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चीन के दबाव के बीच अमेरिका और उसके साझेदारों ने एशिया में पांच बड़े सैन्य अभ्यासों को सफलतापूर्वक संपन्न किया

१२ असार, काठमांडू। इस महीने की शुरुआत में ही जापान ने फिलीपींस के सबसे उत्तरी प्रांत में पैराशूट अभ्यास के लिए अपने विशेष विमान चालक दल एयरबोर्न ब्रिगेड के सदस्यों को गुपचुप तरीके से तैनात किया, लेकिन दोनों पक्षों के अधिकारी इसे खास प्रचारित नहीं करना चाहते थे। बतानेस प्रांत में आयोजित यह अभ्यास ‘कामान्दाग’ का एक हिस्सा था। फिलीपींस और अमेरिकी मरीन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह देशव्यापी मिशन गत बुधवार तक चला। लगभग २ हजार सैनिक शामिल इस अभ्यास का उद्देश्य युद्ध की पूर्व तैयारी, अन्तरसंचालनक्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) और गुप्त सूचना आदान-प्रदान में सुधार करना था। लेकिन, बतानेस में यह औपचारिक सैन्य उतार-चढ़ाव अगर एशिया भर लगभग एकसाथ चल रहे अन्य चार बड़े सैन्य अभ्यासों के साथ जोड़ा जाए तो यह एक बड़ी रणनीतिक تبدیلی का संकेत देता है।
विश्लेषकों के अनुसार, इन अभ्यासों से अमेरिकी प्रतिरोध नीति और इसकी ‘फर्स्ट आइलैंड चेन’ रक्षा रणनीति में एक नया चरण उभर कर सामने आया है। इसके साथ ही अन्य विकसित सैन्य परिदृश्य भी देखने को मिल रहे हैं। पहला, रेसोल्यूट ड्रैगन २०२६। टोक्यो और वाशिंगटन द्वारा क्युशू और ओकिनावा में आगामी मंगलवार तक नौ हजार सैनिकों के साथ किया गया यह अभ्यास जापान के दक्षिण-पश्चिमी द्वीपों की रक्षा को लक्षित करता है। दूसरा, वेलियंट शील्ड २०२६। पूर्वी दिशा में गुआम, उत्तरी मरियाना द्वीपसमूह और आसपास के जलक्षेत्रों में लगभग दस हजार सैनिक बुधवार तक इस अभ्यास में सम्मिलित थे। इसमें अमेरिकी सेना के ‘टाइफून’ मध्यम दूरी की मिसाइल प्रणाली का पहला तैनाती अभ्यास भी शामिल है। तीसरा, रिम ऑफ़ द पैसिफिक। हवाई में ३१ देशों के २५ हजार से अधिक सैनिक इस द्विवार्षिक अभ्यास में भाग ले रहे हैं, जो ३१ जुलाई तक चलेगा, इसका उद्देश्य समुद्री सहयोग को मजबूत करना और ‘स्वतंत्र एवं खुला इंडो-पैसिफिक’ क्षेत्र की रक्षा सुनिश्चित करना है। चौथा, ताइवान का अभ्यास। इसी सप्ताह ताइवान ने ताओयुआन में आंतरिक ‘तत्काल युद्ध पूर्वतैयारी अभ्यास’ आयोजित किया, जिसमें एक लाख सैनिकों ने तेज परिचालन क्षमता का परीक्षण किया।
अमेरिकी रणनीति और विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार इतने सारे अभ्यासों का एक साथ होना योजनाबद्ध रणनीति है या बस संयोग, इस विषय पर विश्लेषक विभाजित हैं। लोवी इंस्टिट्यूट के ‘साउथईस्ट एशिया प्रोग्राम’ के निदेशक हंटर मार्स्टन के मुताबिक, वर्तमान संचालन में वाशिंगटन अपनी ‘फर्स्ट आइलैंड चेन’ नीति को प्राथमिकता दे रहा है। ‘फर्स्ट आइलैंड चेन’ पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर के पूर्वी किनारे के द्वीपों की एक शृंखला है, जो जापानी द्वीपसमूह और र्यू क्यू द्वीपों से शुरू होकर दक्षिण में ताइवान, फिलीपींस होते हुए ग्रेटर सुंडा द्वीपों तक फैली हुई है। बीजिंग अपनी आक्रामक समुद्री रणनीति के तहत इन जलक्षेत्रों में प्रभुत्व स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।
मार्स्टन ने ‘दिस वीक इन एशिया’ को बताया, ‘अमेरिकी पैसिफिक कमांड के लिए फर्स्ट आइलैंड चेन के सहयोगियों की सुरक्षा अमेरिकी प्रतिबद्धता की सर्वोच्च प्राथमिकता है।’ रणनीतिक जलमार्गों में शत्रु के समुद्री और हवाई नियंत्रण को रोकना लंबे समय से एशिया में अमेरिका की महत्वपूर्ण सुरक्षा नीति रही है। २०२६ की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में भी पैसिफिक क्षेत्र में इस प्रतिरोध को प्राथमिकता दी गई है।