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कार्यवाहक गवर्नर पंडित ने मौद्रिक नीति से आर्थिक विकास में सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया

नेपाल राष्ट्र बैंक के कार्यवाहक गवर्नर किरण पंडित ने कहा है कि आगामी मौद्रिक नीति को उच्च आर्थिक विकास के सरकारी लक्ष्य को समर्थन देना चाहिए। उन्होंने मौद्रिक नीति बनाते समय मुद्रास्फीति नियंत्रण और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला। पंडित ने वित्तीय क्षेत्र में बढ़ती डिजिटल चुनौतियाँ और तकनीकी जोखिम प्रबंधन को मौद्रिक नीति के प्रमुख एजेंडे में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। १६ असार, काठमाडौं।

पंडित ने “आर्थिक विकास को गति देने में मौद्रिक नीति की भूमिका” विषयक कार्यक्रम में कहा कि वित्त नीति और मौद्रिक नीति स्वाभाविक रूप से परस्पर संबंधित हैं, हालांकि कुछ परिस्थितियों में इनके बीच संघर्ष भी देखने को मिलता है। उनका कहना है कि दोनों नीतियाँ समन्वित तरीके से आगे बढ़नी चाहिए। उच्च आर्थिक विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मौद्रिक नीति को समर्थन देना आवश्यक है, साथ ही मुद्रास्फीति, वित्तीय स्थिरता और अन्य आर्थिक संकेतकों को उचित सीमाओं के भीतर बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

पंडित ने स्पष्ट किया कि राष्ट्र बैंक अपने उद्देश्य, मौद्रिक नीति संचालन के आधार और कार्यप्रणाली के अनुरूप नीति निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि बाजार में मौद्रिक नीति के प्रति उच्च उम्मीदें बन गई हैं, जिन्हें सावधानी से प्रबंधित करना आवश्यक है। साथ ही, उन्होंने नियामकीय सुधार और मौद्रिक नीति के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझने पर भी जोर दिया।

पंडित ने वित्तीय क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रही डिजिटल चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। फिनटेक, ओपन बैंकिंग, डिजिटल लेनदेन की निगरानी और तकनीकी जोखिम प्रबंधन जैसे मुद्दे अब मौद्रिक नीति और नियामकीय संरचनाओं के महत्वपूर्ण एजेंडों में शामिल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए विषयगत समीक्षा और निरंतर संवाद की आवश्यकता है। पंडित ने नीति निर्माण की प्रक्रिया और जनता के बीच के दूरी को कम करने पर भी बल दिया। विशेष रूप से युवाओं, किसानों और निचले वर्ग के वास्तविक आवश्यकताओं एवं समस्याओं को नीति निर्माण तक पहुँचाने में कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने इस दूरी को कम करने में संचार माध्यमों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।