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शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने राहुल गांधी पर छात्र राजनीति के लिए उपयोग का लगाया आरोप

शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने राहुल गांधी पर छात्र राजनीति को अपने राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल कर संसद के मानसून सत्र में विरोध उत्पन्न करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देने से सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ और आम जनता को असुविधा हुई। सरकार नीट परीक्षा से जुड़ी चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने लोकतांत्रिक बहस की बजाय राजनीतिक प्रदर्शनों को प्राथमिकता दी, प्रधान ने कहा। ६ साउन, काठमांडू।

धर्मेन्द्र प्रधान ने मंगलवार रात एक्स माध्यम से अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा, “लोकसभा के विपक्षी नेता राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार छात्रों का राजनीतिक रूप से उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने संसद के मानसून सत्र में बाधा उत्पन्न करने के लिए ऐसा किया। राहुल गांधी और कांग्रेस ने प्रधानमंत्री निवास के बाहर धरना देने का निर्णय लिया, जिससे आम जनता को दिक्कत हुई और निर्धारित सुरक्षा नियमों की भी अनदेखी हुई।”

उन्होंने आगे लिखा, “सरकार इस विषय पर पूरी चर्चा के लिए तैयार थी। इसके बावजूद कांग्रेस ने लोकतांत्रिक बहस की बजाय राजनीतिक प्रदर्शन को चुना। उनका उद्देश्य छात्रों की समस्याओं का समाधान निकालना नहीं था, बल्कि राजनीतिक खबर बनने के लिए अवरोध उत्पन्न करना था। राहुल गांधी के लिए यह मामला छात्रों का नहीं था।”

प्रधान ने कहा, “हमारी सरकार नीट परीक्षा पर चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। युवाओं की उचित चिंताओं को संसद में उठाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। भारतीय छात्र राजनीतिक अभियानों का हिस्सा बनने के बजाय बेहतर व्यवहार के पात्र हैं। उन्हें अराजकता नहीं, विश्वास चाहिए। नारे नहीं, समाधान चाहिए। अवरोध नहीं, जिम्मेदारी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “हम अपने छात्रों के आक्रोश के साथ-साथ जवाबदेही, सुधार और समाधान के लिए भी जिम्मेदार हैं। हमारी सरकार इन सभी पहलुओं पर काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”

राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से इस्तीफा की मांग की। वे प्रधानमंत्री आवास ७ लोक कल्याण मार्ग के बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। बाद में उन्हें हिरासत में लिया गया। कुछ घंटों बाद उन्हें और अन्य गिरफ्तार नेताओं को छत्रसाल स्टेडियम से रिहा कर दिया गया।