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प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था को लेकर दिखाया गंभीरता, निजी क्षेत्र के साथ औपचारिक संवाद की शुरुआत की

२४ असार, काठमाडौँ । मंत्रियों को उद्योगी-व्यवसायियों से मिलने से रोकने के निर्देश जारी किए जाने के बीच, प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह ने निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों को औपचारिक चर्चा के लिए बुलाना शुरू किया है। अर्थव्यवस्था के प्रति गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री शाह ने उद्योगी-व्यवसायियों को स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया है। २३ और २४ भदौ को हुए जनजी आंदोलन के दौरान निजी क्षेत्र पर भी हमले हुए थे। निजी निवेश वाले व्यापार–व्यवसाय को तोड़फोड़ और आगजनी से नुकसान पहुंचने के बाद वहाँ के व्यवसायी चिंतित थे।

फागुन २०८२ में हुए निर्वाचन में राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ने बहुमत पाकर सरकार बनाई थी। सरकार बनने के बाद उद्योगपतियों के खिलाफ विभिन्न आधारहीन कार्रवाइयों ने पारदर्शिता कम की और निजी क्षेत्र की आशंकाएँ बढ़ी। सरकार संवाद के बजाय दबाव और धरपकड़ करता रहा जिससे उद्योगपतियों का मनोबल कमजोर हुआ। निजी क्षेत्र के साथ उचित व्यवहार की आवश्यकता पर व्यवसायियों में द्विविधा थी, जिससे वे निवेश बढ़ाने या घटाने का स्पष्ट निर्णय नहीं कर पा रहे थे। लेकिन, सरकार गठन के तीन माह से अधिक समय बाद बुधवार को प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र की छाता संस्थाओं के प्रतिनिधियों को अपने कार्यालय में बुलाकर चर्चा की, जिससे निजी क्षेत्र सकारात्मक हुआ है।

पहले मंत्रिमंडल के सदस्यों को उद्योगी-व्यवसायियों से मिलने का मार्ग अवरुद्ध करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री ने खुद निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों से मिलाकर उन्हें उत्साहित किया है, ऐसा एक व्यवसायी ने बताया। सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए ७ प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य रखा है। इसके लिए निजी क्षेत्र का सहयोग अत्यंत आवश्यक होने के कारण प्रधानमंत्री ने देर से ही सही, निजी क्षेत्र के साथ रचनात्मक साझेदारी खोजनी शुरू की है। अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र का हिस्सा ८० प्रतिशत से अधिक है और इस स्थिति में उद्योगी-व्यवसायियों से दूरी बनाकर काम चलाना संभव नहीं है, यह प्रधानमंत्री ने समझ लिया है।

‘निजी क्षेत्र को विश्वास में लेकर आगे बढ़ना नहीं तो अर्थव्यवस्था सुधार संभव नहीं है, यह सरकार समझ चुकी है,’ वह व्यवसायी बोले। ‘प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत ने निजी क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न की है।’ उद्योगी-व्यवसायियों पर किए गए धरपकड़ के विषय में भी प्रधानमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया है कि डरने की कोई बात नहीं। ‘व्यापारियों से मिलने से रोकने वाले’ सरकारी सर्कुलर जारी होने के दौरान भी प्रधानमंत्री शाह ने निजी क्षेत्र से सीधे मिलना शुरू किया है, जिसे उद्योगी आइसब्रेक की तरह ले रहे हैं। नेपाल उद्योग परिसंघ के महानिर्देशक घनश्याम ओझा ने कहा कि प्रधानमंत्री की सरकार निजी क्षेत्र के प्रति सकारात्मक नजर रखती है।

‘प्रधानमंत्री ने व्यवसायियों से भी आग्रह किया कि वे समझाएं कि सरकार निजी क्षेत्र को सकारात्मक दृष्टि से देख रही है,’ उन्होंने कहा। ‘देश निर्माण के मुख्य साझेदार निजी क्षेत्र ही हैं, यह सरकार को स्पष्ट है। साथ ही अब लगभग सभी व्यवसायियों को अनावश्यक रूप से गिरफ्तार या जेल में डालने की स्थिति नहीं है, निजी क्षेत्र के प्रति सकारात्मक व्यवहार किया जाएगा, डरने की जरूरत नहीं है।’

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि देश की आर्थिक गतिविधियों को सशक्त और प्रभावी बनाने, उद्योग-व्यवसाय चलाने को आसान बनाने और निवेश अनुकूल वातावरण विकसित करने के उद्देश्य से ये बातचीत हुई है। बड़ी नीतिगत तथा प्रक्रियागत अड़चनों को दूर करते हुए निजी क्षेत्र के मनोबल को बढ़ाना, रोजगार सृजन और उत्पादन वृद्धि पर चर्चा केंद्रित रही। प्रधानमंत्री शाह ने देश के आर्थिक विकास, निवेश विस्तार, रोजगार सृजन और उत्पादन वृद्धि में निजी क्षेत्र को सरकार का महत्वपूर्ण सहयोगी माना है और उद्योगी-व्यवसायियों के व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए सरकार तैयार है। उन्होंने औद्योगिक एवं निजी क्षेत्रमैत्री वातावरण के लिए आवश्यक नीतिगत, कानूनी और प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।