साउथ चाइना सी से संबंधित हेग फैसले को १० वर्ष पूरा होने के बावजूद बीजिंग ने इस निर्णय को शून्य और निरस्त बताते हुए खारिज कर दिया है। अमेरिका और फिलिपींस समेत १४ देशों के गठबंधन ने इस फैसले को कानूनी रूप से बाध्यकारी बताते हुए बीजिंग पर इसे लागू करने का दबाव बनाया है। चीनी विश्लेषकों ने कूटनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता निकायों के माध्यम से संवाद और व्यावहारिक सहयोग पर जोर देने की आवश्यकता बताई है। ३० असार, काठमाडौं।
हेग के साउथ चाइना सी से जुड़े फैसले को एक दशक हो चुका है। विश्लेषकों ने बीजिंग को सद्भावपूर्ण कूटनीति अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की खोज करने का सुझाव भी दिया है। लागू न होने वाले इस फैसले ने क्षेत्रीय समुद्री तनाव को कम करने में सफलता नहीं पाई है, ऐसा उनका तर्क है। वर्ष २०१६ में एक अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने यह फैसला सुनाया था। इसने साउथ चाइना सी में चीन के अधिकांश ऐतिहासिक और आर्थिक दावों को अमान्य करार दिया था। बीजिंग ने इस फैसले को दृढ़ता से अस्वीकार कर दिया था।
इस फैसले को लेकर एक सप्ताह के अंत में नई आरोप-प्रत्यारोपों के बाद ये मूल्यांकन सामने आए हैं। रविवार को इस फैसले की १०वीं वर्षगांठ थी। अमेरिका और फिलिपींस के नेतृत्व में १४ देशों के गठबंधन ने इसे ‘कानूनी रूप से बाध्यकारी और अंतिम’ बताया था। उन्होंने बीजिंग की इस फैसले को मान्यता देने या लागू करने से इनकार की निंदा की। बीजिंग ने उसी दिन इसका जवाब दिया। उसने अमेरिका के नेतृत्व में हो रही सैन्य परिचालन को साउथ चाइना सी की क्षेत्रीय शांति के लिए ‘प्राथमिक खतरा’ बताया।





