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बढ़ती हुई निकाली गई गायों की संख्या से गौशाला पर बढ़ा बोझ

गौशाला की गायें

निकाली गई खुली घूमने वाली पशुधन के कारण किसानों की फसल को नुकसान और सड़क दुर्घटना का खतरा बढ़ने के कारण कुछ वर्षों से बांके के स्थानीय तहों ने गौशाला बनाकर गायों के संरक्षण का प्रयास शुरू किया है।

लेकिन जैसे-जैसे गौशाला भरी जा रही है, व्यवस्थापक बताते हैं कि नई समस्याएँ भी सामने आ रही हैं।

बांके के राप्ती सोनारी, नरैनापुर और डुडुवा गाउँपालिकाओं में संचालित आठ गौशालाओं में आज २६५१ से अधिक गायें आश्रित हैं।

इनमें सबसे अधिक गायें राप्ती सोनारी गाउँपालिका–२ के मंगल राधिका षदानन्द धाम में स्थित गौशाला में हैं, जिसकी क्षमता लगभग ९०० गायें रखने की है, लेकिन वहां वर्तमान में लगभग ११०० गायें हैं।

गौशाला के गाई सेवक और महंत प्रीतम दास के अनुसार, यहां अधिकांश गायें सड़कों से उद्धार की गई हैं।