समाचार सारांश
समीक्षित एवं सम्पादकीय समीक्षा गरिएको।
- यूरोपीय संघ और चीन ने बढ़ते व्यापार असंतुलन और विवाद समाधान के लिए नए उच्चस्तरीय मंत्री स्तरीय परामर्श संयंत्र शुरू करने पर सहमति व्यक्त की है।
- ईयू ने व्यापार घाटा, निर्यात नियंत्रण तथा बौद्धिक संपदा विवादों में अक्टूबर तक ठोस नतीजे आने की कड़ी शर्त रखी है।
- चीन के सस्ते उत्पादों के अत्यधिक निर्यात से यूरोपीय औद्योगिक आधार पर प्रभाव के समाधान के लिए दोनों पक्षों ने चार कार्यसमूहों का गठन किया है।
१६ असार, काठमाडौं। व्यापार असंतुलन को नियंत्रित करने की कोशिशों के तहत यूरोपीय संघ (ईयू) और चीन ने समस्याओं के समाधान हेतु नई उच्चस्तरीय मंत्री स्तरीय संयंत्र की शुरुआत की है। ब्रसेल्स में हुई तीव्र वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने संयुक्त रूप में एक दुर्लभ बयान जारी किया।
यह 2019 के बाद पहला संयुक्त बयान है। बातचीत में ईयू के व्यापार आयुक्त मारोस सेफचोविक और चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेंटाओबीच लंबी चर्चा हुई।
दोनों पक्षों ने ‘व्यापार और निवेश परामर्श संयंत्र’ स्थापित करने पर सहमति जताई। ब्रसेल्स ने व्यापार असंतुलन, निर्यात नियंत्रण और बौद्धिक संपदा विवादों में अक्टूबर तक ‘ठोस नतीजे’ आने की कड़ी शर्त रखी है।
ईयू और चीन के बीच व्यापार असंतुलन बेहद चिंताजनक है। वर्ष 2025 में चीन के साथ व्यापार घाटा 360 अरब यूरो तक पहुंच गया था और यह बढ़ता हुआ जारी है।
ईयू के सांख्यिकी संगठन ‘यूरोस्टैट’ के अनुसार, जून 15 को जारी आंकड़ों से पता चलता है कि ईयू से चीन निर्यात की तुलना में चीन से ईयू निर्यात लगभग रोजाना 1 अरब यूरो अधिक है। मई महीने में ही ईयू का चीन के साथ व्यापार घाटा 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर चुका था।
विशेष रूप से जर्मनी का व्यापार घाटा 31.6 प्रतिशत बढ़ा है। इसी तरह वृद्धि होने पर वर्ष 2025 में यह व्यापार घाटा रोजाना लगभग 1 अरब यूरो के रिकॉर्ड से ऊपर पहुंचने की संभावना है।
यूरोप में ‘चाइना शॉक’ का प्रभाव
अधिकांश यूरोपीय देश वर्तमान में ‘चाइना शॉक’ के प्रभाव में हैं। चीन की कंपनियां सस्ते दामों पर प्रतिस्पर्धा कर यूरोपीय औद्योगिक आधार को गंभीर चुनौती दे रही हैं। ईयू नेताओं ने दो सप्ताह पहले इसे ‘चाइना शॉक 2.0’ नाम दिया है। यह प्रभाव केवल इलेक्ट्रिक वाहन और हरित ऊर्जा तक सीमित नहीं रह कर व्यापक रूप से फैल गया है।
चीन के अत्यधिक निर्यात से यूरोपीय उत्पादन क्षेत्र, ऑटोमोबाइल, रासायनिक और मशीन निर्माताओं पर दबाव बढ़ा है। पिछले अप्रैल में यूरोप में खरीदे गए प्रत्येक 10 कारों में से एक चीनी ब्रांड की थी, जो पिछले वर्ष से दोगुनी है।
यूरोप की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी ‘फॉक्सवैगन’ ने चीनी प्रतिस्पर्धा और इलेक्ट्रिक वाहन विकास खर्चों के कारण अपने लाभ में कमी देख जर्मनी में चार प्लांट बंद करने और करीब एक लाख रोजगार में कटौती करने की तैयारी शुरू कर दी है।
