समाचार सारांश समीक्षा के बाद तैयार। अमेरिकी मनोवैज्ञानिक हावर्ड गार्डनर ने सन 1983 में बहु-बुद्धिमत्ता सिद्धांत प्रस्तुत करते हुए बुद्धिमत्ता को केवल परीक्षा या आईक्यू तक सीमित नहीं रखना चाहिए, यह तर्क प्रस्तुत किया। हावर्ड गार्डनर एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक, शिक्षाविद् और शोधकर्ता हैं। उनका जन्म 11 जुलाई 1943 को अमेरिका के पेन्सिल्वेनिया राज्य में हुआ था। शिक्षा और मानव बुद्धि के अध्ययन में उनका अमूल्य योगदान है। गार्डनर ने लंबे समय तक हार्वर्ड विश्वविद्यालय से जुड़कर अनुसंधान किया है।
गार्डनर ने परंपरागत रूप से बुद्धिमत्ता को केवल परीक्षा या आईक्यू से मापना अपर्याप्त बताया। उनके अनुसार हर व्यक्ति में विभिन्न प्रकार की क्षमताएं और प्रतिभाएं होती हैं। गार्डनर के सिद्धांत की शुरुआत सन 1983 में हुई जब उन्होंने बहु-बुद्धिमत्ता सिद्धांत प्रस्तुत किया। उन्होंने 8 विभिन्न प्रकार की बुद्धिमत्ताओं की पहचान की और बताया कि ये बुद्धिमत्ताएं विभिन्न संयोजनों में मौजूद होती हैं। प्रत्येक बुद्धिमत्ता यह समझाती है कि व्यक्ति सूचना को कैसे संसाधित करता है और सीखने में कैसे सहायता प्राप्त करता है।
आठ बहु-बुद्धिमत्ताओं का सिंहावलोकन
1. भाषाई बुद्धिमत्ता: भाषा का प्रभावी उपयोग करने, बोलने, लिखने और अभिव्यक्ति में सक्षम होना।
2. तार्किक-गणितीय बुद्धिमत्ता: समस्या समाधान, तर्क और गणितीय अवधारणाओं में दक्षता।
3. दृश्य-स्थानिक बुद्धिमत्ता: कला, चित्र, आकृति, वास्तुकला सहित क्षेत्रों के स्थान और कल्पना की समझ।
4. शारीरिक-गतिशील बुद्धिमत्ता: शरीर को उपयोग में लाकर सीखना और कार्य करना।
5. सांगीतिक बुद्धिमत्ता: संगीत, ताल और रचनात्मकता को समझना तथा बनाना।
6. अंतर्वैयक्तिक बुद्धिमत्ता: दूसरों की भावनाओं को समझना और सहयोग करना।
7. आत्म-व्यक्तिगत बुद्धिमत्ता: आत्म-चेतना, आत्म-प्रतिबिंब क्षमताएं तथा अपनी भावनाओं और प्रेरणाओं की गहरी समझ।
8. प्राकृतिक बुद्धिमत्ता: प्रकृति, वनस्पति, जीव-जंतुओं और पर्यावरण की समझ।
कक्षा में बहु-बुद्धिमत्ता का उपयोग – व्यक्तिगत शिक्षा – विविध शिक्षण विधियां – सहयोगी और सहपाठी शिक्षण – समावेशिता और समानता को बढ़ावा – छात्रों को प्रत्यक्ष रूप से शामिल कर प्रेरणा देना – समग्र विकास को प्रोत्साहित करना। कक्षा में बहु-बुद्धिमत्ता को कैसे लागू करें? विभिन्न बुद्धिमत्ताओं को संबोधित करने वाली विधियों को अपनाना लाभकारी होता है। छात्रों को अन्य बुद्धिमत्ताओं को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए अपनी शक्तियों का उपयोग करने का मार्गदर्शन करना उचित होता है।
पाठ्यक्रम योजना बनाते समय समूह कार्य, शारीरिक गतिविधियाँ, दृश्य और व्यावहारिक सीखने को शामिल किया जा सकता है। प्रत्येक छात्र की क्षमता जानकर सहयोगी माहौल बनाना आवश्यक है। छात्रों को शिक्षा प्रक्रिया में सहभागी बनाकर उनकी सफलता के लिए प्रेरित करना चाहिए। शिक्षा क्षेत्र में इसका महत्त्व यह है कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की शैली और क्षमता अलग होती है, ऐसी सोच को स्थापित करना। शिक्षण को छात्र-केंद्रित बनाना। केवल परीक्षा तक सीमित रहकर नहीं बल्कि विभिन्न क्षमताओं की पहचान के लिए प्रेरित करना। विद्यालयों में विभिन्न शिक्षण पद्धतियों को प्रोत्साहित करना। गार्डनर का सिद्धांत यह स्वीकार करता है कि व्यक्ति अलग-अलग तरीकों से सीखते हैं और शिक्षा में विविध निर्देश को बढ़ावा देता है। यह सिद्धांत स्पष्ट करता है कि मानव क्षमता केवल अंक और आईक्यू तक सीमित नहीं है। बच्चों की व्यक्तिगत क्षमताओं की पहचान कर उनके समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह शिक्षकों को विभिन्न बुद्धिमत्ताओं को संबोधित करने और अधिक समावेशी शिक्षा वातावरण बनाने के लिए प्रेरित करता है। (लेखिका पूजा खड्का, शिक्षिका, लमही-6, दाङ के गोरखा मॉडल सेकेंडरी स्कूल में कार्यरत हैं)
