ढल्केवर-मुजफ्फरपुर प्रसारण लाइन के माध्यम से १६५० मेगावाट विद्युत् निर्यात बढ़ाने पर सहमति
३१ असार, काठमाडौं। नेपाल और भारत के ऊर्जा सचिवस्तरीय संयुक्त निदेशक समिति (जेएससी) ने दो अंतरदेशीय प्रसारण लाइनों के माध्यम से नेपाल से निर्यात होने वाली विद्युत् की मात्रा को १६५० मेगावाट तक बढ़ाने पर सहमति जताई है। पोखरा में बुधवार को आयोजित बैठक की अध्यक्षता नेपाल की ओर से ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय की सचिव सरिता दवाड़ी ने की, जबकि भारत की ओर से विद्युत् मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल ने नेतृत्व किया। वर्तमान में चल रही ढल्केवर–मुजफ्फरपुर ४०० केवी अंतरदेशीय प्रसारण लाइन के माध्यम से एक हजार मेगावाट विद्युत् आयात और एक हजार एक सौ मेगावाट निर्यात हो रहा है।
दोनों देशों की संयुक्त तकनीकी टीम द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, ढल्केवर–मुजफ्फरपुर और ढल्केवर–सीतामढ़ी ४०० केवी प्रसारण लाइनों के माध्यम से विद्युत् निर्यात बढ़ाने की सहमति इस बैठक में दी गई। इस प्रकार इन प्रसारण लाइनों की संयुक्त विद्युत् प्रवाह क्षमता आयात में एक हजार मेगावाट से बढ़ाकर १४०० मेगावाट और निर्यात में एक हजार एक सौ मेगावाट से बढ़ाकर १६५० मेगावाट करने पर सहमति हुई है, जो ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में उल्लेखित है।
सचिवस्तरीय बैठक से पूर्व मंगलवार को पोखरा में दोनों देशों की सहसचिवस्तरीय संयुक्त कार्यदल की बैठक हुई थी। इस बैठक की सहअध्यक्षता नेपाल की ओर से मंत्रालय के सहसचिव संदीपकुमार देव एवं भारत की ओर से विद्युत् मंत्रालय के सहसचिव पंकज कुमार ने की। बैठक में चमेलिया (नेपाल)–जौलजीवी (भारत) के बीच २२९ केवी डबल सर्किट प्रसारण लाइन के विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को भी स्वीकृति दी गई। इस परियोजना को दिसंबर २०२८ तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
नेपाल और भारत के बीच इनरुवा–न्यू पुनिया एवं दोदोधरा (न्यू लम्की)–बरेली ४०० केवी क्षमताओं वाली अंतरदेशीय प्रसारण लाइनों के निर्माण के लिए संयुक्त उपक्रम कंपनी के गठन की प्रक्रिया को भी तीव्र करने पर सहमति हुई। इन दोनों प्रसारण लाइनों के निर्माण हेतु नेपाल विद्युत प्राधिकरण और पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के बीच शेयरधारक समझौता (एसएचए) और संयुक्त उपक्रम (जेवी) समझौता संपन्न हो चुका है।
सन् २०१४ में सम्पन्न नेपाल–भारत विद्युत् व्यापार समझौते के अनुच्छेद ५ के अनुसार, समझौते के कार्यान्वयन पक्षों के समन्वय, निर्देशन तथा प्रगति की निगरानी के लिए सचिवस्तरीय समिति, संयुक्त स्टेयरिंग कमिटी एवं सहसचिवस्तरीय कार्यदल का गठन किया गया था। इन दोनों निकायों की बैठकें दो देशों में बारी-बारी से आयोजित करने पर सहमति बनी है।





