समाचार सारांश
संपादकीय द्वारा पुनरावलोकित।
- काठमांडू उपत्यका ट्रैफिक पुलिस कार्यालय ने १ असार से एक माह तक ट्रैफिक जागरूकता महाअभियान चलाया है, जिसका लक्ष्य सड़क दुर्घटनाएं कम करना है।
- ट्रैफिक प्रमुख एसएसपी सुरेश काफ्ले ने सड़क दुर्घटना रोकने के लिए तकनीकी आधारित ट्रैफिक प्रबंधन और सड़क उपयोगकर्ताओं के अनुशासन की आवश्यकता बताई।
- उपत्यका ट्रैफिक पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण करने वाली मोटरसाइकिलों और ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले चालकों पर कार्रवाई तेज कर दी है।
नेपाल में जनधन का बड़ा नुकसान होने का एक प्रमुख कारण सड़क दुर्घटनाएं हैं। नेपाल विश्व में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाओं वाला देश रहा है। पिछले दशक में 24 हजार से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जा चुके हैं। पिछले पाँच वर्षों में अकेले 2,661 पैदल यात्री अपने प्राण खो चुके हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार 5 से 29 वर्ष की उम्र के बच्चों और युवाओं की मृत्यु का प्रमुख कारण सड़क दुर्घटनाओं में हुए घातक चोटे हैं। विश्वव्यापी सड़क दुर्घटना मृत्यु का 92 प्रतिशत हिस्सा निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होता है।
नेपाल में रोजाना औसतन सात लोगों की जान ले लेने वाली सड़क दुर्घटनाएं केवल मानव क्षति ही नहीं बल्कि सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी गंभीर प्रभाव डालती हैं। अधिकतर लोग दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी चालक को देते हैं, लेकिन सुरक्षित यात्रा के लिए सड़क, वाहन और उपयोगकर्ता (चालक, यात्री, पैदल यात्री) सभी पक्ष जिम्मेदार होते हैं।
इन तीनों पक्षों के सभी संबंधित को सतर्क रहने और आवश्यक कार्रवाई के लिए सरकार जिम्मेदार है। सुरक्षित यात्रा के लिए आवश्यक कानून, उनका प्रभावी संचालन, सुरक्षित वाहन व सड़क, जिम्मेदार उपयोगकर्ता तथा दुर्घटना के बाद प्रभावी उपचार और पुनर्वास अनिवार्य हैं।
काठमांडू उपत्यका ट्रैफिक पुलिस कार्यालय, रामशाहपथ ने १ असार से एक महीने तक ट्रैफिक जागरूकता महाअभियान चलाया है। उपत्यका में ट्रैफिक नियम उल्लंघन और सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण लाने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया है।
जहां पैदल यात्रियों का जेब्रा क्रॉसिंग से गुजरते हुए भी मौत का खतरा रहता है, वहीं बढ़ते यातायात दबाव, ट्रैफिक संकेतों की कमी और अवसंरचना के अभाव ने सड़कों पर चालक स्थिति को उलझन भरा बना दिया है। इस विषय पर उपत्यका ट्रैफिक पुलिस प्रमुख एसएसपी सुरेश काफ्ले से हुई बातचीत का संपादित अंश प्रस्तुत है।
आपने हाल ही में जिम्मेदारी संभाली है, इससे पहले और बाद में ट्रैफिक स्थिति को लेकर आपकी क्या अनुभूति है?
मैं काठमांडू का निवासी हूं, इसलिए पहले से यहां की ट्रैफिक समस्या पता थी। लेकिन जिम्मेदारी लेने के बाद समस्याएं और स्पष्ट रूप में दिख रही हैं। वर्तमान में विभिन्न विभागों से मिलकर समाधान की तलाश में हैं।
अभियान में कौन-कौन से कार्यक्रम शामिल हैं?
यह अभियान सड़क उपयोगकर्ताओं को रोज़ाना होने वाली दुर्घटनाओं और उनके कारणों की जानकारी देने के लिए है। हम प्रत्येक नागरिक को यह समझा रहे हैं कि कैसे निर्धारित जगहों पर क्रॉसिंग करें, आकाश-सेतु पुल और जेब्रा क्रॉसिंग का उपयोग करें और लेन अनुशासन का पालन करें।
पहले भी ऐसे अभियान हुए हैं, फिर भी नियम उल्लंघन जारी है। इसका क्या कारण है?
पहले के अधिकारियों के प्रयास सराहनीय थे। आँकड़े बताते हैं कि मरने और घायल होने वालों की संख्या में कुछ कमी आई है। हमारी आकांक्षा शून्य है। आने वाले दिनों में हमें तकनीक की मदद और नागरिकों की भागीदारी जरूरी है।
काठमांडू उपत्यका की मुख्य ट्रैफिक समस्या क्या है?
सबसे बड़ी समस्या विविध प्रकार के वाहनों का बिना नियम के चलना है। दोपहिया, चारपहिया एवं अन्य वाहन समय-स्थान अनुसार नहीं चलते, लेन अनुशासन का अभाव है और सड़क उपयोगकर्ताओं का अनुशासनहीन व्यवहार मुख्य बाधाएं हैं।
वाहनों की स्थिति का निरीक्षण आप स्वयं करते हैं?
यह यातायात विभाग की जिम्मेदारी है। हमारे पास वाहन परीक्षण के लिए सीमित तकनीक है लेकिन समन्वय बनाकर काम कर रहे हैं।
१५९० ट्रैफिक पुलिस होने के बावजूद समस्या क्यों है?
केवल भौतिक उपस्थिति से समाधान नहीं होता, तकनीक उपयोग जरूरी है। हम ‘फेसलेस ट्रैफिकिंग’ यानी तकनीक आधारित निगरानी पर जोर दे रहे हैं। इससे पुलिसकर्मियों का जोखिम भी कम होगा।
ट्रैफिक पुलिस के लिए क्या चुनौतियां हैं?
उन पर अत्यधिक काम का दबाव और जोखिम पाया जाता है। धूल, धुआं, ध्वनि प्रदूषण जैसी समस्याएं उन्हें प्रभावित करती हैं। हमने उनकी सुरक्षा के लिए मास्क, चश्मा जैसे उपकरण उपलब्ध कराए हैं।
फेसलेस ट्रैफिकिंग के लिए कौन-कौन सी तकनीक इस्तेमाल की जा रही है?
सरकार तकनीक आधारित निगरानी को बढ़ावा दे रही है। हमने एआई सम्मिलित कैमरे और नंबर प्लेट पढ़ने वाले एनपीआर कैमरे लगाए हैं, जो नियम उल्लंघन करने वालों की सहज निगरानी और कार्रवाई में मदद करते हैं।
थापाथली में ट्रैफिक पुलिस के बिना भी प्रबंधन कैसे संभव है?
कुछ चौराहों पर पूरी तरह से तकनीकी निगरानी की व्यवस्था है। कंट्रोल रूम से टीम निगरानी करती है और नियम उल्लंघन पर कार्रवाई होती है।

