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सदाचार नीति: नियंत्रण की कोशिश या सुशासन स्थापित करने का प्रयास?

प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह ने मार्च में राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में पद और गोपनीयता की शपथ ली थी

तस्वीर स्रोत, RSS

सरकार द्वारा नागरिकों के साथ सरकारी, निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों को ‘अनुशासन में बांधने और सुशासन के लिए जिम्मेदार बनाने’ हेतु लाई गई राष्ट्रीय सदाचार नीति के कार्यान्वयन के आधार पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं।

पिछले सप्ताह मंत्रिपरिषद ने नैतिकता, व्यावसायिक निष्ठा और ईमानदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रभक्ति, निष्ठा और नागरिक सहभागिता सहित आठ मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित सदाचार नीति को स्वीकृति दी थी।

इस नीति में गैरसरकारी क्षेत्र, अंतर्राष्ट्रीय संघ/संस्थाएं तथा कूटनीतिक क्षेत्र के निकायों के लिए कड़ाई करने वाले कुछ प्रावधान भी रखे गए हैं।

एक पूर्व कानून मंत्री के अनुसार, नीति के अधिकांश प्रावधान वर्तमान कानूनों में ही मौजूद हैं, अत: नई नीति लाने के बजाय मौजूदा कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर देना उचित होगा।

सरकार सदाचार नीति के क्रियान्वयन के लिए अलग से कानून और नियमावली बनाने तथा विभिन्न निकायों के लिए सदाचार संहिता जारी करने की योजना बना रही है।