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सरकारी कार्रवाई पर मैनपावर व्यवसायियों का आक्रोश

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा।

  • विदेशी विमानस्थल का प्रयोग कर श्रमिक भेजने वाले १५६ मैनपावर कंपनियों पर वैदेशिक रोजगार विभाग ने कार्रवाई की, जिससे व्यवसायी आक्रोशित हुए।
  • व्यवसायियों ने कार्रवाई वापस न लेने पर श्रमिकों को वैदेशिक रोजगार के लिए भेजने का पूर्णतया बंद करने की चेतावनी दी है।
  • संघ के अध्यक्ष डिकबहादुर खत्री का कहना है कि, ‘यह कार्रवाई सरकारी संस्थाओं में समन्वय की कमी और व्यवसायियों के साथ अन्याय है।’

३१ असार, काठमांडू। विदेशी विमानस्थल का प्रयोग कर श्रमिक भेजने के आरोप में मैनपावर कंपनियों पर वैदेशिक रोजगार विभाग की कार्रवाई ने तहलका मचा दिया है।

व्यवसायी इस कार्रवाई को वापस न लिए जाने पर श्रमिकों को विदेश भेजने की प्रक्रिया पूरी तरह बंद करने की धमकी दे रहे हैं। वे संबंधित निकायों का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित कर चुके हैं। यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो श्रमिकों को वैदेशिक रोजगार के लिए भेजना बंद करने का फैसला लिया जाएगा।

विदेशी विमानस्थल से भारतीय विमानस्थल का उपयोग कर श्रमिक भेजने वाले १५६ मैनपावर कंपनियों को विभाग द्वारा कार्रवाई की गई थी।

विभाग ने २०८२ चैत्र १ से लेकर २०८३ जेठ ३१ तक श्रम स्वीकृति लेकर वैदेशिक रोजगार के लिए भेजे गए श्रमिकों की उड़ान विवरण मांगी थी। कुल ११७७ मैनपावर में से ६७८ ने विवरण उपलब्ध कराया।

इनमें से १५६ कंपनियों को विभाग की अनुमति के बिना विदेशी विमानस्थल का प्रयोग कर श्रमिक भेजने पर पहली बार चेतावनी दी गई।

वहीं, ४३४ कंपनियों को विवरण उपलब्ध न कराने पर निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण सूचना दी गई।

८ कंपनियों को दोहराई गई निर्देशों के उल्लंघन और विवरण न भेजने पर ५० हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। इनमें कई कंपनियां भारत से उड़ान करने वाली थीं और उन्होंने मांग किए गए विवरण नहीं भेजे थे। वैदेशिक रोजगार अधिनियम की धारा ५४ के तहत यह कार्रवाई हुई।

विभाग ने वैदेशिक रोजगार अधिनियम की धारा २२ के तहत देशी विमानस्थल के उपयोग संबंधी नियमों के अनुपालन की जांच हेतु विवरण मांगे थे।

कार्रवाई के बाद मैनपावर व्यवसायी आक्रोशित हैं और सरकार पर जबरदस्ती कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

व्यवसायी युवा, श्रम तथा रोजगार मंत्रालय में पुनरावेदन की तैयारी कर रहे हैं, जबकि विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई वापस नहीं हुई तो श्रमिकों को विदेश भेजना बंद कर दिया जाएगा।

नेपाल वैदेशिक रोजगार व्यवसायी संघ ने विभाग की महानिर्देशक मीरा आचार्य, श्रम मंत्री रामजी यादव और श्रम सचिव डॉ. दीपक काफ्ले से मिलकर अपनी समस्या प्रस्तुत की है।

सरकार की सहमति से भारतीय विमानस्थल का उपयोग हुआ: अध्यक्ष खत्री

सरकार की कार्रवाई वापस न लेने पर संघ ने श्रमिकों को भेजने का पूर्णतया बंद करने की चेतावनी दी है।

संघ अध्यक्ष डिकबहादुर खत्री ने इस कदम को अव्यावहारिक, अचानक और व्यवसायियों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला बताया।

