भारत ने चिप उत्पादन बढ़ाने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये की ‘सेमिकन 2.0’ योजना को मंजूरी दी
भारतीय मंत्रिपरिषद् ने देश के सेमिकंडक्टर क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये की “इंडिया सेमिकंडक्टर मिशन” (ISM 2.0) को मंजूरी दी है। इस योजना के अंतर्गत चिप निर्माण के लिए आवश्यक मशीन, विशेष रसायन और कच्चे माल के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देते हुए आयात कम करने का लक्ष्य सरकार ने रखा है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार यह कार्यक्रम छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगा, जिससे साल 2030 तक चिप मार्केट 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
भारतीय मंत्रिपरिषद् ने “इंडिया सेमिकंडक्टर मिशन” (ISM 2.0) के दूसरे चरण को मंजूरी दी है। 15 जुलाई को सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में लगभग 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट के साथ यह योजना स्वीकृत की गई है। यह राशि पहले चरण की स्वीकृत राशि (76 हजार करोड़ रुपये, दिसंबर 2021 में स्वीकृत) से कहीं अधिक है। दूसरे चरण में भारत चिप बनाने वाली बड़ी कंपनियां स्थापित करने की बजाय देश के भीतर ही चिप उत्पादन के लिए आवश्यक पूरा सिस्टम (इकोसिस्टम) विकसित करने का लक्ष्य रखता है।
इसके अंतर्गत चिप बनाने वाली मशीन/उपकरण, विशेष रसायन (स्पेशिलिटी केमिकल्स), आवश्यक कच्चे माल और आधुनिक पैकेजिंग तकनीक के स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे विदेश से होने वाले आयात में कमी आएगी। इससे पहले 31 मार्च को गुजरात के साणंद में कैन्स सेमिकन का प्लांट उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) से जोड़ने के लिए देश के अंदर मजबूत वातावरण तैयार करने पर जोर दिया था।
उनके अनुसार भारत का चिप बाजार वर्तमान में लगभग 45-50 बिलियन डॉलर के बराबर है और दशक के अंत तक यह 100 बिलियन डॉलर से अधिक हो जाएगा। इसलिए इसका बड़ा हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ‘सेमिकन 2.0’ की अवधारणा भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी में प्रस्तुत किए गए बजट के माध्यम से सार्वजनिक की थी, जिसमें इसके लिए प्रारंभिक रूप से लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का उल्लेख किया गया था।
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार ‘सेमिकन 2.0’ छह स्तंभों पर आधारित होगा। पहला, नए चिप डिजाइन कंपनियों और स्टार्टअप्स को बाजार तक पहुंचने में सहायता देने की रणनीति। दूसरा, चिप उत्पादन के लिए आवश्यक मशीन, रसायन और गैस के स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहन। तीसरा, नए सिलिकॉन, कंपाउंड सेमिकंडक्टर और डिस्प्ले फैक्ट्रियों को भारत में लाने का प्रयास। चौथा, चिप परीक्षण, पैकेजिंग सहित सुविधाओं का विस्तार। पांचवां, उन्नत तकनीक (नोड) पर काम, जिसमें अत्याधुनिक चिप (2 नैनोमीटर जैसे) तकनीक का विकास भी शामिल है। छठा, इस क्षेत्र के लिए आवश्यक दक्ष जनशक्ति तैयार करने की रणनीति।
भारत की इस नई नीति में अमेरिका, यूरोप, जापान और सिंगापुर जैसे विकसित देशों की कंपनियों ने भी रुचि दिखाई है। ‘इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमिकंडक्टर एसोसिएशन’ के अध्यक्ष अशोक चंदक के अनुसार इस संबंध में विभिन्न देशों के साथ सरकारी और व्यावसायिक स्तर पर साझेदारी के अवसर सकारात्मक रूप से बढ़ रहे हैं।





