अर्थ मंत्रालय द्वारा संशोधन और निरस्त किए जाने वाले एक दर्जन कानूनों का विवरण
अर्थ मंत्रालय ने संविधान की भावना और संघीय शासन व्यवस्था के अनुरूप १५ पुराने वित्तीय कानूनों को निरस्त करने तथा ३ कानूनों में संशोधन करने के लिए विधेयक संसद में दायर किया है। इस विधेयक में मूल्य वर्धित कर, आयकर और सीमा शुल्क अधिनियमों में आवश्यक सुधार किए जाने, परिवहन साधनों में जीपीएस लगाकर राजस्व चुहावट नियंत्रण को प्रभावी बनाने का प्रावधान है। निरस्त किए जाने वाले कानूनों से संबंधित जांच-पड़ताल और मामले अब राजस्व जांच विभाग से आंतरिक राजस्व विभाग, सीमा शुल्क विभाग समेत अन्य संबंधित संस्थाओं को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया मंत्रालय द्वारा शुरू की गई है। (२६ असार, काठमाडौं)
अर्थ मंत्रालय ने कुछ पुराने वित्तीय कानूनों के संशोधन और निरस्तीकरण के लिए विधेयक संसद में प्रस्तुत किया है। मंत्रालय का कहना है कि उन कानूनी और संस्थागत प्रावधानों को निरस्त किया जाएगा जो संविधान की भावना के अनुरूप नहीं हैं या वर्तमान संघीय शासन प्रणाली से असंगत हैं। इसका उद्देश्य कानूनी दुहरा प्रभुत्व समाप्त करना एवं कम समय और लागत में प्रभावी सार्वजनिक सेवा प्रदान करना है, जिससे मंत्रालय को उम्मीद है।
मंत्रालय ने प्रादेशिक विकास योजना (कार्यान्वयन) कानून २०१३, नेपाली मुद्रा के प्रचलन को बढ़ावा देने वाला कानून २०१४, आयकर दस्तुर कानून २०१९, राजस्व चुहावट (जांच और नियंत्रण) कानून २०५२, वित्तीय मध्यस्थता संबंधित कानून २०५५ तथा राजस्व चुहावट (जांच और नियंत्रण) नियमावली २०७० को निरस्त करने की तैयारी कर रहा है। इसके अतिरिक्त मूल्य वर्धित कर कानून २०५२, आयकर कानून २०५८ और सीमा शुल्क कानून २०८२ में संशोधन प्रस्तावित हैं।
अर्थ मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने १३ चैत २०८२ को पद ग्रहण करते समय राजस्व जांच विभाग समेत १५ कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की थी तथा इसके लिए एक कार्यदल गठित करने का निर्णय लिया था। यह निर्णय पूर्व अर्थ मंत्री रामेश्वर खनाल के नेतृत्व में गठित उच्च स्तरीय आर्थिक सुधार सिफारिश आयोग की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसे तत्कालीन एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली की सरकार ने गठित किया था।





