समाचार सारांश
समीक्षित संस्करण।
- धरान उपमहानगरपालिका ने सगरमाथा आरोहण सफलतापूर्वक पूरा करने वाली पहली मारवाड़ी महिला प्रीति रातेरिया अग्रवाल को रविवार को विशेष सम्मान दिया।
- कार्यवाहक प्रमुख ऐन्द्र विक्रम बेघाले ने आरोही अग्रवाल के साहसिक कार्य को युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया और कहा कि समग्र धरानवासी उन्हें गर्व महसूस करते हैं।
- जेठ ७ को सगरमाथा सफलतापूर्वक आरोहण करने वाली ४९ वर्षीया प्रीति ने यह सम्मान अविस्मरणीय बताया और सफलता के लिए की गई कठिन परिश्रम की जानकारी दी।
२८ असार, सुनसरी। धरान उपमहानगरपालिकाने रविवार को सर्वोच्च शिखर सगरमाथा आरोही प्रीति रातेरिया अग्रवाल का सम्मान किया।
आरोही प्रीति को धरान के प्रवेशद्वार तीनकुने से नगर भ्रमण कराकर उपमहानगरपालिक में लाकर सम्मानित किया गया।
कार्यवाहक प्रमुख ऐन्द्र विक्रम बेघाले ने उन्हें सगरमाथा आरोहण करने वाली पहली मारवाड़ी महिला होने पर बधाई दी।
उन्होंने कहा कि पर्वतारोहण के साथ-साथ कला, मनोविज्ञान और वैकल्पिक उपचार के क्षेत्र में उनके बहुआयामी योगदान युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है।
उन्होंने कहा, ‘साहसी प्रीति को यह सम्मान समग्र धरान वासियों के गर्व का विषय है।’
प्रीति ने जेठ ७ को सुबह ५:५७ बजे विश्व की सर्वोच्च चोटी सगरमाथा को १२ घंटे में सफलतापूर्वक आरोहण किया था।
सम्मान ग्रहण करते हुए उन्होंने कहा, ‘धरान उपमहानगरपालिका से मिला यह सम्मान मुझे अत्यंत प्रसन्नता प्रदान कर रहा है।’
‘इस क्षण की कभी कल्पना भी नहीं की थी। धरान और धरानवासियों द्वारा दिया गया यह सम्मान मैं कभी नहीं भूलूंगी।’
४९ वर्षीय प्रीति ने बताया कि बेस कैंप से शिखर तक पहुंचने में १२ घंटे लगे जबकि नीचे उतरने में २४ घंटे का समय लगा।
धरान में जन्मीं और काठमांडू तथा मुंबई में पली-बढ़ीं प्रीति ने स्कूल के दिनों से ही एथलेटिक्स और दौड़ प्रतियोगिताओं में सक्रियता दिखाई।
मुंबई के एक कॉलेज से आर्ट और डिजाइन में स्नातक करने के बाद घर लौटने पर उन्होंने साहसिक यात्रा करने वाली पहली मारवाड़ी महिला बनने का निर्णय लिया।
उन्होंने बताया कि ‘द समिट फोर्स’ प्रा. लि. के प्रबंधन में क्लाइम्बिंग गाइड पासांग शेरपा और निमा थिन्थक शेरपा के साथ सगरमाथा आरोहण किया।
सगरमाथा आरोहण से पहले वे सन २०१२ में अन्नपूर्ण बेस कैंप और २०१३ में एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेकिंग कर चुकी थीं। इसके बाद पहली बार ६,४७६ मीटर ऊंचे मेरा पीक पर आरोहण का प्रयास किया था।
उन्होंने कहा, ‘उस समय मैं असफल रही लेकिन इसके बाद निरंतर जिम ट्रेनिंग, दौड़ और शक्ति अभ्यास जारी रखा। मई २०२४ में ६,११९ मीटर ऊंचे लोबुचे पूर्वी शिखर को सफलतापूर्वक आरोहण किया।’





