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संविधान संशोधन बहसपत्र बनाने वाली कार्यदल से विपक्ष का अलगाव: संशय या असहयोग का संकेत?

नेकपाक नेताओं के साथ चर्चा करते कार्यदल

तस्वीर स्रोत, PMO Nepal

तस्वीर का कैप्शन, कार्यदल ने पूर्वप्रधानमंत्रियों समेत विभिन्न स्तरों और समूहों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की थी

प्रधानमंत्री वलेन्द्र शाह ‘बालेन’ के राजनीतिक सलाहकार असीम शाह के नेतृत्व में गठित संविधान संशोधन बहसपत्र तैयार करने वाली कार्यदल से चार विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने एक साथ अलग होने की घोषणा की, लेकिन कार्यदल के एक सदस्य ने बताया कि वे उपलब्ध दस्तावेजों के साथ असार माह के अंत तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं।

“हम अंतिम चरण में थे। कुल १२४ बिंदुओं तक सीमित होकर जिस किसी भी बिंदु पर सहमति होती, उस पर संशोधन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और जहां सहमति नहीं होती, उन विषयों को बहस के लिए रखने हेतु रिपोर्ट बनाने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन अब उपलब्ध तथ्यों, हमारे बिंदुओं और प्राप्त सुझावों को समेटकर रिपोर्ट बनाएंगे,” राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के सांसद एवं कार्यदल सदस्य मोहनलाल आचार्य ने बताया।

उन्होंने कहा कि अंतिम समय में सवाल उठाते हुए कार्यदल से अलग होने वाले विपक्षी प्रतिनिधियों की मंशा पर उन्हें संशय हुआ है।

असार २२ तारीख को एक विज्ञप्ति जारी करते हुए नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के देव गुरुङ, जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) के सुरेन्द्र झा, राष्ट्रीय जनमोर्चा (राजमो) के मनोज भट्ट और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी (लोसपा) के लक्ष्मणलाल कर्ण ने कार्यदल के ‘उद्देश्य और प्रक्रिया’ पर सवाल उठाकर अलग होने की जानकारी दी थी।

कार्यदल की शुरुआत नौ दलों के प्रतिनिधियों के साथ हुई थी, जिसमें नेपाली कांग्रेस शुरू से शामिल नहीं थी, जबकि नेकपा एमाले के प्रतिनिधि भी कुछ समय बाद अलग हो गए थे।