
बार-बार की बातचीत और शुक्रवार को घंटों चली वार्ता के बाद आंदोलनरत मिटरब्याज पीड़ितों और सरकार के बीच नौ बिंदु पर सहमति हुई है, यह जानकारी सहभागियों ने दी है। इस सहमति के साथ ही पिछले नौ दिनों से आंदोलनरत मिटरब्याज पीड़ितों ने अपना आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया है। सरकार ने मिटरब्याज को आर्थिक अपराध के रूप में मान्यता देते हुए इसे पूर्ण रूप से उन्मूलित करने की घोषणा आगामी मंत्रिपरिषद् बैठक में प्रस्तावित करने की योजना बनाई है, यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय ने दी है। “इससे सभी फर्जी तमसुक, दृष्टिबन्धक, छिनुवा पास और बाध्यकारी चेक स्वतः अवैध और रद्द हो जाएंगे,” वार्ता के बाद कार्यालय ने कहा।
दोनों पक्षों की सहमति के अनुसार गृह मंत्रालय तीन महीनों के भीतर इस समस्या के समाधान के लिए विशेष विधेयक तैयार कर मिटरब्याज नियंत्रण से संबंधित कानून बनाएगा। इसके साथ ही एक अलग न्यायाधिकरण स्थापित किया जाएगा जो मामलों की सुनवाई करेगा, पीड़ितों की संपत्ति लौटाएगा और उचित क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करेगा, सरकार की प्रतिबद्धता है। वर्डा कार्यालय में लेनदेन प्रमाणित करते समय धन की वैध स्रोत और बैंक लेनदेन का प्रमाण अनिवार्य होगा और मिटरब्याज में निवेश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, ऐसा सहमति में उल्लेख है। “नया कानून फर्जी दस्तावेज बनाने, ब्याज में बढ़ोतरी करने, ऋणी को भुगतान न करने, अधिक ब्याज लेने, धमकाने, शारीरिक एवं मानसिक शोषण करने, खाली चेक या दस्तावेज पर जबरन हस्ताक्षर कराने तथा संपत्ति जबरन लेने को अपराध मानेगा,” प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया।
मिटरब्याजियों की जांच के लिए लिखित साक्ष्यों के फोरेंसिक लेब परीक्षण, संपत्ति के स्रोत की खोज और सफाई समेत जांच फौजदारी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी और न्यायाधीश मामलों में पीड़ितों को कानूनी सहायता प्रदान करेंगे। पीड़ितों की शिकायतों को संबोधित करने के लिए प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद् कार्यालय के सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समन्वय समिति और एक अलग डेस्क स्थापित किया जाएगा, इस बात की जानकारी सहभागियों ने दी है। जिलेस्तर पर सहायक प्रमुख जिला अधिकारी की अध्यक्षता में पीड़ित प्रतिनिधि सहित सहजीकरण समिति बनाई जाएगी, जो छह महीनों के भीतर सभी शिकायतों का समाधान करेगी और निगरानी प्रमुख जिला अधिकारी के नेतृत्व में होगी, यह भी सहमति में शामिल है।
मिटरब्याज के चक्र से बचने के लिए वार्षिक बजट में आर्थिक सहायता और राहत पैकेज लाने की सहमति के साथ ही पीड़ितों ने अपने सभी आंदोलन कार्य स्थगित कर दिए हैं, सरकार ने बताया है। गत असार २५ को जनकपुर के त्रितियागाछी से “पैदल न्याय मार्च” शुरू कर के बाराका निजगढ पहुंचने के बाद असार ३२ को गृह मंत्री सुधन गुरुङ और पीड़ित पक्ष के बीच काठमांडू में वार्ता टीम गठन की सहमति हुई थी। बाराका सिमरा में सरकारी टीम और मिटरब्याज पीड़ितों के प्रतिनिधियों के बीच हुई मौखिक सहमति को लिखित समझौते के रूप में बदला गया है। जनकपुर से काठमांडू तक पैदल मार्च कर रहे मिटरब्याज पीड़ितों को वहीं रोक कर सरकार ने वार्ता प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी। उससे पहले भी गुरुवार को सिंहदरबार स्थित प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद् कार्यालय में दोनों पक्षों के बीच गहरी बातचीत रात देर तक चली थी। इस बातचीत और मौखिक सहमति पर आधारित शुक्रवार को अंतिम समझौता हुआ, प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया। प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद् कार्यालय के सचिव पुष्कर सापकोटा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय टीम और पीड़ित पक्ष के अवधेश कुशवाह की अगुवाई वाले छह सदस्यीय टीम वार्ता में शामिल थे।





