खामेनी की अंतिम संस्कार में अमेरिका विरोधी नारे, ईरान बदल रहा है सैन्य रणनीति
२१ असार, काठमाडौं । ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनी की राजकीय अंतिम संस्कार समारोह में राजधानी तेहरान की सड़कों पर असाधारण जनसैलाब देखा गया, जैसा कि ईरानी संवाद माध्यमों ने बताया। छ दिन तक चलने वाले इस अंतिम संस्कार कार्यक्रम के पहले दिन शनिवार सुबह से ही लाखों लोग अंतिम दर्शन के लिए तेहरान के ‘इमाम खुमैनी ग्रैंड मस्जिद’ में इकठ्ठा हुए थे। फरवरी २८ के हमले में खामेनी समेत मारे गए उनके परिवार के अन्य सदस्यों के ताबूत ईरानी झंडे में लिपटे हुए मंच पर रखे गए थे। अपने नेता और परिवार के सदस्यों के ताबूत को देख लाखों श्रद्धालु भावुक होकर रो पड़े। इस दौरान आक्रोशित भीड़ ने लगातार ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ और ‘इजरायल पर ईश्वर की सजा’ जैसे नारों के साथ विरोध के पोस्टर भी प्रदर्शित किए। अधिकारियों के अनुसार यह अब तक का सबसे बड़ा जनसमूह माना जा रहा है, और पूरे सप्ताह के कार्यक्रम में लगभग १.५ से २ करोड़ लोग शामिल होने की उम्मीद है।
खामेनी की अंतिम यात्रा ६ जुलाई को तेहरान से शुरू होगी। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर ७ जुलाई को कोम (ईरान), ८ जुलाई को इराक के नजफ और कर्बला होते हुए अंततः ९ जुलाई को ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में स्थित ‘इमाम रजा दरगाह’ परिसर में राजकीय सम्मान के साथ समाधि दी जाएगी। शिया संप्रदाय के कुल १२ पवित्र इमामों में आठवें इमाम ‘इमाम रजा’ ही ऐसे इमाम हैं जिन्हें ईरान की मिट्टी में अंतिम सम्मान दिया गया है। बाकी सभी इमाम सऊदी अरब या इराक में दफन हैं। तत्कालीन शासक द्वारा जहर देकर मारे जाने के बाद इमाम रजा को दफनाया गया इस स्थान का नाम ‘मशहद’ (शहीद का स्थान) पड़ा, जो शिया मुस्लिमों के लिए मक्का, मदीना और कर्बला के बाद सबसे पवित्र स्थल माना जाता है।
इस संवेदनशील समय में ईरान ने अमेरिका के साथ जारी अप्रत्यक्ष शांति वार्ता को तत्काल प्रभाव से पुनः स्थगित कर दिया है। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षकों को प्रमुख परमाणु केंद्रों: फोर्डो, नतान्ज और इस्फहान के निरीक्षण अनुमति देने से ईरान ने स्पष्ट तौर पर इनकार कर दिया है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान को ‘मानवीय आधार’ पर अंतिम संस्कार पूरा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। इस अवधि के बाद ईरान को अमेरिकी शर्तें माननी पड़ेंगी, ट्रम्प ने कहा।
खामेनी के निधन के बाद ईरान ने अपनी सुरक्षा और सैन्य नीति में व्यापक बदलाव किया है। नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनी के नेतृत्व में तेहरान ने अब पहले से कहीं अधिक आक्रामक नीति अपनाने के संकेत दिए हैं। भू-राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ईरान में सत्ता परिवर्तन करने में असफल हुए, लेकिन ईरान की रणनीति में पूर्ण बदलाव आ चुका है। ईरान ने अब होर्मुज जलसंधि को अपना सबसे बड़ा दबाव बनाने वाला हथियार बनाने की रणनीति अपना ली है। ईरान का स्पष्ट संदेश है – ‘यदि ईरान में शांति नहीं रही तो विश्व के लिए आवश्यक तेल की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी नहीं रहने दी जाएगी।’ (एजेंसियों के सहयोग से)





