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भारत-बेलायत स्वतन्त्र व्यापार समझौता आज से लागू, लक्ज़री कार से लेकर व्हिस्की तक कीमतें घटेंगी

समाचार सारांश

संपादकीय पुनरावलोकन।

  • भारत और बेलायत के बीच स्वतन्त्र व्यापार समझौता आज से लागू हुआ, जिससे 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 120 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ने का अनुमान है।
  • समझौते के अनुसार भारत के 99 प्रतिशत उत्पाद बेलायत के बाजार में बिना किसी कर के निर्यात होंगे, जिससे भारत में लक्ज़री कार और शराब की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है।
  • भारतीय उद्योग कपड़ा, दवा और कृषि उत्पादों में नए बाजार पाएंगे, वहीं बेलायती कंपनियां हरित ऊर्जा और सूचना प्रौद्योगिकी में निवेश बढ़ाएंगी।

31 जून, काठमाडौँ। भारत और बेलायत के बीच स्वतन्त्र व्यापार समझौता (एफटीए) आज से लागू हो गया है।

समझौता लागू होते ही भारत के 99% उत्पाद बेलायती बाजार में शून्य कर पर निर्यात किए जाएंगे, जबकि बेलायत से आने वाले अधिकांश उत्पाद भारत में औसतन 3% कर दर पर आयात होंगे।

इससे भारत में स्कॉच व्हिस्की, जिन, जगुआर लैंड रोवर व रोल्स-रॉयस जैसी लक्ज़री कारें, ब्रांडेड कपड़े, कॉस्मेटिक्स और कुछ खाद्य पदार्थों के दाम कम होने की उम्मीद है।

स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाला शुल्क 150% से घटाकर 75% कर दिया गया है और अगले 10 वर्षों में इसे 40% तक कम करने की योजना है।

द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक दोगुना होकर 120 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और बेलायत के व्यापार मंत्री जोनाथन रेनोल्ड्स ने 24 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बेलायती प्रधानमंत्री किर स्टार्मर की उपस्थिति में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

बेलायत की भारत स्थित उच्चायुक्त लिंडी कैमरून ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसे “आधुनिक बेलायत-भारत साझेदारी का ऐतिहासिक क्षण” बताया है।

भारतीय उद्योगों को बड़ा लाभ

इस समझौते से भारतीय कपड़ा, होम टेक्सटाइल, आभूषण, चमड़े के सामान, इंजीनियरिंग उत्पाद, ऑटो पार्ट्स, दवा और कृषि उत्पादों को बड़ा लाभ मिलेगा।

बेलायत ने भारतीय कपड़ा और होम टेक्सटाइल पर 8 से 12 प्रतिशत तक की कर दरें हटा दी हैं, जिससे भारतीय उत्पाद बांग्लादेश और वियतनाम के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे।

भारतीय जेनेरिक दवाओं की बेलायत में पंजीकरण प्रक्रिया आसान होने के कारण दवा निर्यात बढ़ने की उम्मीद है। बासमती चावल, चाय और मसालों के निर्यात में भी वृद्धि होने का अनुमान है।

रोजगार और निवेश में वृद्धि का दावा

भारतीय सरकार का दावा है कि यह समझौता कपड़ा और चमड़ा उद्योग में बड़ी संख्या में रोजगार सृजित करेगा। लगभग 6 करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को नए बाजार और बेहतर लाभ मिलेगा।

बेलायती कंपनियां सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवा, हरित ऊर्जा, सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहन अवसंरचना में निवेश बढ़ाने की संभावना जता चुकी हैं।

भारत की पश्चिम की ओर रणनीति

भारत पहले ही यूएई, ऑस्ट्रेलिया, मॉरिशस और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ ऐसे समझौते कर चुका है। फिलहाल यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका के साथ भी ऐसे समझौतों के लिए बातचीत जारी है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अनुसार, भारत एशियाई देशों के बजाय पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार विस्तार को प्राथमिकता दे रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक बेलायत के साथ समझौता भारतीय निर्यात को यूरोपीय बाजार तक पहुंचाने में सहायता करेगा।