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युवा दाता के अंडों का उपयोग करने पर भी 49 वर्ष की उम्र में महिलाओं की प्रजनन क्षमता में निर्णायक बदलाव आता है

शेरोन मार्शल
तस्वीर का कैप्शन, सन् २०१८ में आईवीएफ उपचार के माध्यम से अपनी बेटी बेट्सी को जन्म देते हुए शेरोन मार्शल 46 वर्ष की थीं

कम उम्र के डिम्ब दाताओं से प्राप्त अंडों का उपयोग करने पर भी उम्रदराज महिलाओं में प्रजनन उपचार (फर्टिलिटी ट्रीटमेंट) की सफलता की संभावना कम होने वाला एक नया शोध सामने आया है।

विशेष रूप से 49 वर्ष के बाद ऐसे उपचार की सफलता दर उल्लेखनीय रूप से घटती देखी गई है।

1,774 महिलाओं पर किए गए अध्ययन के विशेषज्ञों ने बताया कि ये निष्कर्ष डिम्ब दान से मिली अंडियां प्रजनन की ‘जैविक घड़ी’ को पूरी तरह ‘रिसेट’ नहीं कर सकतीं, यह धारणा चुनौती देते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि इससे अधिक आयु वाले दंपतियों को उपचार से हतोत्साहित नहीं होना चाहिए।

अध्ययन में 49 वर्ष या उससे ऊपर की महिलाओं में 35 से 40 वर्ष की आयु वर्ग वाली महिलाओं की तुलना में गर्भपात का जोखिम दोगुना पाया गया। साथ ही उनकी गर्भधारण की संभावना भी कम पाई गई।

विशेषज्ञों के अनुसार गर्भाशय की आंतरिक परत में उम्र के साथ होने वाले बदलाव इसका कारण हो सकते हैं और संभव है कि भविष्य में इसके उपचार किए जा सकें।