चीन में यूरोपीय चैंबर ऑफ कॉमर्स सहित कई उद्योग समूहों के अनुसार, चीन से आने वाले अत्यधिक निर्यात ने कई ईयू कारखानों को जोखिम में डाल दिया है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि चीन में भारी सरकारी सब्सिडी के कारण उत्पादन बढ़ा है, जिससे यूरोप में चीनी सामानों की बाढ़ आ गई है।
निगरानी संयंत्र और कार्यसमूह
ब्रसेल्स वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने व्यापार संतुलन, निर्यात नियंत्रण, बौद्धिक संपदा अधिकार और विश्व व्यापार संगठन सुधार पर केन्द्रित चार प्रारंभिक कार्यसमूहों की स्थापना की है। पहला कार्यसमूह व्यापार प्रवाह की निगरानी प्रणाली बनाएगा।
यह संयंत्र दोनों पक्षों द्वारा प्रदान किए गए आंकड़ों के अलावा एक समान व्यापार आंकड़ा आधारित होगा और आयात में अत्यधिक वृद्धि को नियंत्रित करेगा। यदि आयात ‘पीला’ या ‘लाल’ क्षेत्र में पहुंचता है, तो तत्काल राजनीतिक स्तर पर चर्चा की जाएगी।
सेफचोविक के अनुसार, साझा आंकड़ा बनाना इस संयंत्र का मुख्य उद्देश्य है। आने वाले दिनों में अपेक्षित परिणाम और कार्ययोजना तैयार की जाएगी। पहला मूल्यांकन सितंबर में होगा।
अक्टूबर की समयसीमा और चेतावनी
सेफचोविक ने वार्ता को ‘गहन, केंद्रित और रचनात्मक’ बताया। उन्होंने कहा कि अगर अक्टूबर तक सार्थक प्रगति नहीं हुई, तो ईयू को तत्काल कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा, ‘चीनी पक्ष अब यूरोपीय चुनौतियों को बेहतर समझने लगा है। हमें अपने औद्योगिक आधार को सुरक्षित करना और समान प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करनी होगी।’
चीन के मंत्री वांग ने दुर्लभ खनिज और स्थायी मैग्नेट पर निर्यात नियंत्रण के प्रभाव नहीं होने का आश्वासन दिया, जिसे सेफचोविक ने स्वागत किया। हालांकि कुछ चीनी वृत्त ईयू के ‘चाइना शॉक’ विरोधी कदमों के प्रति सतर्क हैं।
चीनी सरकारी चैनल CCTV से जुड़ी माइक्रो-साइट युयूआंतिया ने यूरोप के साथ व्यापार बाधित होने के बावजूद बीजिंग इसे सहजता से संभाल सकता है, ऐसा दावा किया है।
भविष्य की रणनीतियां
‘पोलिटिको’ के अनुसार यूरोपीय आयोग ने चीन के साथ द्विपक्षीय रणनीति अपनाई है। पहली, व्यापार संरक्षण प्रणाली को मजबूत करना, जिसमें स्थानीय व्यवसायों को प्राथमिकता देना और हुहाओ जैसे चीनी टेक कंपनियों को नेटवर्क से बाहर रखने के प्रस्ताव हैं।
इसके अलावा ‘विविधता उपकरण’ के तहत यूरोपीय कंपनियों को चीन पर निर्भरता कम करने के लिए कम से कम तीन आपूर्तिकर्ताओं को रखना होगा और ‘आर्थिक दबाव विरोधी उपकरण’ को सक्रिय किया जा सकता है। हालांकि, सदस्य देशों के बीच मतभेद और कानूनी जटिलताओं के कारण इन कदमों की प्रभावकारिता अक्टूबर के परिणाम पर निर्भर करेगी।