उनका कहना है कि २०२४ में त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय विमानस्थल के टैक्सी-वे की मरम्मत के कारण विमानस्थल प्रतिदिन केवल १० घंटे खुलता था और उड़ानों की संख्या कम हो गई थी। ऐसी स्थिति में श्रमिकों को भेजने के लिए श्रम, परराष्ट्र और पर्यटन मंत्री की त्रिपक्षीय बैठक द्वारा भारतीय विमानस्थल से उड़ान की अनुमति दी गई।

उन्होंने बताया कि उस समय सरकार के निर्देशानुसार भारतीय दूतावास ने सूचना जारी कर बिना एनओसी श्रम स्वीकृति वाले श्रमिकों को उड़ान की अनुमति दी थी। यह कार्रवाई सरकारी संस्थाओं के बीच समन्वय की कमी और व्यवसायियों के साथ अन्याय जैसा है।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानें घटने के बाद तत्कालीन परराष्ट्र मंत्री आरजु राणा देउवा, तत्कालीन संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री बद्री पांडे तथा तत्कालीन श्रम मंत्री शरतसिंह भंडारी के निर्णय और नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास की सहमति से भारतीय विमानस्थल से श्रमिक भेजने की अनुमति दी गई थी।

नेपाल से उड़ानों के किराये अधिक महंगे होने के कारण व्यवसायी और श्रमिक भारतीय विमानस्थल का उपयोग करना पसंद करते हैं, क्योंकि नेपाल से टिकट लगभग ६५ हजार रुपये में है जबकि भारत से २१ हजार रुपये में।

उन्होंने कहा कि नेपाल के विमानस्थलों में करप्शन है और सरकार ने १३ प्रतिशत वैट जोड़ कर श्रमिकों को परेशानी में डाल दिया है। कम किराये वाले उड़ान का अधिकार सरकार द्वारा बाधित किया जा रहा है।

खत्री ने कहा कि विभाग ने विवरण भेजने के बावजूद कार्रवाई की है और उन एजेंसियों को भी कार्रवाई की सूची में शामिल किया गया जो भारतीय विमानस्थल का उपयोग ही नहीं करतीं।

इससे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में व्यवसायियों की ड्यू डिलिजेंस रिपोर्ट प्रभावित हुई है और फ्यूजन इंटरनेशनल जैसी प्रतिष्ठित एजेंसियों की मांग रद्द हुई है। इसका नकारात्मक प्रभाव नेपाल के वैदेशिक रोजगार क्षेत्र पर पड़ा है।

व्यवसायी इस कार्रवाई के खिलाफ युवा, श्रम और रोजगार मंत्रालय में पुनरावेदन करने की योजना बना रहे हैं। संघ ने श्रम मंत्री रामजी यादव और सचिव डॉ. दीपक काफ्ले से मिलकर अपनी मांगें रख दी हैं।

खत्री ने कहा, ‘यदि सरकार इस अन्यायपूर्ण कार्रवाई को वापस नहीं लेती और सेवा शुल्क व कानून में संशोधन कर इस क्षेत्र को व्यवस्थित नहीं करती, तो हम पूरी तरह से श्रमिकों को भेजना बंद करने पर मजबूर होंगे। ९० प्रतिशत व्यवसायी फिलहाल स्थिति को ‘शून्य’ मानकर श्रमिक भेजने का पक्षधर हैं।’

कार्रवाई के बाद संघ ने विभाग की महानिर्देशक आचार्य को ज्ञापन सौंपा। महानिर्देशक ने कहा कि विभाग ने कानून के तहत यह कार्रवाई की है।

उन्होंने बताया कि यदि कोई असंतुष्ट है तो मंत्रालय में पुनरावेदन कर सकता है।

इसी क्रम में संघ ने मंगलवार को श्रम मंत्री यादव और श्रम सचिव डॉ. दीपक काफ्ले से भेंट कर मैनपावर व्यवसायियों की समस्याएं और असंतोष व्यक्त किया। मंत्री यादव ने विभाग से चर्चा करने की बात कही और समीक्षा के बाद समाधान निकालने का आश्वासन दिया।