई क्षेत्र में यह बाजार में अत्यधिक लोकप्रिय हुआ और धीरे-धीरे काठमांडू घाटी, पोखरा, विराटनगर, नेपालगंज, बुटवल समेत अन्य शहरों में फैल गया। शुरूआती दिनों में भारतीय शैली में बनाई जाने वाली पानीपुरी अब नेपाली स्वादानुसार भी अनुकूलित की गई है। नेपाल में आलू, केराउ, चना, प्याज, भुजिया, चटपटा मसाला आदि सामग्री मिलाकर बनाई जाने वाली पानीपुरी विशेष रूप से लोकप्रिय है।
पानीपुरी स्वादिष्ट होते हुए भी इसके स्वास्थ्य पर प्रभाव उपयोग की जाने वाली सामग्री और स्वच्छता पर निर्भर करता है। घर पर साफ पानी, ताजी सब्जियां और गुणवत्तापूर्ण सामग्री से बनी पानीपुरी अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती है। लेकिन अत्यधिक मसाला, नमक तथा अस्वच्छ पानी के उपयोग से पेट से संबंधित समस्याएं, खाद्य जनित संक्रमण और दस्त होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ पानीपुरी खाते समय विशेष रूप से स्वच्छता का ध्यान रखने की सलाह देते हैं।