सभामुख की गाड़ी द्वारा नियम उल्लंघन पर जुर्माना लगाए जाने की खबरें सार्वजनिक हैं। ऐसी कार्रवाई कितनी प्रभावी है?
हम स्टंट प्रदर्शन नहीं करते। सड़क सुरक्षा सभी के लिए जरूरी है। नियम उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई होती है। सीसीटीवी निरंतर निगरानी करता है और उचित कार्रवाई होती रहती है।
नशे में गाड़ी चलाने की समस्या बढ़ रही है, खासकर स्कूल बस चालकों में?
यह सामाजिक बिमारी की तरह फैल रही है। हम लम्बी दूरी, एम्बुलेंस, कचरा वाहन, और स्कूल बस चालकों की सैम्पल जांच कर रहे हैं। कई लोगोंपर कार्रवाई हो चुकी है।
ट्रैफिक पुलिस और सड़क उपयोगकर्ताओं के बीच हो रहे अभद्र व्यवहार को कैसे रोका जाएगा?
हमने आचार संहिता लागू की है जिसमें अनावश्यक प्रश्न न पूछना, हाथ मिलाने की परंपरा रोकना, सभ्य और संयमित व्यवहार अनिवार्य है। इससे दुर्व्यवहार कम होगा।

जुर्माने को ५० हजार तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। क्या इससे नियम उल्लंघन में कमी आएगी?
जुर्माना ही एकमात्र समाधान नहीं है। सड़क नियम उल्लंघन से जीवन जोखिम में पड़ता है। जुर्माना इतना होना चाहिए कि लोग सचेत हों। जितना ज्यादा जुर्माना होगा, नियम पालन की मानसिकता बढ़ेगी।
अगर जुर्माना बढ़ा भी दिया गया तो भी नियम उल्लंघन हो रहा है, इसका क्या समाधान है?
जुर्माना के बिना भी सभी को नियम पालन की जागरूकता होनी चाहिए। सड़क पर मनुष्य का जीवन अनमोल है, धन से भी ज्यादा। इसलिए सभी से आग्रह है कि नियमों का पालन करें।
सड़क अवसंरचना और ट्रैफिक संकेतों की स्थिति क्या है?
अवसंरचना में सुधार की प्रक्रिया जारी है। हम जुर्माने को नियम पालन के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण मानते हैं। जल्द ही अवसंरचना सुधारना और नियम पालन को प्रभावी बनाना अनिवार्य होगा।
पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या योजना है?
अधिकांश दुर्घटनाएं पैदल यात्रियों की असावधानी के कारण होती हैं। हमने अभियान के दौरान आम जनता को सड़क नियम पालन को लेकर जागरूक किया है। पैदल यात्रियों को भी नियमों का पालन करना होगा।

अधिक आवाज में मोटरसाइकिल चलाने की समस्या बढ़ी है, इसे कैसे नियंत्रित किया जा रहा है?
हमें इस विषय में बहुत शिकायतें मिलती हैं। ट्रैफिक पुलिस ने उन मोटरसाइकिलों को कड़ी कार्रवाई के तहत लिया है। लगभग डेढ़ सौ मोटरसाइकिलों पर कार्रवाई हुई है। आवाज कम करने और नियम पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रयास जारी हैं।
अंत में नागरिकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
सड़क हम सबकी साझा संपत्ति है। सभी को नियमों का पालन करना होगा। पैदल यात्रियों को भी हमेशा नियमों के अनुसार और दाहिनी तरफ चलना चाहिए, जिससे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
सड़क सुरक्षा श्रृंखला-१
सड़क सुरक्षा श्रृंखला-२
