
सरकार ने सहुलियतपूर्ण कर्ज़ा उपभोग की अवधि पाँच वर्ष तक बढ़ाने की व्यवस्था की है। प्राकृतिक आपदा प्रभावितों के लिए पाँच लाख रुपए तक का निजी आवास निर्माण कर्ज़ा उपलब्ध कराया जाएगा। बैंक और वित्तीय संस्थान ब्याज दर में आधार दर से केवल १.५ प्रतिशत अधिक ही जोड़ सकेंगे। ७ साउन, काठमांडू।
सरकार ने सहुलियतपूर्ण कर्ज़ा को सरलता से पाँच वर्ष तक उपयोग करने की व्यवस्था की है। यदि कोई कर्ज़ी तीन वर्ष की अवधि के लिए सहुलियतपूर्ण कर्ज़ा लेकर समय पर भुगतान करता है, तो उसे वह कर्ज़ा नवीनीकृत करवाने या नया कर्ज़ा लेकर अतिरिक्त दो वर्ष तक सहुलियत प्राप्त करने की व्यवस्था की गई है। सरकार ने ब्याज अनुदान संबंधी कार्यविधि, २०८२ में संशोधन करते हुए पुराने सहुलियतपूर्ण कर्ज़ा का ब्याज अनुदान एकीकृत कार्यविधि, २०७५ के अनुसार मिलने वाले कर्ज़ा के नवीनीकरण की स्थिति में अनुदान प्रारंभ तिथि से पाँच वर्ष तक उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान जोड़ा है।
प्राकृतिक आपदा पीड़ितों को निजी आवास निर्माण कर्ज़ा देते समय बैंक और वित्तीय संस्थानों को राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण से अनुदान न मिलने की स्थिति में कर्ज़ी का स्वघोषणा लेने का प्रावधान जोड़ा गया है। संशोधित कार्यविधि के अनुसार, “यदि किसी त्रैमासिक में परिस्थिति कारणों से कर्ज़ी भुगतान नहीं कर पाता है, तो अगले त्रैमासिक में बकाया राशि चुका कर नियमित करे तो बैंक और वित्तीय संस्थान परिस्थिति कारणों और कर्ज़ा के सही उपयोग की पुष्टि करके समग्र अवधि का ब्याज अनुदान मांग सकेंगे।”
सहुलियतपूर्ण कर्ज़ा हेतु ब्याज अनुदान संबंधी एकीकृत कार्यविधि, २०७५ के अनुसार दिए गए कर्ज़ा तथा संबंधित सेवा और शर्तों के हिसाब से अनुदान प्रदान करने का प्रावधान भी जोड़ा गया है। कार्यविधि के अनुसार, कृषि एवं पशुपालन कर्ज़ा पाँच करोड़ रुपए तक, महिला उद्यमशीलता कर्ज़ा पच्चीस लाख रुपए तक, और वैदेशिक रोजगार से लौटे युवाओं के स्वरोजगार कर्ज़ा बीस लाख रुपए तक प्रदान किया जाएगा। इस प्रकार के कर्ज़ा की किस्ताबंदी आवधिक भुगतान की प्रकृति की होगी।





