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जेनेरेशन जेड आंदोलन में जले बानेश्वर के पुराने संसद भवन का भविष्य क्या होगा?

बानेश्वर के पुराने संसद भवन में प्रदर्शनकारी

तस्वीर स्रोत, AFP

पिछले वर्ष जेनेरेशन जेड आंदोलन के दौरान जले नए बानेश्वर स्थित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र की मरम्मत कर दोबारा चालू करना संभव नहीं है, ऐसा अधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला है।

पिछले वर्ष भदौ 23 को नए बानेश्वर के संसद भवन परिसर से चली गोली में युवा प्रदर्शनकारी मारे गए, जिसके अगले दिन प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन को निशाना बनाते हुए तीन दशकों से किराए पर चल रहे इस भवन में आग लगा दी।

सैंकड़ों की भीड़ ने आगजनी और तोड़फोड़ के बाद चीन सरकार के अनुदान और डिजाइन में निर्मित इस केंद्र की महत्वपूर्ण संरचनाएं इतनी क्षतिग्रस्त हो गईं कि अधिकारियों ने बताया कि उनका उपयोग करना असंभव है।

दरबार हत्याकांड में मारे गए राजा वीरेन्द्र शाह की पहल पर 2050 साल में निर्मित इस सम्मेलन केंद्र का नाम ‘वीरेन्द्र अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र’ रखा गया था। संविधान सभा की बैठक ने 2065 साल में गणतंत्र घोषित करने के बाद केंद्र के नाम से ‘वीरेन्द्र’ हटा दिया गया, जानकारों ने बताया।

लगभग दो दशकों से संसद भवन के रूप में इस्तेमाल हो रहे सम्मेलन केंद्र ने संसद सचिवालय, निवेश बोर्ड और कानून आयोग जैसे कार्यालयों से प्रतिवर्ष 18 करोड़ रुपये का किराया वसूल रहा था।