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तरकारियों को कैसे बनाएं बिना विषाक्त पदार्थ के? धोने के 3 सही तरीके

बाजार में रखी चमकीली दिखने वाली तरकारियाँ असल में विषाक्त पदार्थों से भरी होती हैं। इन्हें सामान्य पानी से थोड़ा धोने मात्र से शरीर में विषाक्त पदार्थ प्रवेश कर सकते हैं। ये रासायनिक विषाक्त पदार्थ लम्बे समय में कैंसर, तंत्रिका प्रणाली की समस्याएं, प्रजनन में कठिनाई, और प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने का खतरा बढ़ाते हैं।

फर्सी का मुन्टा, राय के साग, टमाटर, खीरा जैसी दैनिक उपयोग की तरकारियों में विषाक्त पदार्थों की मात्रा बहुत बढ़ गई है। इसलिए हमारे रोज़ के खाने में विषाक्तता बढ़ती जा रही है।

यह गंभीर क्यों है?

तरकारियों में विषाक्त पदार्थ डालने की प्रक्रिया अत्यंत चिंताजनक है। इससे वे तरकारियाँ स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक हो जाती हैं। बाजार में हरी-भरी और आकर्षक दिखने वाली ये तरकारियाँ धीरे-धीरे शरीर को विषैला बनाती हैं और विभिन्न बीमारियाँ उत्पन्न करती हैं।

बाजार से लाई गई तरकारियों को वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए अनुसार धोने से इन्हें काफी हद तक सुरक्षित बनाया जा सकता है।

कैसे धोएं?

तरकारी पकाने से पहले इन्हें अच्छी तरह से बहते हुए पानी में रगड़कर धोना चाहिए। इस दौरान ठंडा पानी ही उपयोग करें। विज्ञान द्वारा प्रमाणित तीन भिगोने की विधियाँ अपनाएं, जो तरकारी की सतह पर मौजूद विषाक्त पदार्थों को निष्क्रिय कर देती हैं।

1. नमक पानी में भिगोना

ठंडे पानी में प्रति लीटर एक चम्मच नमक मिलाकर अच्छी तरह घोल बनाएं। उसमें पहले से धोई गई तरकारियों को लगभग 10-15 मिनट के लिए भिगो दें। नमक पानी के घोल के ऑस्मोटिक प्रेशर और आयोनिक इंटरैक्शन से विषाक्त पदार्थ तरकारी से अलग होकर पानी में आ जाते हैं और धो दिए जाते हैं।

इस विधि से हटाए जाने वाले विषाक्त पदार्थों में ऑर्गानोफॉस्फेट, क्लोरोपाइरिफॉस, मालाथियन, सिंथेटिक पाइरथ्रॉइड जैसे साइपरमेथ्रीन शामिल हैं।

यह विधि अधिकांश संपर्क में आने वाले कीटनाशकों को हटाने में सहायक है। गोभी, बंद गोभी, ब्रोकली और विभिन्न साग-भाजी में इसे उपयोग किया जा सकता है।

2. सिरका (विनेगर) के घोल में भिगोना

इसके लिए लगभग तीन भाग ठंडे पानी में एक भाग सिरका मिलाएं। फिर तरकारी और फल-फूल को 10-15 मिनट के लिए इस घोल में डुबोकर रखें और फिर अच्छी तरह धो लें।

सिरका एसिडिक प्रकृति का होता है, जो एसिड हाइड्रोलिसिस प्रक्रिया द्वारा कीटनाशकों और फफूंद नाशक दवाओं की रासायनिक संरचना में मौजूद इस्टर बंध को तोड़कर विषाक्त पदार्थों को निष्क्रिय कर देता है।

सिरके का घोल चमकदार दिखने वाले फलों की ऊपरी परत को पिघला देता है और उसमें मौजूद विषाक्त पदार्थों को भी हटाने में मदद करता है।

इस विधि से हटाए जाने वाले रसायनों में डायथियो कार्बामेट, मैनकॉव, ग्लाइफोसेट जैसे शामिल हैं। इसकी मदद से टमाटर, खीरा, भिंडी, अंगूर, सेब आदि को विषाक्त मुक्त बनाया जा सकता है।

3. बेकिंग सोडा का उपयोग

यह खाद्य उपयोगी सोडा है जिसका रासायनिक नाम सोडियम बाइकार्बोनेट है। प्रति लीटर पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा घोलकर अच्छी तरह मिलाएं।

फिर इसमें तरकारी को 10-15 मिनट के लिए डुबो दें। सोडियम बाइकार्बोनेट क्षारीय प्रकृति का होता है और यह क्षारीय हाइड्रोलिसिस प्रक्रिया से इस्टर और फॉस्फेट बंधों को एसिडिक हाइड्रोलिसिस से भी अधिक प्रभावी ढंग से तोड़ता है।

खाद्य सोडा का घोल क्लोरोपाइरिफॉस, मालाथियन और सिस्टमेटिक कीटनाशक जैसे इमिडाक्लोप्रिड को हटाने में मदद करता है। यह बहुआयामी विधि है और टमाटर, भिंडी, करेला, गाजर, मूली, गोभी आदि में उपयोगी है।

ये तीनों विधियाँ केवल तरकारी की सतह पर मौजूद विषाक्त पदार्थों को ही हटाती हैं। लेकिन, जड़ से अंदर तक पहुच चुके प्रणालीगत विषाक्त पदार्थों को ये विधियाँ नहीं हटा सकतीं। इसलिए सबसे अच्छा उपाय है विषाक्त मुक्त तरीकों से उत्पादित तरकारी और फल-फूल का सेवन करना।